Eid al-Fitr 2026: सऊदी अरब, UAE सहित भारत और दुनिया भर में ईद का चांद कब नजर आएगा, जानें संभावित डेट

दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय ईद-उल-फितर 2026 की तैयारियों में जुटा है. जानिए भारत, सऊदी अरब और अन्य देशों में चांद दिखने की संभावित तारीखें और ईद कब मनाई जाएगी.

Eid al-Fitr 2026 Moon Sighting (Photo Credits: Pexels)

Eid al-Fitr 2026: पवित्र महीने रमजान के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान ईद-उल-फितर 2026 की तैयारियों में लग गए हैं. ईद की सटीक तारीख पूरी तरह से शव्वाल के अर्धचंद्राकार चंद्रमा (चांद रात) के दिखने पर निर्भर करती है. 2026 के चंद्र कैलेंडर के अनुसार, इस साल ईद का जश्न 19 मार्च से मध्य पूर्व में शुरू होकर अगले 48 घंटों के भीतर दक्षिण एशिया और ओशिनिया तक पहुंचने की संभावना है.

चंद्रमा दर्शन और चांद रात का महत्व

ईद-उल-फितर की शुरुआत शव्वाल महीने के नए चांद के दिखने के साथ होती है. जिस रात चांद दिखाई देता है, उसे 'चांद रात' कहा जाता है. यह रात उत्सव की तैयारियों और सामुदायिक मेल-मिलाप का समय होती है. चूंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्र आधारित होता है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में ईद की तारीख हर साल लगभग 10 से 11 दिन पहले खिसक जाती है.  यह भी पढ़े:  Ramzan 2026: 26 साल बाद दुर्लभ संयोग, माह-ए-रमजान में इस बार हो सकते हैं दो ‘अलविदा जुमा’

18 मार्च को चांद देखने वाले देश (सऊदी अरब और खाड़ी देश)

जिन देशों ने 18 फरवरी को रमजान का उपवास शुरू किया था, वे बुधवार, 18 मार्च 2026 की शाम को चांद देखने की कोशिश करेंगे.

भारत और दक्षिण एशिया में कब होगी ईद?

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में, जहां रमजान एक दिन देरी से (19 फरवरी) शुरू हुआ था, वहां चांद देखने की कोशिश गुरुवार, 19 मार्च 2026 को की जाएगी.

ओशिनिया और सुदूर पूर्व के क्षेत्र

ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिजी जैसे क्षेत्रों में चांद देखने की कोशिश 19 और 20 मार्च के बीच होगी. यहां स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर ईद 20 या 21 मार्च को होने की प्रबल संभावना है.

सामाजिक और धार्मिक परंपराएं

चांद रात के अवसर पर विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बाजारों में भारी रौनक रहती है. महिलाएं मेहंदी लगाती हैं और परिवार नए कपड़ों और मिठाइयों की खरीदारी करते हैं. ईद की सुबह विशेष सामूहिक प्रार्थना (नमाज-ए-ईद) के साथ शुरू होती है. नमाज से पहले 'जकात-उल-फितर' (दान) देना अनिवार्य है, ताकि समाज के जरूरतमंद लोग भी खुशी के साथ त्योहार मना सकें.

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