द्विजप्रिय संकष्टी गणेश चतुर्थी (Dwijapriya Sankashti Ganesh Chaturthi ) भगवान गणेश को समर्पित है और हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रमा के उदय होने पर और गुरूवार 9 फरवरी को पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को चंद्रमा को अर्घ देकर व्रत तोड़ा जाता है. इसलिए संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत गुरुवार के दिन रखा जाएगा. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. यह भी पढ़ें: Vastu Tips: क्या है तांबे के सूर्य का महत्व? क्यों और किस दिशा में रखें? इस बात का भी ध्यान रखें!
इस दिन, भगवान गणेश के भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखते हैं और चंद्र देव (चंद्रमा देवता) की पूजा करने के बाद ही व्रत खोलते हैं. माना जाता है कि व्रत रखने की परंपरा 700 ईसा पूर्व से शुरू हुई थी. संकष्टी व्रत को संकट हर चतुर्थी भी कहा जाता है. नाम के पीछे कारण यह है कि भगवान गणेश को बाधाओं / समस्याओं को खत्म करने वाले भगवान के रूप में संदर्भित किया जाता है. इसलिए इस दिन का बड़ा ही महत्व है, इस दिन लोग गणेश के ग्रीटिंग्स और wallpapers भेजकर शुभकामनाएं देते हैं. आप भी नीचे दिए गए ग्रीटिंग्स भेजकर गणेश चतुर्थी की बधाई दे सकते हैं.
1. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023

2. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की बधाई

3. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की शुभकामनाएं

4. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी

5. आपके घर में सुख और समृद्धि का आगमन हो
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की शुभकामनाएं

इस दिन लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठते हैं और सभी कार्य संपन्न होने के बाद स्नान करते हैं. इसके बाद लोग कुछ देर ध्यान करते हैं. लोग मोदक भी बनाते और चढ़ाते हैं. शाम को चंद्रमा निकलने से पहले गणपति की पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें. पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद बांटें. रात को चंद्रमा को देखने के बाद व्रत तोड़ा जाता है और इस तरह संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूरा होता है.












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