Dhanteras 2025 Sanskrit Wishes: शुभ धनत्रयोदशी! संस्कृत के इन Shlokas, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें बधाई
धनतेरस 2025 (Photo Credits: File Image)

Dhanteras 2025 Wishes in Sanskrit: हिंदू धर्म में धनतेरस (Dhanteras) के पर्व का विशेष महत्व बताया जाता है, जो पांच दिवसीय दिवाली उत्सव (Diwali Festival) का पहला त्योहार होता है. दरअसल, अंधकार पर प्रकाश की जीत के पर्व दिवाली का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है, जिसकी शुरुआत धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi) यानी धनतेरस से होती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, इस साल 18 अक्टूबर 2025 को धनतेरस है. पांच दिवसीय दिवाली (Diwali) के पहले पर्व धनतेरस के दिन प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की जाती है. इसके साथ ही इस दिन सोने-चांदी के आभूषणों के साथ-साथ धातुओं के बर्तन खरीदे जाते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन खरीदी गई चीजों में कई गुना वृद्धि होती है, इसलिए इस दिन खरीददारी करना बेहद शुभ माना जाता है. धन-ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि की कामना के अलावा उत्तम आरोग्य के लिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का भी विधान है. इस खास अवसर पर आप संस्कृत के इन विशेज, श्लोक, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए संस्कृत में शुभ धनत्रयोदशी कह सकते हैं.

1- ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:।
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय।।
भावार्थ: महा सुदर्शन धारण करने वाले वासुदेव भगवान श्रीहरि के स्वरूप धन्वंतरि को हम नमन करते हैं, जो हाथ में अमृत कलश लेकर, सभी भयों का नाश और रोगों का निवारण करते हैं.

धनतेरस 2025 (Photo Credits: File Image)

2- अन्वेषितं च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं॥
भावार्थ: जिन्होंने निरंतर समस्त रोग दूर किए, जिन्होंने (अच्छे) आरोग्य की विधि बताई, जिन्होंने औषधियों के छुपे स्वरूप को बताया, उन धन्वंतरि भगवान को मैं प्रणाम करता हूं.

धनतेरस 2025 (Photo Credits: File Image)

3- क्षीरोदमथनोद्भूतं दिव्यगन्धानुलेपिनम्।
सुधाकलशहस्तं तं वन्दे धन्वन्तरिं हरिम्॥
भावार्थ: जिसका उद्भव समुद्र-मंथन से हुआ है, जो दिव्य गंधों से लिप्त हैं, जिनके हाथों में अमृत-कलश है, उस भगवान धन्वंतरि को नमन है.

धनतेरस 2025 (Photo Credits: File Image)

4- सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोस्तु ते ॥
भावार्थ: सिद्धि, बुद्धि, भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली हे भगवती महालक्ष्मी, हम आपको सदैव प्रणाम करते हैं.

धनतेरस 2025 (Photo Credits: File Image)

5- त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप।
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः।।
भावार्थ: हे तीनों लोकों के स्वामी, तीनों लोकों के नाथ, महा विष्णु के स्वरूप भगवान धन्वंतरि, जो अपने हाथों में अमृत कलश धारण करते हैं, उन नारायण के स्वरूप को हम नमन करते हैं.

धनतेरस 2025 (Photo Credits: File Image)

धनतेरस के दिन भगवान विष्णु के अवतार भगवान धन्वंतरि का अमृत मंथन के दौरान प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन धन्वंतरि जयंती (Dhanvantari Jayanti) भी मनाई जाती है. आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान जब प्रकट हुए थे, तब उनके हाथों में अमृत कलश था, इसलिए धनतेरस के दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा निभाई जाती है. इस दिन सोना-चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन खरीदना काफी शुभ माना जाता है. धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति, वैभव और संपन्नता का आगमन होता है.