Sharad Navratri 2025: नवरात्रि पर कैसे करें कलश स्थापना? कलश में क्या वस्तुएं डालें, और क्या है इसका आशय? जानें एक रोचक एवं इमोशनल कथा?

   गणपति विसर्जन के साथ ही श्राद्ध का महीना शुरू हो रहा है. इसके बाद शरद नवरात्रि की धूम शुरू हो जाएगी. नवरात्रि का प्रारंभ और पहला आकर्षण कलश स्थापना होती है. कलश को सभी देवी-देवताओंतीर्थोंऔर ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतीक माना जाता हैजिससे घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और पूजा सफल होती है. कलश स्थापना नवरात्रि उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है और देवी की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है. शरद नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरु हो रहा है. इस अवसर पर आइये जानते हैं, एक इमोशनल कथा के बारे में कि कलश में क्या क्या वस्तु डाली जाती हैं, उसका क्या आशय होता है.

कलश स्थापना की पौराणिक कथा नन्हीं पूजा और माँ का कलश

प्राचीनकाल में एक गाँव की छोटी-सी बस्ती में नवरात्रि की तैयारियां चल रही थीं. हर घरों में सफाई, साज- सज्जा पूजा की तमाम चहल-पहल थी. सात साल की नन्हीं पूजाजो अपनी माँ के साथ अकेली रहती थीपहली बार घटस्थापना में भाग लेने को उत्साहित थी. माँगायत्रीएक विधवा महिला थीजो सिलाई का काम करके घर-परिवार का खर्च चलाती थी. यद्यपि वह हर साल शरद नवरात्रि पर बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ कलश स्थापित करती थी, लेकिन वह समझती थी कि पूजा बड़ी हो गई हैऔर वह भी इस परंपरा को समझे,

कलश स्थापना का दिन

   सुबह-सुबह माँ ने पूजा को उठायाऔर बोली, आज घटस्थापना है, माँ दुर्गा को आमंत्रित करेंगे. चलोकलश स्थापना की तैयारी करते हैं.

पूजा ने उत्सुकतावश पूछा, माँइस कलश में क्या-क्या वस्तुएं डालते हैं, उनका क्या महात्म्य है?’ माँ ने मुस्कुराते हुए एक-एक चीज़ दिखाने लगीं. सर्व प्रथम हम मिट्टी लेंगे, यह धरती का प्रतीक होगा. इसमें जो बोएंगे, जो जीवन और समृद्धि का प्रतीक होगा. कलश में हम गंगाजल  एवं पानी लेंगे. क्योंकि जल ही जीवन है, इसे कलश में डालते हैं, जो जीवन और समृद्धि को दर्शाता है, ताकि देवी की ऊर्जा को स्थिर किया जा सके. अब इसमें पान, सुपारी और सिक्का डालते हैं, जो समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है, इसके ऊपर जटा वाला नारियल रखते हैं, जो मां भवानी की शीश माना जाता है, जिससे उनके आगमन की प्रतीक्षा होती है. अब इसमें हल्दी, कुमकुम और चावल डालते हैं, जो शुभता, पवित्रता और श्रद्धा का प्रतीक है

दादी की वह इमोशनल वस्तु

माँ ने एक छोटी-सी फटी-पुरानी लाल चुनरी निकालीपूजा ने पूछा, ये फटी चुनरी क्यों है? माँ ने अश्रुपूरित आंखों से बताया कि ये तुम्हारी दादी की है, जब मैं छोटी थीतब उन्होंने इसे कलश पर चढ़ाया था. उन्होंने कहा था कि माँ दुर्गा भाव देखती हैंवस्त्र नहीं. तब से ये चुनरी हर साल हमारे कलश पर चढ़ती है.’

पूजा ने वो चुनरी बड़े प्यार से उठाई और बोली,

पूजा ने सगर्व कहा, इस बार मैं मां दुर्गा से यही माँगूँगी कि हमारी चुनरी जैसी ही हमारी जिंदगी भी हमेशा मां की छांव में रहे. थोड़ी पुरानीमगर अत्यंत पवित्र.

माँ और पूजा ने मिलकर कलश स्थापित किया. मां ने देखा कि पूजा ने अपने छोटे से गुल्लक से एक रुपया निकाला और कलश में डाल दिया. मा ने पूछा बेटा ये क्यों डाला आपने?

पूजा बोली, ये मेरा पहला दान है माँ दुर्गा के लिए, ताकि हम कभी तंगहाल न रहें. माँ की आँखें भर आईं. उस दिन न केवल कलश स्थापना हुई, बल्कि मां और बेटी के रिश्ते में भी आस्था और परंपरा की डोर और मजबूत हो गई.