रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) दिसंबर के पहले सप्ताह में भारत का दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वह 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पुतिन का दौरा 5–6 दिसंबर को होने की संभावना है. भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की परंपरा साल 2000 से चली आ रही है. यह सम्मेलन बारी-बारी से दोनों देशों में आयोजित होता है. कोरोना महामारी के दौरान इसमें कुछ व्यवधान जरूर आए, लेकिन इसे हमेशा दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का सबसे अहम स्तंभ माना जाता है.
पुतिन का यह दौरा न केवल भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को नई गति देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की मजबूत एकजुटता का भी संकेत होगा. इस दोस्ती से ट्रंप को दिक्कर भी जरूर होगी.
अजीत डोभाल की मास्को यात्रा में बनी थी रूपरेखा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की अगस्त में हुई मास्को यात्रा के दौरान इस उच्च-स्तरीय दौरे पर चर्चा हुई थी. उस समय तारीख तय नहीं हो पाई थी, लेकिन अब सक्रिय तैयारी जोरों पर है. उप-NSA पवन कपूर ने भी प्रेस ब्रीफिंग में पुष्टि की कि इस यात्रा को लेकर काम तेज़ी से चल रहा है.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
इस शिखर सम्मेलन में कई अहम क्षेत्रों पर बातचीत होने की संभावना है:
- व्यापार और वित्तीय सहयोग
- रक्षा और तकनीकी साझेदारी
- स्वास्थ्य सेवा और ह्यूमेनिटेरियन मुद्दे
- हाई-टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
इसके अलावा, भारत और रूस के बीच SCO, BRICS और अन्य वैश्विक मंचों पर समन्वय भी प्रमुख विषय रहेगा.
लावरोव का बयान
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी पुतिन की भारत यात्रा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास "बहुत व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा" है, जिसमें व्यापार, सैन्य सहयोग, वित्तीय और मानवीय मामलों से लेकर उच्च प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय समन्वय तक सब शामिल है.













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