Udaipur Leela Palace Fined: उदयपुर के लीला पैलेस होटल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना; बिना अनुमति गेस्ट के कमरे में घुसा था स्टाफ
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Udaipur Leela Palace Fined: चेन्नई (Chennai) की एक उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) ने उदयपुर (Udaipur) के प्रसिद्ध लग्जरी होटल 'द लीला पैलेस' (The Leela Palace) पर भारी जुर्माना लगाया है. जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चेन्नई (उत्तर) ने होटल को सेवा में गंभीर कमी और अतिथि की गोपनीयता (Privacy) के उल्लंघन का दोषी पाया है. आयोग ने होटल को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को मुआवजे और रिफंड के रूप में कुल 10.65 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करे.

यह मामला जनवरी 2025 का है, जब होटल के एक हाउसकीपिंग स्टाफ ने मास्टर की (Master Key) का उपयोग कर एक दंपत्ति के कमरे में बिना अनुमति प्रवेश किया था. यह भी पढ़ें: Worm Inside Good Day Biscuit: मुंबई कंज्यूमर कोर्ट ने मलाड में ब्रिटानिया बिस्किट के पैकेट के अंदर जिंदा कीड़ा मिलने के बाद महिला को 1.75 लाख रु का मुआवजा देने का दिया आदेश

क्या था पूरा मामला?

चेन्नई की एक वकील (शिकायतकर्ता) ने जनवरी 2025 में अपने पति के जन्मदिन और 'बेबी-मून' (Baby-moon) का जश्न मनाने के लिए लीला पैलेस, उदयपुर में 55,500 रुपये में एक प्रीमियम 'ग्रैंड रूम' बुक किया था. शिकायत के अनुसार, जब वह और उनके पति वॉशरूम में थे, तभी हाउसकीपिंग स्टाफ ने घंटी बजाने के कुछ ही सेकंड के भीतर मास्टर चाबी से दरवाजा खोल दिया और कमरे में दाखिल हो गया.

शिकायतकर्ता ने दलील दी कि वह उस समय गर्भवती थीं और इस घटना से उन्हें गहरा मानसिक आघात और अपमान झेलना पड़ा.

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: SOP निजता से ऊपर नहीं

होटल ने बचाव में कहा कि स्टाफ ने अपने 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) के तहत ही प्रवेश किया था. हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा:

  • निजता का अधिकार: होटल की आंतरिक एसओपी (SOP) किसी मेहमान के निजता के मौलिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकती.
  • असुरक्षित प्रक्रिया: एक मिनट से भी कम समय में मास्टर चाबी का उपयोग करना अनुचित और असुरक्षित है, खासकर जब मेहमान वॉशरूम का उपयोग कर रहे हों.
  • अतिरिक्त देखभाल: शिकायतकर्ता के गर्भवती होने के कारण होटल पर 'ड्यूटी ऑफ केयर' (देखभाल की जिम्मेदारी) और भी अधिक थी.

होटल की लापरवाही के सबूत

आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान होटल प्रबंधन द्वारा दिए गए माफीनामे, होटल अधिकारियों के साथ व्हाट्सएप चैट और घटनास्थल की तस्वीरों को आधार बनाया. सबूतों में कमरे के बाहर सीसीटीवी कैमरे का काम न करना और वॉशरूम के दरवाजे में खराबी की बात भी सामने आई. कोर्ट ने चेक-आउट के समय होटल स्टाफ द्वारा दंपत्ति को घंटों इंतजार कराने और उनका सामान रोकने जैसे व्यवहार की भी कड़ी आलोचना की.

मुआवजे का विवरण

आयोग ने होटल को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया है:

  • रूम टैरिफ: ₹55,500 का पूरा रिफंड (9% ब्याज के साथ).
  • मुआवजा: मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए ₹10,00,000 (10 लाख रुपये).
  • मुकदमा खर्च: ₹10,000 की कानूनी लागत.

होटल प्रबंधन को यह राशि दो महीने के भीतर चुकानी होगी. रिपोर्ट के अनुसार, होटल अब इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्पों और अपील पर विचार कर रहा है.