नाशिक: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) यानी टीसीएस (TCS) के नाशिक बीपीओ यूनिट (Nashik BPO Unit) में यौन शोषण (S*xual Abuse) और जबरन धर्मांतरण (Forced Religious Conversion) के आरोपों ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत को झकझोर कर रख दिया है. इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से एक मुख्य नाम निदा खान (Nida Khan) का है. निदा खान, जो कंपनी में एचआर मैनेजर (HR Manager) के पद पर कार्यरत थीं, पर आरोप है कि उन्होंने महिला कर्मचारियों की शिकायतों को न केवल नजरअंदाज किया, बल्कि आरोपियों को संरक्षण भी दिया. यह भी पढ़ें: TCS Nashik Row: टीसीएस नाशिक यौन उत्पीड़न मामले में एचआर पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप, कई कर्मचारी निलंबित और गिरफ्तार
कौन हैं निदा खान?
30 वर्षीय निदा खान टीसीएस के नाशिक कार्यालय में मानव संसाधन (HR) प्रबंधक के रूप में कार्यरत थीं. उनका मुख्य कार्य कर्मचारियों की शिकायतों का निवारण करना और 'पॉक्स' (POSH) अधिनियम के तहत कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना था.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निदा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं. उनकी गिरफ्तारी 10 अप्रैल को हुई, जब वे फरार बताई जा रही थीं. अब उन्हें इस पूरे मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
'लेडी कैप्टन' और धर्मांतरण के गंभीर आरोप
जांचकर्ताओं और शिकायतकर्ता महिलाओं के अनुसार, निदा खान की भूमिका केवल शिकायतों की अनदेखी तक सीमित नहीं थी. उन पर आरोप है कि वे महिला कर्मचारियों के साथ दोस्ती बढ़ाती थीं और बाद में उन्हें नमाज पढ़ने और हिजाब पहनने जैसी धार्मिक प्रथाओं के लिए प्रभावित करती थीं. कुछ रिपोर्टों में उन्हें 'लेडी कैप्टन' और 'इनेबलर' (सहयोग देने वाली) कहा गया है, जो कथित तौर पर अन्य आरोपियों के लिए रास्ता आसान करती थीं.
महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप
अब तक कम से कम आठ महिला कर्मचारियों ने वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ मानसिक और यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है। कुल नौ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं, जिनमें निम्नलिखित आरोप शामिल हैं:
- अशोभनीय व्यवहार: अनुचित तरीके से छूना, अश्लील फब्तियां कसना और द्विअर्थी बातें करना.
- दबाव की राजनीति: विरोध करने वाली महिला कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ा देना या नौकरी से निकालने की धमकी देना.
- एचआर की निष्क्रियता: बार-बार शिकायत करने के बावजूद एचआर विभाग (निदा खान) द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना.
एसआईटी की जांच और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए नाशिक पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. निदा खान पर छेड़छाड़, आपराधिक धमकी और जबरन धर्मांतरण से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कंपनी के भीतर कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था. यह भी पढ़ें: Nashik MNC S*x Harassment Case: नासिक एमएनसी यौन उत्पीड़न मामला, महिला पुलिसकर्मियों ने अंडरकवर ऑपरेशन में आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा
टाटा संस और टीसीएस की प्रतिक्रिया
टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने इस घटना को "बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक" बताया है. उन्होंने पुष्टि की है कि टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) आरती सुब्रमण्यन की देखरेख में आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है. कंपनी ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराते हुए सभी गिरफ्तार आरोपियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस और एचआर विभाग की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है. एसआईटी की जांच के नतीजे न केवल आरोपियों का भविष्य तय करेंगे, बल्कि भारत के आईटी सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा के मानकों को भी प्रभावित करेंगे.












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