Pune Shocker: पुणे पुलिस की संवेदनहीनता, मदद मांगने आई बांग्लादेशी पीड़िता को दोबारा कोठे पर भेजा; महिला कॉन्स्टेबल निलंबित
पुणे के बुधवार पेठ इलाके से भागकर मदद मांगने पुलिस स्टेशन पहुंची एक बांग्लादेशी महिला को पुलिस ने वापस उसी कोठे पर भेज दिया। इस गंभीर लापरवाही के आरोप में एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है.
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पुणे: महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे शहर (Pune City) से पुलिस जवाबदेही और संवेदनशीलता पर सवाल उठाने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पुणे के रेड-लाइट एरिया (Pune Red Light Area) 'बुधवार पेठ' (Budhwar Peth) में जबरन देह व्यापार में धकेली गई एक बांग्लादेशी महिला (Bangladeshi Woman) जब मदद की गुहार लेकर फरासखाना पुलिस स्टेशन (Faraskhana Police Station) पहुंची, तो कथित तौर पर पुलिस ने उसे सुरक्षा देने के बजाय वापस उसी कोठे पर भेज दिया जहां से वह भागकर आई थी. यह भी पढ़ें: Gurugram Shocker: गुरुग्राम में एयरलाइन कर्मचारी की शर्मनाक करतूत, महिला सहकर्मी से छेड़छाड़ और दुष्कर्म का प्रयास; पुलिस ने दर्ज की FIR
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित महिला का दावा है कि उसे तस्करी कर भारत लाया गया था और बुधवार पेठ में उसकी मर्जी के खिलाफ देह व्यापार के लिए मजबूर किया जा रहा था. अपनी जान जोखिम में डालकर वह वहां से भागने में सफल रही और सीधे पुलिस स्टेशन पहुंची. महिला ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की और आपबीती सुनाई.
आरोप है कि वहां मौजूद एक महिला कॉन्स्टेबल ने पीड़िता को ट्रैफिकिंग विक्टिम (तस्करी की शिकार) के रूप में देखने के बजाय उसे पास की एक पुलिस चौकी पर ले गई और बाद में कथित तौर पर उसी ब्रोथल ऑपरेटर (कोठा संचालक) के हवाले कर दिया जिससे वह बचकर आई थी.
कार्यकर्ता के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई
इस घटना का खुलासा तब हुआ जब समाजसेवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस संवेदनहीनता की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त (DCP) हृषिकेश रावले ने प्रारंभिक जांच के बाद गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में कॉन्स्टेबल मनीषा पुकाले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
आंतरिक जांच और सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा
पुणे पुलिस ने इस मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
- क्या मानव तस्करी विरोधी (Anti-Human Trafficking) प्रोटोकॉल का पालन किया गया था?
- क्या पुलिस और कोठा संचालकों के बीच कोई मिलीभगत थी?
- स्टेशन रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके.
सामाजिक संगठनों में आक्रोश
इस घटना ने मानव तस्करी विरोधी समूहों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष पैदा कर दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो पीड़ितों के लिए सुरक्षा तंत्र बेमानी हो जाता है. यह घटना पीड़ित संरक्षण तंत्र की विफलता को दर्शाती है और मांग की जा रही है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाना चाहिए.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 13, 2026 02:41 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

