Maharashtra Hindi Row: महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि तीन भाषा नीति से जुड़े सभी सरकारी आदेश (GRs) को रद्द कर दिया गया है. इसके साथ ही सरकार ने भाषा फॉर्मूला के क्रियान्वयन को लेकर एक नई समिति गठित करने की भी घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में मशेलकर समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया गया था, जिसमें पहली कक्षा से तीन भाषा नीति लागू करने की बात कही गई थी.
हालांकि, अब इस पर दोबारा विचार करते हुए वर्तमान सरकार ने यह फैसला लिया है कि नई समिति पूरे मसले का अध्ययन करेगी और आगे की रणनीति तय करेगी.
भाषा सलाहकार समिति की राय
गौरतलब है कि 27 जून को सरकार की भाषा सलाहकार समिति ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 5 से पहले किसी भी तीसरी भाषा—चाहे वह हिंदी हो या कोई और—को नहीं पढ़ाया जाना चाहिए. समिति ने इसे बच्चों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के खिलाफ बताया था.
समिति ने चेतावनी दी थी कि अगर प्राइमरी स्तर पर एक और भाषा थोपी गई, तो बच्चों की भाषाई समझ कमजोर हो सकती है और उनकी मातृभाषा मराठी पर असर पड़ सकता है. इस प्रस्ताव के बाद राज्यभर में बहस शुरू हो गई थी और कई संगठनों ने भी इसका समर्थन किया था.
संतुलित नीति बनाए जानें की उम्मीद
अब सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि सभी पक्षों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए कोई संतुलित नीति बनाई जाएगी, जिससे न केवल मराठी भाषा को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि छात्रों का विकास भी सही दिशा में हो सकेगा.













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