छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: दूसरे चरण में इन सीटों पर सभी की नजर, जोगी-बघेल समेत कई दिग्गज मैदान में
जनता कांग्रेस प्रमुख अजीत जोगी (Photo Credit-PTI)

रायपुर: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर देश में सियासी गरमा-गर्मी चरम पर है. पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में छत्तीसगढ़ पहला राज्य है. जहां विधानसभा चुनाव के लिए प्रथम चरण की 18 सीटों पर 12 नवंबर को मतदान हो चुके हैं, राज्य में दूसरे चरण की 72 सीटों लिए मतदान 20 नवंबर को होने हैं. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में इस बार पिछले तीन चुनावों के मुकाबले न केवल प्रत्याशियों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. छत्तीसगढ़ के पहले विधानसभा चुनाव 2003 में 254 निर्दलीयों से बढ़कर यह संख्या अब 561 तक पहुंच गई है.

साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद से ही छत्तीसगढ़ में चुनावी गणित लगातार बदलता रहा है. इन 18 सालों में कांग्रेस और बीजेपी दोनों के पारंपरिक वोटर कम हुए हैं और हर चुनाव स्थानीय मुद्दे कुछ अलग असर दिखाते आए हैं. ऐसे में यह कहना भी मुश्किल होगा कि राज्य में इस बार मुख्यमंत्री का ताज किसके सर सजेगा.

छत्तीसगढ़ में पिछले 18 सालों से हो रहे राजनीतिक परिवर्तन में इस बार क्या अलग देखने को  मिलता है यह चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा. साल 2018 की बात करे तो इस बार स्थितियां और भी बदल गई हैं. लगभग हर सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है. यहां तक कि अजीत जोगी-बीएसपी गठबंधन और अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप के भी कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिनका स्थानीय स्तर पर काफी दबदबा है.

दूसरे चरण के प्रमुख उम्मीदवार

अजीत जोगी (मरवाही) : राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी बीजेपी और कांग्रेस दोनों की सीटों का गणित खराब करने की ताकत रखते हैं. राज्य में इस बार अजीत जोगी और मायावती का गठबंधन बीजेपी और कांग्रेस दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी सतनामी समुदाय के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं और मायावती भारत में प्रमुख दलित नेता के रूप में जानी जाती हैं. तो ऐसे में इन दोनों नेताओं का गठबंधन बीजेपी और कांग्रेस के वोटों की संख्या में सेंध लगा सकता है.

भूपेश बघेल (पाटन):  छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए भूपेश बघेल कांग्रेस पार्टी का बड़ा चेहरा हैं. प्रदेश के कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष भूपेश बघेल सूबे में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की सफलता के लिए जुटे हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल अपने सियासी खेल से छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा फेर बदल कर सकते हैं. अक्टूबर 2014 में भूपेश बघेल को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और तब से वो इस पद पर हैं. भूपेश बघेल का दावा है कि इस चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन करेगी.

रामदयाल उइके (पाली-तानाखार): 18 सालों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे रामदयाल उइके कांग्रेस छोड़ बीजेपी के साथ जा चुके हैं. ऐसे में अब वे कांग्रेस के चुनावी समीकरण को कई हद्द तक बिगाड़ सकते है. रामदयाल उइके प्रदेश कांग्रेस का आदिवासी चेहरा और कार्यकारी अध्यक्ष थे. रामदयाल उइके उन चंद नेताओं में हैं जो लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं. रामदयाल उइके पाली-तानाखार सीट से चुनावी मैदान में हैं.

ओ पी चौधरी (खरसिया): पूर्व आईएएस और रायपुर के कलेक्टर रहने के बाद राजनीति में आए 37 वर्षीय ओपी चौधरी बीजेपी के टिकट पर खरसिया सीट से चुनावी मैदान में हैं. खरसिया सीट काफी हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है. यह सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है. बता दें कि चौधरी ने कुछ महीने पहले ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली में पार्टी जॉइन की थी. जातीय समीकरण की बात करें तो चौधरी जिस जातिय समुदाय से आते हैं उसका राज्य में अच्छा-खासा वोट बैंक है.

श्रीचंद सुंदरानी (रायपुर उत्तर):  श्रीचंद सुंदरानी राज्य की उस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जिस सीट को लेकर बीजेपी आखिर तक फंसी हुई थी. सुंदरानी रायपुर उत्तर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं. बता दे कि बीजेपी ने अपने 89 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए थे लेकिन रायपुर उत्तर सीट को लेकर पेंच फंसा था. क्योकि इस सीट से कई प्रबल दावेदार थे लेकिन सिंधी समाज के दबाव के चलते बीजेपी ने श्रीचंद सुंदरानी को रिपीट किया है.