जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने अब सख्त सैन्य कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस हमले में सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया, जिससे देशभर में आक्रोश की लहर दौड़ गई है. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और गृह मंत्रालय के उच्च स्तरीय बैठकों के बाद संकेत मिल रहे हैं कि भारत जल्द ही सीमापार आतंकवाद पर कड़ा जवाब दे सकता है.
इस बीच एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मई को मॉस्को में आयोजित होने वाली विक्ट्री डे परेड में शामिल नहीं होंगे. पेसकोव के अनुसार, यह निर्णय भारत की ओर से लिया गया है और इसकी जानकारी पहले ही रूसी प्रशासन को दे दी गई थी.
भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताएं बदलीं?
पीएम मोदी का रूस की विक्ट्री डे परेड में शामिल न होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है. एक ओर यह भारत की आंतरिक सुरक्षा स्थितियों की गंभीरता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी देता है कि भारत फिलहाल आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदमों और रणनीतिक तैयारी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है.
Just in:
PM Modi not to attend the victory day parade in Moscow on 9th May: Dmitry Peskov, Press Secretary of the President of Russia
— Sidhant Sibal (@sidhant) April 30, 2025
संभावित कार्रवाई
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों को सबक सिखाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. सैन्य प्रमुखों की बैठकों का दौर तेज हो गया है और सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है. एक तरफ भारत आतंकी हमले के बाद सख्त सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी का रूस दौरा रद्द करना यह संकेत देता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है. आने वाले दिनों में भारत की रणनीति और कार्रवाई पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी.













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