पटना: निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (Independent MP Pappu Yadav) अपने एक बेहद विवादास्पद बयान के कारण कानूनी और सामाजिक मुश्किलों में घिर गए हैं. बिहार राज्य महिला आयोग (Bihar State Commission for Women) ने उनके उस बयान पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि '90% महिलाएं राजनेताओं के कमरों में प्रवेश किए बिना राजनीति नहीं कर सकतीं.' आयोग ने इस टिप्पणी को महिलाओं की गरिमा और उनके सामाजिक सम्मान के खिलाफ बताते हुए सांसद से तीन दिनों के भीतर जवाब तलब किया है. यह भी पढ़ें: PM Narendra Modi Is a Terrorist’: मल्लिकार्जुन खड़गे के 'आतंकवादी' वाले बयान पर मचा सियासी घमासान, कांग्रेस अध्यक्ष ने दी सफाई; बीजेपी ने की माफी की मांग
'महिलाओं के आत्मसम्मान को पहुंची ठेस'
मंगलवार, 21 अप्रैल को आयोग की अध्यक्ष अप्सरा द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि पप्पू यादव का यह बयान सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुँचाता है. आयोग ने उनसे पूछा है कि इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश क्यों न की जाए?
आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा जा सकता है.
‘90% महिलाएं नेताओं के कमरों में जाए बिना राजनीति नहीं कर सकतीं’: पप्पू यादव
#WATCH | Purnea, Bihar: Independent MP Pappu Yadav says, "...In India, women are called goddesses, but they will never be respected here. System and society are responsible for this...90% of women cannot do politics without entering the room of politicians..."
(20.04.2026) pic.twitter.com/WyHY4ZitUJ
— ANI (@ANI) April 21, 2026
क्या था पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में पप्पू यादव यह आरोप लगाते हुए नजर आए कि राजनीति में अधिकांश महिलाओं को शोषण का सामना करना पड़ता है और वे 'समझौता' किए बिना आगे नहीं बढ़ सकतीं. उन्होंने यह भी दावा किया कि समाज में महिलाओं को सांस्कृतिक रूप से तो पूजा जाता है, लेकिन हकीकत में उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जाता जिसकी वे हकदार हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के संघर्ष और उनकी मेहनत का अपमान माना जा रहा है. यह भी पढ़ें: Women's Reservation Bill: 'विपक्ष सीरियल लायर है', महिला आरक्षण बिल पर विरोध को लेकर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस का तीखा हमला
तीन दिन की समय-सीमा
सांसद पप्पू यादव को नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. आयोग ने इस मामले को अत्यंत गंभीर और संवेदनशील माना है. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और उनके सुरक्षित कार्यस्थल को लेकर चर्चाएं तेज हैं.












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