Loan Scam: ऑनलाइन लोन ऐप ने की गंदी हरकत! महिला की मॉर्फ्ड न्यूड फोटो बनाकर वसूली के लिए किया ब्लैकमेल
(Photo : Pixabay)

नई दिल्ली: ऑनलाइन लोन ऐप्स और डिजिटल लोन शार्क द्वारा आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों का शोषण लगातार बढ़ रहा है. मुंबई में एक ब्यूटीशियन के साथ हुई घटना ने इस समस्या को एक बार फिर उजागर किया है. लोन शार्क ने ब्यूटीशियन की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की.

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई की एक ब्यूटीशियन ने सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले 'एवरलोन' नामक ऐप से 10,000 रुपये का लोन लिया. इन ऑनलाइन लोन ऐप्स की प्रक्रिया के अनुसार, लोन लेने वाले व्यक्ति को अपनी पहचान, दस्तावेजों और मोबाइल एक्सेस की अनुमति देनी होती है. महिला ने 'कम ब्याज' और 'सात दिनों में भुगतान' की शर्त पर 1 अप्रैल को लोन लिया. इसे भी पढ़ें- Fraud By Fake Websites: बिगबास्केट, डीमार्ट और ब्लिंकिट के फर्जी ऑफर से सावधान! खरीदारों को धोखा देने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार

7 अप्रैल को, महिला को लोन चुकाने के लिए कॉल आने लगे. लोन एजेंटों ने उसे धमकी दी कि अगर उसने तुरंत पैसे नहीं चुकाए तो उसकी तस्वीरें उसके संपर्कों को भेज दी जाएंगी. डर के मारे महिला ने जल्दबाजी में भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उसे अपने मोबाइल पर अपनी ही नग्न तस्वीरें मिलीं जिनके साथ छेड़छाड़ की गई थी.

महिला ने एलटी मार्ग पुलिस से संपर्क किया और अज्ञात अपराधियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, YouGov द्वारा पिछले साल नवंबर में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 72 प्रतिशत भारतीय हाल के दिनों में किसी न किसी तरह के ऑनलाइन घोटाले/धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं. सर्वेक्षण में पाया गया कि ऑनलाइन शॉपिंग घोटाले सबसे आम हैं (27 प्रतिशत), इसके बाद नकली नौकरी के प्रस्ताव (26 प्रतिशत), बैंक/कार्ड फ़िशिंग (21 प्रतिशत), निवेश घोटाले (18 प्रतिशत), लॉटरी के झूठे वादे (18 प्रतिशत), सोशल मीडिया और लोन ऑफर से जुड़े घोटाले (17 प्रतिशत प्रत्येक), नकली चैरिटी और सरकारी फ़िशिंग (12 प्रतिशत प्रत्येक), और डेटिंग ऐप धोखाधड़ी (11 प्रतिशत) शामिल हैं.

हालांकि बड़ी संख्या में भारतीय इन घोटालों का शिकार हुए हैं, लेकिन केवल 30 प्रतिशत ने ही संबंधित अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट दी और 48 प्रतिशत ने दावा किया कि उन्हें अपना पैसा वापस मिल गया. यह सर्वेक्षण 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 1,022 लोगों पर किया गया था.