कफ सिरप से नहीं हुई बच्चों की मौत, स्वास्थय मंत्रालय ने कहा- खांसी की दवा में नहीं मिला जहरीला केमिकल
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नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान से एकत्र किए गए खांसी की सिरप के सैंपल में जहरीले केमिकल डाइइथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG) नहीं पाए गए हैं. ये दोनों रसायन गंभीर किडनी डैमेज का कारण बनते हैं और पहले भी कई बच्चों की जान ले चुके हैं. बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद आशंका जताई गई कि खांसी की सिरप वजह हो सकती है. मृत बच्चों की उम्र 1 से 7 साल के बीच थी. उनमें गंभीर किडनी इंफेक्शन और पेशाब न होने (Anuria) जैसे लक्षण पाए गए. इसी वजह से केंद्रीय जांच टीम मौके पर पहुंची और सैंपल इकट्ठा किए.

क्या हैं DEG और EG?

डाइइथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG) जहरीले रसायन हैं. इनका इस्तेमाल इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में होता है, लेकिन अगर दवाओं में मिल जाएं तो गुर्दे फेल होने जैसे गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं. 2020 में जम्मू में 12 बच्चों की मौत और 2022 में गाम्बिया में 70 बच्चों की मौत ऐसे ही दूषित सिरप से हुई थी.

जांच में क्या मिला?

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की टीमों ने संयुक्त जांच की. रिपोर्ट में DEG और EG दोनों रसायन अनुपस्थित पाए गए. इसके अलावा, एक बच्चे में Leptospirosis बीमारी पॉजिटिव मिली. पानी और अन्य पर्यावरणीय सैंपल की जांच भी अभी जारी है.

राजस्थान के मामले

स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि राजस्थान में जिन बच्चों की मौत हुई, उनके मामले में संदिग्ध सिरप में भी DEG/EG नहीं मिला. यह दवा डेक्सट्रोमेथॉर्फन आधारित थी, जिसे छोटे बच्चों के लिए आमतौर पर अनुशंसित नहीं किया जाता. इसमें प्रोपाइलीन ग्लाइकोल भी नहीं पाया गया, जो कभी-कभी दूषण का स्रोत हो सकता है.

  • बच्चों के लिए खांसी की सिरप पर नई गाइडलाइन
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा कि
  • दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप न दी जाए.
  • बड़े बच्चों में भी इन दवाओं का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए.

बच्चों में खांसी-जुकाम ज्यादातर खुद ही ठीक हो जाता है, इसलिए आराम, पर्याप्त पानी और घरेलू देखभाल बेहतर उपाय हैं.

जांच रिपोर्ट से यह साफ हुआ कि हाल की मौतें दूषित सिरप से नहीं हुईं, लेकिन असली कारण का पता लगाने के लिए जांच जारी है. सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि खांसी की दवाओं का इस्तेमाल बच्चों में बेहद सावधानी से किया जाए और डॉक्टर भी इन गाइडलाइंस का पालन करें.