नीति आयोग के पॉलिसी -पेपर का उद्देश्य भारत के निवेश माहौल को मजबूत बनाते हुए विदेशी निवेशकों की चिंताओं को दूर करना
नीति आयोग ने एक पॉलिसी वर्किंग पेपर जारी किया है, जिसका उद्देश्य भारत के निवेश माहौल को मजबूत बनाने के लिए कर पूर्वानुमान और विवाद समाधान पर विदेशी निवेशकों की चिंताओं को दूर करना है देश 2047 तक विकसित भारत बनने के विजन की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में ट्रांसपैरेंट, पूर्वानुमानित और एफिशिएंट टैक्स फ्रेमवर्क बनाना लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए बेहद आवश्यक है.
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर : नीति आयोग ने एक पॉलिसी वर्किंग पेपर जारी किया है, जिसका उद्देश्य भारत के निवेश माहौल को मजबूत बनाने के लिए कर पूर्वानुमान और विवाद समाधान पर विदेशी निवेशकों की चिंताओं को दूर करना है देश 2047 तक विकसित भारत बनने के विजन की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में ट्रांसपैरेंट, पूर्वानुमानित और एफिशिएंट टैक्स फ्रेमवर्क बनाना लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए बेहद आवश्यक है.
नीति आयोग के 'टैक्स पॉलिसी पर कंसल्टेटिव ग्रुप' (सीजीटीपी) का ध्यान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, एफडीआई को प्रमोट करने, टैक्स के नियमों को आसान बनाने और एक फ्यूचर-रेडी सिस्टम को बनाने पर है. सहयोगी शासन की भावना को दर्शाते हुए वर्किंग पेपर हितधारक परामर्श के माध्यम से विकसित किया गया था, अंतिम रूप देने से पहले टिप्पणियों और सुझावों के लिए जिसका ड्राफ्ट भी साझा किया गया था. नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने पिछले दो दशकों में एफडीआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में भारत की सस्टेनेबल ग्रोथ पर प्रकाश डाला, जो मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल को दर्शाता है. यह भी पढ़ें : Cyclone Shakhti: चक्रवात ‘शक्ति’ का असर, गुजरात तट पर अरब सागर में हलचल तेज, मछुआरों के लिए चेतावनी जारी
उन्होंने कहा कि स्थायी प्रतिष्ठानों के प्रति दृष्टिकोण में सुधार से कर नियमों में अधिक स्पष्टता और पूर्वानुमानशीलता आएगी, जिससे नए विदेशी निवेश आकर्षित होंगे और मौजूदा बहुराष्ट्रीय निगमों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा. इस लॉन्च में सीबीडीटी, डीपीआईआईटी, आईसीएआई और सीबीसी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन, डेलॉइट, ईवाई और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिन्होंने कर नीति सुधारों को आगे बढ़ाने और अधिक पूर्वानुमानित निवेश वातावरण को बढ़ावा देने में सार्वजनिक-निजी सहयोग की भावना को रेखांकित किया. वर्किंग पेपर में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि एफडीआई और एफपीआई को भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में मान्यता प्राप्त है. विदेशी निवेशकों में विश्वास पैदा करने के लिए एक स्थिर कर व्यवस्था महत्वपूर्ण है. हालांकि, विदेशी निवेशकों को अक्सर महत्वपूर्ण कर अनिश्चितता और अनुपालन बोझ का सामना करना पड़ता है.
नीति आयोग के अनुसार, इन कर संबंधी बाधाओं के बावजूद, भारत ने पिछले दो दशकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है, जो एक निवेश गंतव्य के रूप में इसके आकर्षण को दर्शाता है. यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत की मजबूत फंडामेंटल इकोनॉमिक शक्तियां, जिसमें देश का विशाल बाजार, जनसांख्यिकीय लाभांश और वर्तमान आर्थिक सुधार शामिल है, निवेश आकर्षित करने के महत्वपूर्ण कारक हैं. वर्किंग पेपर विदेशी निवेशकों के लिए कर निश्चितता और पूर्वानुमानशीलता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क का प्रस्ताव करता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 04, 2025 11:12 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

