मुंबई, 20 मई: मुंबई उपनगरीय जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसले में रक्षाबंधन से पहले ऑर्डर की गई 100 रुपये की राखी की डिलीवरी न करने के लिए अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को बोरीवली की एक महिला को 40,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया. 2 अगस्त, 2019 को शिकायतकर्ता शीतल कनकिया ने अपने भतीजे के लिए "मोटू पतलू किड्स राखी" का ऑर्डर दिया. अमेज़न ने 8 अगस्त से 13 अगस्त के बीच डिलीवरी का वादा किया था, लेकिन राखी कभी नहीं आई. बाद में कनकिया को पता चला कि ट्रैकिंग नंबर एक धोखा था और कथित कूरियर सेवा पूनम कूरियर बंद हो गई थी, फ्री प्रेस जर्नल ने रिपोर्ट किया. यह भी पढ़ें: Vulcan Robot: अमेज़न ने स्पर्श की भावना से लैस बनाया अपना पहला वल्कन रोबोट, 7 मई को हुआ अनावरण
कई बार की जांच और कानूनी नोटिस के बाद 14 अगस्त को अमेज़न ने 100 रुपये वापस कर दिए, लेकिन डिलीवरी न होने का कोई औचित्य या जिम्मेदारी नहीं बताई. उपभोक्ता अदालत के अनुसार, यह "सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट मामला है."
इसके अलावा अदालत ने अमेज़न के इस तर्क को खारिज कर दिया कि वह केवल एक सुविधाकर्ता था, इस बात पर जोर देते हुए कि प्लेटफ़ॉर्म उत्तरदायी था क्योंकि उसने पैसे रखे थे और उसे सीधे वापस कर दिया था. आयोग ने कनकिया को उसके भावनात्मक संकट और लापरवाही को ध्यान में रखते हुए 40,000 रुपये का मुआवज़ा दिया.













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