Ola, Uber, Rapido Strike: अगर आप 7 फरवरी (शनिवार) को यात्रा के लिए कैब या बाइक टैक्सी बुक करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्रमुख ऐप-आधारित प्लेटफार्मों से जुड़े चालकों ने 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' (All-India Breakdown) हड़ताल की घोषणा की है. तेलंगाना ऐप-आधारित ड्राइवर्स फोरम (TADF) और कई अन्य यूनियनों के नेतृत्व में होने वाला यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से गिरते वेतन, कमीशन की मनमानी और सुरक्षा मानकों के अभाव के खिलाफ है.
क्यों हो रही है यह हड़ताल?
यूनियन नेताओं का आरोप है कि 'मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025' के लागू होने के बावजूद, कंपनियां मनमाने तरीके से किराए तय कर रही हैं. चालकों का कहना है कि कंपनियां यात्रियों से तो 'सरज प्राइसिंग' के नाम पर अधिक पैसे वसूलती हैं, लेकिन चालकों को मिलने वाला हिस्सा लगातार कम किया जा रहा है. यह भी पढ़े: Ola-Uber Strike: ओला, उबर की हड़ताल से मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में लगातार चौथे दिन यात्रा संबंधी परेशानियां, जानें कैब ड्राइवरों की मुख्य मांगें क्या हैं?
TADF के अनुसार, ईंधन की बढ़ती कीमतों, वाहन के रखरखाव और बीमा के खर्च के बाद चालकों के पास घर चलाने के लिए पर्याप्त आय नहीं बच रही है. इस अनिश्चितता ने लाखों कामगारों को कर्ज के जाल में धकेल दिया है.
चालकों की प्रमुख मांगें
हड़ताल पर जाने वाले संगठनों ने सरकार और कंपनियों के सामने कुछ प्रमुख शर्तें रखी हैं:
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न्यूनतम बेस किराया: सभी ऐप-आधारित सेवाओं (कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी) के लिए एक न्यूनतम बेस किराया तुरंत निर्धारित किया जाए.
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निजी वाहनों पर रोक: निजी (व्हाइट बोर्ड) वाहनों का व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग पूरी तरह बंद हो, क्योंकि यह कानूनी रूप से पंजीकृत कमर्शियल चालकों के साथ अनुचित प्रतिस्पर्धा है.
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कमीशन पर लगाम: कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले भारी कमीशन को नियंत्रित किया जाए ताकि चालकों की कमाई बढ़ सके.
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आईडी ब्लॉक पर पारदर्शिता: बिना किसी ठोस कारण या पारदर्शी प्रक्रिया के चालकों की आईडी ब्लॉक करने की प्रथा खत्म हो.
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सामाजिक सुरक्षा: चालकों के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना कवर और आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जाएं.
यात्रियों पर क्या होगा असर?
यह विरोध प्रदर्शन सुबह से शुरू होकर कम से कम 6 घंटों तक चलने की उम्मीद है, हालांकि कुछ यूनियनों ने पूरे दिन की हड़ताल का आह्वान किया है. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान कैब की उपलब्धता कम होने से 'वेटिंग टाइम' बढ़ सकता है और किराया भी सामान्य से काफी अधिक हो सकता है.
गीग वर्कर्स के अधिकार
यह विरोध प्रदर्शन हाल के महीनों में हुए कई प्रदर्शनों की अगली कड़ी है. इससे पहले क्रिसमस और नए साल के मौके पर भी डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी. 'गीग इकोनॉमी' (Gig Economy) में काम करने वाले करीब 2.5 करोड़ लोगों के अधिकारों को लेकर भारत में नई नीतियों पर बहस तेज हो गई है.
सरकार ने हालांकि 2025 की गाइडलाइंस में सुरक्षा और पारदर्शिता के कुछ प्रावधान किए हैं, लेकिन यूनियनों का दावा है कि धरातल पर इनका क्रियान्वयन अब भी अधूरा है.













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