Maharashtra News: महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए 1 मई से मराठी अनिवार्य, विवाद के बीच परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक 28 अप्रैल को यूनियन नेताओं के साथ करेंगे बड़ी बैठक
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (Photo Credits: ANI)

Maharashtra News:  महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गुरुवार को राज्य में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर सरकार के रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया. मंत्री ने घोषणा की कि मराठी भाषा को बढ़ावा देने और इसे लागू करने के संबंध में 28 अप्रैल को ट्रेड यूनियन नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी. इसके साथ ही, उन्होंने 1 मई से ड्राइवरों के दस्तावेजों और भाषाई कौशल की जांच के लिए एक बड़े अभियान की शुरुआत करने का भी एलान किया.

भाषा सिखाने के लिए साहित्यिक संस्थाओं का सहयोग

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री ने बताया कि सरकार इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं की मदद ले रही है. मुंबई मराठी साहित्य संघ ने राज्य भर में अपनी विभिन्न शाखाओं के माध्यम से ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सिखाने की जिम्मेदारी ली है. इसी तरह, कोंकण क्षेत्र में 'कोंकण मराठी साहित्य परिषद' संयुक्त रूप से प्रशिक्षण प्रदान करेगी. इसका उद्देश्य ड्राइवरों के बीच मराठी भाषा का प्रचार-प्रसार करना है.

28 अप्रैल को यूनियन नेताओं के साथ संवाद

प्रताप सरनाईक ने कहा कि इस नीति पर सुझाव लेने के लिए 28 अप्रैल को प्रमुख ट्रेड यूनियन नेता शशांक राव और अन्य यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक होगी. मंत्री ने स्पष्ट किया, "हम कई यूनियन नेताओं से मिलकर उनके विचार जानेंगे. हम उनकी बात सुनेंगे और अपनी बात रखेंगे. यदि कोई सकारात्मक सुझाव मिलता है, तो उसे निश्चित रूप से लागू किया जाएगा."

1 मई से शुरू होगा सघन जांच अभियान

मंत्री ने चेतावनी दी कि 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा. इस अभियान के तहत ड्राइवरों के दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उनके मराठी बोलने के कौशल की जांच की जाएगी. सरनाईक ने साफ किया कि ड्राइवरों को मराठी में लिखना जरूरी नहीं है, लेकिन उन्हें मराठी बोलना और समझना अनिवार्य रूप से आना चाहिए.

सख्त कार्रवाई की चेतावनी

परिवहन मंत्री ने दोहराया कि जो ड्राइवर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस नई पहल के हिस्से के रूप में ड्राइवरों को यह साबित करना होगा कि वे मराठी पढ़, लिख और बोल सकते हैं (प्राथमिक स्तर पर). यह एक पायलट प्रोजेक्ट है जिसका उद्देश्य परिवहन लाइसेंस जारी करने में होने वाली अनियमितताओं को रोकना है. सरकार की योजना इसे आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू करने की है.

सरकार का मकसद क्या है

इस महीने की शुरुआत में भी मंत्री सरनाईक ने घोषणा की थी कि राज्य में रिक्शा चलाने के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य होगा. सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान होने से यात्रियों और ड्राइवरों के बीच संवाद बेहतर होगा और परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी. यह निर्णय राज्य के सभी रिक्शा और टैक्सी चालकों पर समान रूप से लागू होगा.