मुंबई. महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने राज्य में अवैध रूप से संचालित हो रही बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. परिवहन मंत्री ने पुलिस के साइबर अपराध (Cyber Crime) विभाग को ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें इन कंपनियों की सभी सेवाओं के पूरी तरह बंद होने का दावा किया जा रहा था.
सोशल मीडिया के दावों पर सरकार की स्पष्टीकरण
महाराष्ट्र सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने कहा कि इंटरनेट पर ओला, उबर और रैपिडो की सभी सेवाएं बंद होने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं. सरकार की यह दंडात्मक कार्रवाई केवल बिना अनुमति चल रही अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं (Two-wheeler Taxis) तक ही सीमित है. इन कंपनियों की नियमित कैब (कार) और ऑटो सेवाएं राज्य में पहले की तरह सामान्य रूप से काम करती रहेंगी. यह भी पढ़े: Gig Workers Strike Today: पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ यूनियन का आज 5 घंटे देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, जानें उनकी प्रमुख मांगें
साइबर सेल को पत्र और सख्त कार्रवाई की मांग
परिवहन विभाग के अनुसार, मंत्री प्रताप सरनाईक और परिवहन आयुक्त ने साइबर क्राइम विभाग को इस संबंध में आधिकारिक पत्र भेजे हैं. इस पत्र में मांग की गई है कि नियमों का उल्लंघन कर चलाई जा रही इन अवैध ऐप-आधारित बाइक सेवाओं को तुरंत ब्लॉक किया जाए और संबंधित कंपनियों के मालिकों व ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए. अधिकारियों का कहना है कि ये कंपनियां आवश्यक लाइसेंस और परिवहन नियमों (Motor Vehicles Act) के अनुपालन के बिना ही दोपहिया व्यावसायिक सेवाएं दे रही थीं.
सुरक्षा चिंताएं
महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. पिछले दिनों मुंबई के बांद्रा लिंक रोड इलाके में एक अवैध बाइक टैक्सी दुर्घटना में एक महिला यात्री की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा और नियमों को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. राज्य सरकार का तर्क है कि इन ऐप-आधारित बाइक सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवर वेरिफिकेशन, बीमा कवर और महिला सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी की जा रही थी.
इसके अतिरिक्त, राज्य के स्थानीय ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने भी इन अनधिकृत बाइक टैक्सियों का कड़ा विरोध किया है. यूनियनों का दावा है कि बिना परमिट और व्यावसायिक पंजीकरण के चलने वाली इन बाइकों के कारण उनके वैध रोजगार पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा था. हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक ओला, उबर या रैपिडो की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.













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