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अमेरिका ने पोलैंड में 4,000 सैनिकों की तैनाती रोकी

अमेरिका ने यूरोप में सैन्य पुनर्गठन के तहत पोलैंड में 4,000 सैनिकों की तैनाती रद्द कर दी है.

अमेरिका ने पोलैंड में 4,000 सैनिकों की तैनाती रोकी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिका ने यूरोप में सैन्य पुनर्गठन के तहत पोलैंड में 4,000 सैनिकों की तैनाती रद्द कर दी है. इस फैसले पर सहयोगियों और अमेरिकी नेताओं ने चिंता जताई, जबकि जर्मनी से सैनिक हटाने की प्रक्रिया भी जारी है.अमेरिका ने पोलैंड में 4,000 सैनिकों की प्रस्तावित तैनाती को रद्द कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ट्रंप सरकार यूरोप में अपनी सैन्य संरचना को पुनर्गठित कर रही है और जर्मनी से हजारों सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा कर चुकी है.

अमेरिकी सेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने एक संसदीय सुनवाई के दौरान बताया कि यूरोपीय कमान के प्रमुख को सैनिक संख्या में कमी के निर्देश मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया कि सेकंड आर्मर्ड ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की तैनाती नहीं होगी. उनके अनुसार यह कदम सैन्य दृष्टि से सही समझा गया.

जनरल लानेव ने यह भी बताया कि इस यूनिट के कुछ हिस्से पहले ही विदेश भेजे जा चुके थे और उसके साज ओ सामान भी रास्ते में थे. उन्होंने कहा कि तैनाती रद्द करने का आदेश रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के दफ्तर से आया था. सरकार ने भी पुष्टि की कि यह फैसला कुछ दिन पहले ही लिया गया.

पोलैंड को नहीं दी गई थी जानकारी

इस फैसले को लेकर अमेरिकी संसद में भी कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली. रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने कहा कि पोलैंड को इस निर्णय की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी. उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि "उन्होंने मुझे कल फोन किया. उन्हें इसके बारे में पता नहीं था और वे अचानक चकित रह गए.”

बेकन ने इस फैसले को "निंदनीय” और "देश के लिए शर्मनाक” बताया. वहीं डेमोक्रेट सांसद मार्लिन स्ट्रिकलैंड ने भी आलोचना करते हुए कहा कि जब इतने बड़े पैमाने पर सैनिकों को हटाया जाता है, तो यह संदेश जाता है कि अमेरिका एक विश्वसनीय सहयोगी नहीं है.

मई की शुरुआत में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी कि अमेरिका जर्मनी से 5,000 सैनिकों को हटाएगा. पेंटागन प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा था कि यह प्रक्रिया अगले छह से बारह महीनों में पूरी हो जाएगी.

यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के बीच ईरान को लेकर चल रहे तनावपूर्ण विवाद के दौरान सामने आया था. बाद में ट्रंप ने संकेत दिया कि सैनिकों की संख्या में कटौती 5,000 से भी अधिक हो सकती है, हालांकि उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.

ईरान युद्ध को लेकर विवाद का असर

पोलैंड के रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक कामिश ने शुक्रवार को कहा कि पोलैंड में तैनाती रद्द करने का निर्णय जर्मनीसे सैनिकों की वापसी से जुड़ा हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि जर्मनी से हटाए जा रहे सैनिकों में से किसी अन्य ब्रिगेड को पोलैंड भेजा जाता है, तो सुरक्षा गारंटी में कोई बदलाव नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "यदि मूल रूप से तय ब्रिगेड के बजाय कोई अन्य यूनिट पोलैंड भेजी जाती है और जर्मनी से 5,000 सैनिक पोलैंड में स्थानांतरित होते हैं, तो सुरक्षा ढांचे में कोई कमी नहीं आएगी.”

डॉनल्ड ट्रंप अपने दोनों कार्यकाल के दौरान यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की बात करते रहे हैं. उनका कहना है कि यूरोपीय सहयोगियों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद अधिक उठानी चाहिए, बजाय इसके कि वे अमेरिका पर निर्भर रहें.

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अब उन सहयोगियों के प्रति सख्त रुख अपना रहे हैं जिन्होंने मध्य पूर्व युद्ध का समर्थन नहीं किया या होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति स्थापना बल में योगदान नहीं दिया. इस समुद्री मार्ग को ईरान की सेनाओं ने प्रभावी रूप से बाधित कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है.

नाटो के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि अमेरिका यूरोप में अपनी सैन्य उपस्थिति को "समायोजित” करने की दिशा में काम कर रहा है. अधिकारी ने कहा कि रोटेशनल फोर्सेस यानी घूम-घूम कर तैनात होने वाली सैन्य इकाइयों पर ध्यान देने से नाटो की सामूहिक सुरक्षा योजनाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि नाटो के पूर्वी हिस्से में कनाडा और जर्मनी की मौजूदगी बढ़ रही है, जिससे गठबंधन और मजबूत हो रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 16, 2026 04:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).