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Muharram 2025 Holiday Date in India: आशूरा 6 या 7 जुलाई को? जानें स्कूल, बैंक और शेयर बाजार रहेंगे खुले या बंद

भारत में इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना 'मुहर्रम' 27 जून 2025 (शुक्रवार) से शुरू हो चुका है. ऐसे में अशूरा, जो कि मुहर्रम की 10वीं तारीख को मनाया जाता है, इस साल रविवार, 6 जुलाई 2025 को पड़ेगा.

Muharram 2025 Holiday Date in India: आशूरा 6 या 7 जुलाई को? जानें स्कूल, बैंक और शेयर बाजार रहेंगे खुले या बंद
Muslim Offering Namaz | PTI

Muharram 2025 Holiday Date in India: भारत में इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना 'मुहर्रम' 27 जून 2025 (शुक्रवार) से शुरू हो चुका है. ऐसे में अशूरा, जो कि मुहर्रम की 10वीं तारीख को मनाया जाता है, इस साल रविवार, 6 जुलाई 2025 को पड़ेगा. गूगल पर लोग तेजी से सर्च कर रहे हैं कि अशूरा की छुट्टी कब है – 6 या 7 जुलाई? इसका सीधा जवाब है: 6 जुलाई, रविवार को अशूरा है और यही दिन छुट्टी का दिन माना जाएगा. क्योंकि 6 जुलाई को रविवार है, इसलिए यह पहले से ही एक साप्ताहिक अवकाश होता है. इस वजह से देशभर में बैंक, स्कूल और अधिकतर सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे. अलग से कोई अतिरिक्त छुट्टी सोमवार यानी 7 जुलाई को नहीं दी जाएगी.

क्या शेयर बाजार खुलेगा?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) जैसे प्रमुख शेयर बाजार भी रविवार को बंद रहते हैं. इसलिए 6 जुलाई को शेयर बाजार बंद रहेगा, लेकिन वह मुहर्रम की छुट्टी की वजह से नहीं, बल्कि साप्ताहिक अवकाश की वजह से है.

अशूरा क्या है? क्यों मनाया जाता है?

अशूरा मुसलमानों के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण दिन है. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन हजरत मूसा (Prophet Moses) और उनके अनुयायियों को अल्लाह ने फिरऔन से बचाया था, जब समुंदर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था. इस्लामिक इतिहास में यह दिन और भी महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि हज़रत इमाम हुसैन, जो पैगंबर मुहम्मद के नवासे थे, 680 ई. में करबला की जंग में 10 मुहर्रम को शहीद हुए थे.

शिया और सुन्नी मुस्लिम इस दिन को कैसे मनाते हैं?

शिया मुस्लिम समुदाय अशूरा को गम और मातम के दिन के रूप में मनाता है. वे 7वीं मुहर्रम से मातम शुरू करते हैं क्योंकि उस दिन से इमाम हुसैन और उनके परिवार को पानी से वंचित कर दिया गया था. 10वीं मुहर्रम को वे ताजिए निकालते हैं, अपने शरीर को ज़ंजीरों और तलवारों से जख्मी करते हैं, ताकि इमाम हुसैन की तकलीफों को महसूस कर सकें.

सुन्नी मुस्लिम आमतौर पर रोजा रखते हैं, विशेष नमाज पढ़ते हैं और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं. कुछ सुन्नी समुदायों में भी ताजिया निकालने की परंपरा है, परंतु वे खुद को कष्ट नहीं पहुंचाते.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 02, 2025 05:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).