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UNSC सुधार पर भारत का बड़ा कदम: दो-स्तरीय सदस्यता का विरोध, 'वीटो' पर 15 साल के इंतज़ार के लिए तैयार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के लिए भारत ने G4 समूह के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें नए स्थायी सदस्यों के लिए वीटो पावर को 15 साल के लिए स्थगित करने की बात कही गई है.

UNSC सुधार पर भारत का बड़ा कदम: दो-स्तरीय सदस्यता का विरोध, 'वीटो' पर 15 साल के इंतज़ार के लिए तैयार
तिरंगा (Photo Credits: Pexels)

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) यूएनएससी (UNSC) के विस्तार और सुधारों को लेकर चल रहे गतिरोध को तोड़ने के लिए भारत ने एक महत्वपूर्ण समझौतावादी रुख अपनाया है. भारत ने स्पष्ट किया है कि वह सुरक्षा परिषद में किसी भी तरह की 'दो-स्तरीय' (Two-Tier) स्थायी सदस्यता का विरोध करता है, जहाँ नए सदस्यों को पुराने सदस्यों की तुलना में कम अधिकार मिलें हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए भारत ने G4 समूह के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई है, जिसमें नए स्थायी सदस्यों के 'वीटो पावर' (Veto Power) के इस्तेमाल को 15 साल के लिए टालने का सुझाव दिया गया है. यह भी पढ़ें: India-US Relations: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और पश्चिम एशिया के हालातों पर हुई चर्चा

वीटो पावर पर 15 साल का 'डेफरल'

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की बैठक में भारत का पक्ष रखा. उन्होंने ब्राजील द्वारा G4 (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया. इस प्रस्ताव के तहत:

  • नए स्थायी सदस्यों को परिषद में शामिल किया जाएगा, लेकिन वे 15 साल तक वीटो का उपयोग नहीं करेंगे.
  • 15 साल की समीक्षा अवधि के बाद ही वीटो के अधिकार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
  • इस लचीलेपन का उद्देश्य उन देशों की चिंताओं को दूर करना है जो मानते हैं कि अधिक वीटो पावर से परिषद की कार्यक्षमता प्रभावित होगी.

दो-स्तरीय सदस्यता का विरोध क्यों?

पी. हरीश ने जोर देकर कहा कि वीटो के साथ स्थायी श्रेणी का विस्तार ही सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना वीटो या सीमित अधिकारों वाली नई श्रेणी चर्चा को और जटिल बना देगी. भारत का तर्क है कि 1965 में हुए पिछले सुधारों ने पहले से मौजूद पांच स्थायी सदस्यों (P5) को अधिक शक्तिशाली बना दिया था. यदि अब बिना वीटो के नए सदस्य जोड़े जाते हैं, तो यह असंतुलन और बढ़ेगा.

विरोधियों के तर्क और G4 का जवाब

इटली और पाकिस्तान जैसे देश लगातार स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं. उनका दावा है कि अधिक देशों के पास वीटो होने से परिषद "अपंग" हो जाएगी. इसके जवाब में G4 की ओर से ब्राजील के प्रतिनिधि नॉर्बर्टो मोरेती ने कहा कि वीटो के मुद्दे को परिषद की पुरानी और अप्रचलित संरचना को बनाए रखने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नए स्थायी सदस्यों के आने से परिषद अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधि बनेगी, भले ही वीटो अधिकारों को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए.

अफ्रीका समूह की मांग और ऐतिहासिक अन्याय

अफ्रीकी देशों का समूह भी सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए अग्रणी भूमिका निभा रहा है. उनका तर्क है कि जब संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ था, तब अधिकांश अफ्रीकी देश उपनिवेशवाद की चपेट में थे, जिसके कारण उनके साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ. अफ्रीका समूह की मांग है कि नए सदस्यों को तुरंत वीटो पावर दी जानी चाहिए ताकि वैश्विक निर्णयों में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

सुधारों का भविष्य

भारत ने स्पष्ट किया है कि सुधारों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और तेज करने के लिए मौजूदा ढांचे के भीतर रहकर ही काम करना जरूरी है. भारत का यह नया रुख वैश्विक मंच पर एक 'जिम्मेदार और लचीले' शक्ति के रूप में उसकी छवि को मजबूत करता है, जो लंबे समय से अटके हुए सुधारों को हकीकत में बदलने के लिए कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता दे रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 15, 2026 10:25 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).