West Bengal Shocker: 'मां मैंने चोरी नहीं की... चिप्स चुराने का लगा आरोप तो 13 साल के बच्चे ने उठाया भयावह कदम, सुसाइड नोट लिखकर की आत्महत्या, पंसकुरा की घटना से सदमे में परिवार

पश्चिम बंगाल, मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के पंसकुरा से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया है.महज़ 13 साल का एक बच्चा, कृष्णेंदु दास, जिसने 7वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था, ने केवल इसलिए अपनी जान दे दी क्योंकि उस पर चोरी का आरोप लगा और उसे सबके सामने डांटा गया. जिसके कारण आहत बच्चे ने कीटनाशक पी लिया. जिसके बाद उसे गंभीर हालत में हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया.

जहां उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. ये भी पढ़े:Navi Mumbai Shocker: नवी मुंबई में 9वीं के स्टूडेंट ने स्कूल की बिल्डिंग से कूदकर की आत्महत्या, पांचवे फ्लोर से लगाई नीचे छलांग

चिप्स चोरी के आरोप में हुई बेइज्जती

यह मामला तब शुरू हुआ जब स्थानीय बाजार गोसाईंबेर में स्थित एक मिठाई की दुकान के मालिक ने बच्चे पर दुकान से चिप्स के तीन पैकेट चुराने का आरोप लगाया. जब शुभांकर ने बच्चे को चिप्स के पैकेट के साथ देखा, तो उसने पहले उससे पूछताछ की. कृष्णेंदु ने तीनों पैकेट के बदले में 20 रुपये भी दे दिए, फिर भी दुकानदार ने उसे माफ नहीं किया. उल्टे उसे दुकान पर बुलाकर मारा-पीटा गया और सार्वजनिक माफी भी मंगवाई गई.

मां ने भी सबके सामने डांटा, बच्चा टूटकर बिखर गया

इतना कुछ झेलने के बाद, जब मां को घटना की जानकारी मिली, तो वह भी बेटे को उसी दुकान पर ले गई और सबके सामने डांट लगाई.यह बात किशोर मन को गहराई से आहत कर गई.वह खुद को अत्यंत अपमानित महसूस करने लगा. घर लौटकर कृष्णेंदु ने आत्महत्या का प्रयास किया. उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

सुसाइड नोट में लिखा.. 'मां, मैंने चोरी नहीं की'

बच्चे के कमरे से मिला सुसाइड नोट समाज के ज़मीर को झकझोर देने वाला था. उसमें लिखा था.'.मां, मैंने चोरी नहीं की.

दुकानदार फरार

परिवार का कहना है कि दुकानदार की हिंसक हरकत और सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाने की ज़लालत ने कृष्णेंदु को अंदर तक तोड़ दिया. इसके साथ ही मां की डांट ने उसकी मानसिक स्थिति और बिगाड़ दी. वर्तमान में आरोपी दुकानदार फरार है.

माता-पिता के लिए एक बड़ा सबक

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों को अनुशासित करने की सीमा क्या होनी चाहिए? माता-पिता का यह समझना जरूरी है कि किशोरवय बच्चे भावनात्मक रूप से बहुत नाजुक होते हैं. सार्वजनिक डांट उन्हें अपमान का बोध कराती है, जो कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है.विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को डांटना अगर जरूरी भी हो, तो प्राइवेट में करें. बच्चों के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे, इसका ध्यान रखें. सजा नहीं, संवाद जरूरी है.

आत्महत्या रोकथाम के लिए और मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर पर मदद के लिए कॉल करें:

Tele Manas (Ministry of Health) – 14416 or 1800 891 4416; NIMHANS – + 91 80 26995000 /5100 /5200 /5300 /5400; Peak Mind – 080-456 87786; Vandrevala Foundation – 9999 666 555; Arpita Suicide Prevention Helpline – 080-23655557; iCALL – 022-25521111 and 9152987821; COOJ Mental Health Foundation (COOJ) – 0832-2252525.