नई दिल्ली, 30 मार्च: केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में नक्सलवाद के उन्मूलन (Eradication of Naxalism) पर चल रही चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस पार्टी (Congress Party) पर जमकर निशाना साधा. शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक देश में नक्सलवाद को पालने-पोसने का काम किया है. उन्होंने विशेष रूप से राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर एक विवादास्पद नारे को रीपोस्ट करने की आलोचना की, जो कुख्यात नक्सली हिड़मा (Naxalite Hidma) के मारे जाने के बाद उसके समर्थकों द्वारा लगाया गया था. यह भी पढ़ें: Amit Shah Roadshow In Guwahati: असम चुनाव से पहले शाह का दमदार रोड शो, गुवाहाटी में BJP ने झोंकी पूरी ताकत
विवादास्पद नारे और वैचारिक समर्थन पर प्रहार
अमित शाह ने सदन में कहा कि राहुल गांधी ने 'तुम कितने हिड़मा मारोगे, घर-घर से हिड़मा निकलेगा' जैसे भड़काऊ नारे को साझा किया. बता दें कि हिड़मा एक खूंखार नक्सली नेता था, जिस पर 172 सुरक्षाकर्मियों की हत्या का आरोप था. शाह ने कहा कि कांग्रेस का हाथ हमेशा से नक्सल समर्थकों के साथ रहा है, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित होता है.
उन्होंने राहुल गांधी के पुराने दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि 2010 में ओडिशा में उन्होंने लाडो सिकाका के साथ मंच साझा किया था, जिसने भड़काऊ भाषण दिया था. वहीं, 2018 में हैदराबाद में उनकी मुलाकात गुम्माडी विट्टल राव से हुई थी, जिन्हें नक्सल विचारधारा के करीब माना जाता है. यह भी पढ़ें: West Bengal: अमित शाह का बड़ा आश्वासन, कहा- 'एक भी हिंदू शरणार्थी को नहीं किया जाएगा देश से बाहर'
UPA सरकार के फैसलों पर उठाए सवाल
गृह मंत्री ने मनमोहन सिंह सरकार के दौरान गठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) को 'असंवेधानिक' बताते हुए दावा किया कि इसमें नक्सल लिंक वाले लोग शामिल थे. उन्होंने बिनायक सेन का उदाहरण दिया, जिन्हें नक्सल संबंधी मामले में दोषी होने के बावजूद योजना आयोग की स्वास्थ्य समिति में नियुक्त किया गया था. शाह ने जयराम रमेश द्वारा नक्सली महेश राउत की रिहाई के लिए लिखे गए पत्र का भी उल्लेख किया.
दंतेवाड़ा नरसंहार और जेएनयू की घटना का जिक्र
अमित शाह ने 2010 के उस दौर को याद किया जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने घात लगाकर 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या कर दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कुछ हिस्सों में इस नरसंहार का जश्न मनाया गया था और तिरंगे का अपमान किया गया था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने इसकी कड़ी निंदा नहीं की थी. उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने नक्सलियों के सशस्त्र संघर्ष की विचारधारा के प्रति 'नरम' रुख दिखाया था.
मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तहत अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है. आधुनिक तकनीक, जनजातीय क्षेत्रों में विकास और निरंतर ऑपरेशनों के माध्यम से सरकार अब नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की कगार पर है. उन्होंने उन जवानों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने इस लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान दिया.
अंत में, गृह मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संकीर्ण हितों से ऊपर उठकर देश को वामपंथी उग्रवाद के इस दशकों पुराने दंश से मुक्त कराने के राष्ट्रीय मिशन में सहयोग दें.













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