Gig Workers Protest: सड़कों पर उतरेंगे गिग और प्लेटफ़ॉर्म सेवा के कर्मचारी, 26 जनवरी को देशव्यापी ऐप स्विच‑ऑफ प्रदर्शन का ऐलान
मुंबई स्थित गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने शोषण के खिलाफ 26 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल और ऐप बंद करने का आह्वान किया है.
Gig Workers Protest: देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने अपने अधिकारों के लिए बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. 'गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन' (GIPSWU) ने आगामी 26 जनवरी 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. यूनियन ने सभी गिग वर्कर्स से अपील की है कि वे गणतंत्र दिवस के दिन अपने काम करने वाले ऐप्स को बंद रखें और ऑनलाइन माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराएं. इसके साथ ही, 3 फरवरी को भी देशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे.
शोषण और असुरक्षा के खिलाफ एकजुटता
GIPSWU की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि राइड-हेलिंग, फूड डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी गंभीर शोषण का सामना कर रहे हैं. यूनियन की मुख्य मांग है कि गिग वर्कर्स को 'मजदूर' के रूप में पहचान दी जाए और उनके लिए एक 'केंद्रीय गिग कानून' बनाया जाए. आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के आईडी ब्लॉक करना, पारिश्रमिक में कटौती और मनमानी रेटिंग प्रणाली ने वर्कर्स की आजीविका को संकट में डाल दिया है. यह भी पढ़े: Theft at Manoj Tiwari’s Residence: मनोज तिवारी के मुंबई वाले घर में लाखों की चोरी, पूर्व कर्मचारी ने डुप्लीकेट चाबी से उड़ाए पैसे, CCTV ने खोला राज
महिला वर्कर्स की सुरक्षा पर गहराता संकट
यूनियन ने विशेष रूप से महिला वर्कर्स की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाया है. सीमा सिंह के अनुसार, महिला वर्कर्स को अक्सर ग्राहकों के दुर्व्यवहार और शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का हवाला देते हुए यूनियन ने कहा कि जब महिलाएं शिकायत करती हैं, तो कंपनियों का एआई-मैनेज्ड (AI-managed) रिस्पॉन्स सिस्टम समय पर सहायता नहीं देता. उल्टा, शिकायतों के बाद अक्सर उनकी आईडी ब्लॉक कर दी जाती है, जिससे उनका रोजगार छिन जाता है.
सरकारी आश्वासन और जमीनी हकीकत
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में '10-मिनट इंस्टेंट डिलीवरी' सिस्टम को बंद करने की बात कही थी. हालांकि, यूनियन का दावा है कि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना या लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है. GIPSWU का कहना है कि उन्होंने श्रम मंत्रालय को कई बार पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक उनकी बुनियादी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला है.
'गिग वर्कर्स मेनिफेस्टो': प्रमुख मांगें
श्रमिक संघ ने एक 'घोषणापत्र' जारी किया है, जिसमें 'एल्गोरिदम मैनेजमेंट' को खत्म करने की मांग की गई है. मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
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आईडी ब्लॉकिंग पर रोक: बिना उचित प्रक्रिया और स्पष्टीकरण के वर्कर्स की आईडी बंद करने पर तुरंत प्रतिबंध लगे.
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मानवीय निरीक्षण: ऑटो-असाइन और रेटिंग आधारित दंड प्रणाली को समाप्त किया जाए. ग्राहकों की शिकायतों पर वर्कर्स को अपना पक्ष रखने का मौका मिले.
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न्यूनतम वेतन में वृद्धि: कमीशन दरों को बढ़ाया जाए और छिपे हुए शुल्कों (जैसे एडवांस कटौती) को खत्म किया जाए.
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सुरक्षा उपाय: मेडिकल इमरजेंसी के लिए ऐप में 'रेड बटन' (आपातकालीन सुविधा) अनिवार्य की जाए और कार्य क्षेत्र की एक निश्चित सीमा तय हो ताकि वर्कर्स पर दबाव कम हो सके.
यूनियन का तर्क है कि वर्तमान कार्य परिस्थितियां संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं. ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा हर महीने हजारों वर्कर्स की छंटनी करना इस क्षेत्र की अस्थिरता को दर्शाता है, जिसे सुधारने के लिए कड़े कानून की आवश्यकता है.
गिग-प्लेटफ़ॉर्म सेवा के कर्मचारी कौन?
फूड डिलीवरी वर्कर्स जैसे Swiggy और Zomato के डिलीवरी कर्मचारी, फ्रीलांस और गिग वर्कर्स जो Upwork, Fiverr या Freelancer पर काम करते हैं, कूरियर और लॉजिस्टिक्स वर्कर्स जैसे Amazon, Flipkart और Dunzo के डिलीवरी कर्मचारी, और अन्य ऑन-डिमांड सेवाएँ प्रदान करने वाले कर्मचारी जैसे होम क्लीनिंग या इंस्टेंट रिपेयर सर्विसेज़ के काम करने वाले लोग सभी प्लेटफ़ॉर्म सेवा के कर्मचारी कहलाते हैं. ये लोग मुख्य रूप से “ऑन-डिमांड डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म” के माध्यम से काम करते हैं और उनकी नौकरी पारंपरिक स्थायी नौकरी से अलग होती है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 25, 2026 05:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

