Delhi Power Tariff: LPG संकट के बीच दिल्लीवासियों के लिए एक और झटका, 1 अप्रैल से महंगी हो सकती है बिजली; जानें क्यों दाम बढ़ने जा रहे हैं
Electricity | Representative Image (Photo Credit: Pixabay)

Delhi Power Tariff: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एलपीजी संकट के बीच अब बिजली के बिलों में भी बढ़ोतरी का अनुमान है। दरअसल, दिल्ली सरकार बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लंबे समय से लंबित 38,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए को चुकाने के लिए कार्रवाई कर रही है. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें राजधानी के बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने और डिस्कॉम्स की आर्थिक परेशानी को दूर करने पर जोर दिया गया था.

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय के कारण 1 अप्रैल 2026 से दिल्ली में बिजली के बिलों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इसके साथ ही एलपीजी संकट के चलते आम जनता को और वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है.

क्यों बढ़ रहे हैं बिजली के दाम?

पिछले लगभग एक दशक से बिजली कंपनियों की लागत और उनके द्वारा वसूले गए टैरिफ के बीच भारी अंतर रहा है. इस अंतर को 'रेगुलेटरी एसेट्स' कहा जाता है, जो अब बढ़कर 38,552 करोड़ रुपये हो गया है. इसमें ब्याज (Carrying Costs) भी शामिल है, जिसने कुल देनदारी को काफी बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इस बकाया राशि की वसूली जरूरी है.

किस कंपनी का कितना है बकाया?

दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली तीन प्रमुख कंपनियों का बकाया विवरण इस प्रकार है:

  • BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL): ₹19,174 करोड़.

  • BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL): ₹12,333 करोड़.

  • टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL): ₹7,046 करोड़.

आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

इस भारी भरकम राशि की वसूली के लिए दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में 'रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज' (Regulatory Asset Surcharge) पेश कर सकता है या मौजूदा सरचार्ज में बढ़ोतरी कर सकता है. इसका सीधा मतलब यह है कि प्रति यूनिट बिजली की प्रभावी दर बढ़ जाएगी. हालांकि, बिल में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका अंतिम फैसला ऑडिट और रिकवरी प्लान की समीक्षा के बाद लिया जाएगा.

सरकार की सब्सिडी योजना और राहत

बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद, दिल्ली सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह उपभोक्ताओं को इस बोझ से बचाने के लिए अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान कर सकती है. दिल्ली में मुफ्त और रियायती बिजली एक प्रमुख नीति रही है. सरकार का प्रयास रहेगा कि छोटे उपभोक्ताओं और मध्यम वर्ग पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर न पड़े.

बिजली क्षेत्र के लिए नया चरण

अप्रैल से होने वाला यह बदलाव दिल्ली की बिजली नीति के लिए एक नया मोड़ साबित होगा. एक तरफ जहां कंपनियों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाना अनिवार्य है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के लिए बिजली को सस्ता रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण और निर्बाध आपूर्ति में मदद मिलेगी, लेकिन मध्यम अवधि में यह बिलों में वृद्धि का कारण बनेगा.