नई दिल्ली, 29 अप्रैल: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में बुधवार को उस समय एक असहज और गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष चल रही वर्चुअल सुनवाई (Virtual Hearing) में सुरक्षा सेंधमारी का मामला सामने आया. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रही अदालती कार्यवाही के बीच में अज्ञात आईडी से बार-बार अश्लील (Pornographic) सामग्री प्रसारित की गई. इस आपत्तिजनक घटना के कारण अदालत को अपनी कार्यवाही दो बार बीच में ही बंद करने पर मजबूर होना पड़ा. यह भी पढ़ें: Deepfake Misuse Case: पीएम मोदी की डीपफेक फोटो पोस्ट करने वाले आरोपी को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत; गिरफ्तारी के दस्तावेजों की जांच के आदेश
सुनवाई के दौरान बार-बार बाधा
यह घटना उस समय हुई जब मुख्य न्यायाधीश की बेंच महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रही थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वर्चुअल मीटिंग में शामिल किसी अज्ञात उपयोगकर्ता ने अचानक अश्लील वीडियो प्ले करना शुरू कर दिया. तकनीकी टीम ने तुरंत हस्तक्षेप कर मीटिंग को बंद किया, लेकिन जब दोबारा कार्यवाही शुरू करने की कोशिश की गई, तो शरारती तत्वों ने फिर से उसी कृत्य को दोहराया. इसके चलते कोर्ट रूम में मौजूद वकीलों और न्यायाधीशों को भारी असहजता का सामना करना पड़ा.
दिल्ली हाई कोर्ट की वर्चुअल सुनवाई में बड़ी सुरक्षा चूक
Obscene pornographic content being played repeatedly in the middle of hearings on VC before Delhi High Court’s Chief Justice bench.
VC meeting has been shut down twice. pic.twitter.com/SBAkW84qgc
— Live Law (@LiveLawIndia) April 29, 2026
वर्चुअल सुनवाई पर उठे सुरक्षा सवाल
अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली हाई कोर्ट या देश की अन्य अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान इस तरह की 'ज़ूम-बॉम्बिंग' (Zoom-bombing) जैसी घटनाएं हुई हैं. बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं ने अदालती कार्यवाही की डिजिटल सुरक्षा और वर्चुअल मीटिंग लिंक्स की गोपनीयता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं.
कोर्ट का कड़ा रुख और आगे की कार्रवाई
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए आईटी सेल और संबंधित अधिकारियों को इस सुरक्षा चूक की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को भी शामिल किया जा सकता है ताकि उन आईपी एड्रेस (IP Address) का पता लगाया जा सके जिनसे यह अश्लील सामग्री स्ट्रीम की गई थी. फिलहाल, सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए वर्चुअल एक्सेस को सीमित कर दिया गया है.
डिजिटल अदालतों की चुनौतियां
कोविड-19 महामारी के बाद से भारतीय न्यायपालिका ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को व्यापक रूप से अपनाया है ताकि न्याय की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे. हालांकि, खुली अदालतों के नियम के तहत वीसी लिंक अक्सर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होते हैं, जिसका फायदा उठाकर शरारती तत्व इस तरह की बाधाएं उत्पन्न करते हैं. कानूनी जानकारों का मानना है कि अब वर्चुअल सुनवाई के लिए अधिक सुरक्षित और पासवर्ड-प्रोटेक्टेड सिस्टम की आवश्यकता है.













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