Deepfake Misuse Case: पीएम मोदी की डीपफेक फोटो पोस्ट करने वाले आरोपी को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत; गिरफ्तारी के दस्तावेजों की जांच के आदेश
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Photo)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत (A Delhi Court)  ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की एआई (AI) द्वारा निर्मित एक छेड़छाड़ की गई (मर्फ्ड) फोटो सोशल मीडिया (Social Media) पर साझा करने के आरोपी व्यक्ति को नियमित जमानत (Bail) दे दी है. इस फोटो में प्रधानमंत्री को अभिनेता शाहरुख खान (Shahrukh Khan) के सामने झुकते हुए दिखाया गया था. जमानत देने के साथ ही अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए गिरफ्तारी के एक संदिग्ध दस्तावेज की सत्यता की जांच करने के लिए उच्चाधिकारियों को निर्देश दिए हैं. यह भी पढ़ें: Rajpal Yadav Gets Bail: एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस केस में बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत

मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर (Saurabh Pratap Singh Laler) ने आरोपी मुजाहिद जमाल शेख (Mujahid Jamal Shaikh) की जमानत अर्जी पर सुनवाई की. आरोपी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 1 फरवरी, 2026 को अपने एक्स (X) अकाउंट से प्रधानमंत्री की एक आपत्तिजनक एआई-मर्फ्ड फोटो रीपोस्ट की थी. इस मामले में 18 फरवरी को शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद आरोपी को मार्च में महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया था.

अदालत की टिप्पणियां और जमानत का आधार

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील आमिर रजा खान ने तर्क दिया कि 34 वर्षीय मुजाहिद का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है. यह भी दलील दी गई कि सारा सबूत इलेक्ट्रॉनिक है जिसे पुलिस पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए आरोपी द्वारा सबूतों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है.

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और मुख्य सबूत सुरक्षित हैं. कोर्ट ने आदेश में कहा, 'आरोप केवल एक आपत्तिजनक एआई-फोटो पोस्ट करने तक सीमित है. आरोपी के फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं दिखती है, इसलिए वह जमानत का हकदार है.'

संदिग्ध दस्तावेजों की जांच के निर्देश

जमानत देने के साथ ही अदालत ने एक गंभीर प्रक्रियात्मक खामी की ओर भी इशारा किया. कोर्ट ने स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त (DCP) को निर्देश दिया कि वे गिरफ्तारी के आधारों से संबंधित एक दस्तावेज की प्रारंभिक जांच करें. पुलिस ने दावा किया था कि यह दस्तावेज फर्जी है, जिस पर कोर्ट ने इसकी सत्यता और लिखावट विशेषज्ञ की राय लेने की बात कही है. यह भी पढ़ें: ब्रेकअप का मतलब आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को मिली जमानत

जमानत की शर्तें

अदालत ने मुजाहिद जमाल शेख को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं:

  • आरोपी बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ेगा.
  • वह सुनवाई की हर तारीख पर अदालत में पेश होगा.
  • आरोपी का एक्स (X) अकाउंट तब तक डिएक्टिवेटेड रहेगा, जब तक कोर्ट इसे फिर से सक्रिय करने की लिखित अनुमति नहीं दे देता.

अदालत ने स्पष्ट किया कि शर्तों के किसी भी उल्लंघन की स्थिति में जमानत रद्द कर दी जाएगी. यह मामला एआई और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के कानूनी पहलुओं को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है.