Lucknow Cyber Fraud: लखनऊ में डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक मामला, 85 वर्षीय बुजुर्ग को 27 दिनों तक बंधक बनाकर 84.5 लाख रुपये ठगे
लखनऊ के जानकीपुरम में एक रिटायर्ड अधिकारी को जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए 27 दिनों तक डराकर रखा और उनके जीवन भर की जमा पूंजी, 84.5 लाख रुपये ठग लिए. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
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लखनऊ, 29 अप्रैल: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से साइबर अपराध (Cyber Crime) का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां जानकीपुरम सेक्टर-जी (Janakipuram Sector G) के निवासी 85 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी बदरुद्दीन अंसारी (Badruddin Ansari) को साइबर ठगों ने लगभग एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) में रखा और उनसे ₹84.5 लाख की ठगी की. जालसाजों ने खुद को पुलिस और एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (Anti-Terrorist Squad) यानी एटीएस (ATS) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर बुजुर्ग को इतना डरा दिया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई उनके खातों में ट्रांसफर कर दी. यह भी पढ़ें: Cyber Fraud Alert: साइबर फ्रॉड को लेकर इंदौर पुलिस की चेतावनी, शादी के डिजिटल कार्ड से खाली हो सकता है बैंक खाता, रहें सावधान
ऐसे शुरू हुआ 'डिजिटल अरेस्ट' का खेल
ठगी की यह घटना 7 मार्च को शुरू हुई, जब अंसारी को एक अज्ञात नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय का सीनियर इंस्पेक्टर बताया. जालसाज ने दावा किया कि अंसारी का नाम पुणे, महाराष्ट्र के एक फर्जी एचडीएफसी बैंक खाते से जुड़े हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है. बुजुर्ग को डराने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सएप और सिग्नल ऐप पर सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई और एनआईए के लोगो वाले फर्जी दस्तावेज भेजे.
27 दिनों तक मनोवैज्ञानिक दबाव
अगले 27 दिनों तक, खुद को एटीएस अधिकारी बताने वाले कई लोग लगातार वीडियो और वॉयस कॉल के जरिए अंसारी के संपर्क में रहे. इस दौरान उन्हें किसी से भी बात करने या घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई. गिरफ्तारी और जेल जाने के डर से अंसारी इतने दबाव में आ गए कि उन्होंने 11 मार्च से 4 अप्रैल के बीच विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹84.5 लाख ट्रांसफर कर दिए. इस सदमे के कारण उन्होंने अंतिम ट्रांजैक्शन के तीन हफ्ते बाद पुलिस से संपर्क किया. यह भी पढ़ें: Digital Arrest Fraud: डिजिटल अरेस्ट क्या है? जानिए कैसे हो रहा है ये फ्रॉड, खुद को बचाने के तरीके
पुलिस की कार्रवाई और जांच
लखनऊ साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने बताया कि पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न खातों में भेजे गए ₹27 लाख फ्रीज कर दिए हैं. तकनीकी टीमें अब उन डिजिटल निशानों की तलाश कर रही हैं जिनके जरिए ठगों तक पहुंचा जा सके.
सावधानी ही बचाव है
पुलिस ने एक बार फिर जनता को जागरूक करते हुए कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ, गिरफ्तारी या 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कार्रवाई नहीं करता है. यदि कोई आपको इस तरह डराने की कोशिश करे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 29, 2026 12:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

