पटना: बिहार की सियासत में एक बड़े युग का अंत और नए बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. मुख्यमंत्री (Bihar Chief Minister) आवास के सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार (Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य (Member of Rajya Sabha) के रूप में शपथ ले सकते हैं. इस औपचारिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली रवाना होने की संभावना है. दिल्ली से लौटने के बाद, कुमार 13 अप्रैल के बाद किसी भी समय मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा (Resign From The Post of Chief Minister) दे सकते हैं. माना जा रहा है कि 14 अप्रैल को 'खरमास' (Kharmas) समाप्त होने के साथ ही राज्य की राजनीति में नई नियुक्तियों और बदलावों की गति तेज होगी.
इस्तीफे के बाद भी जारी रहेगी 'जेड प्लस' सुरक्षा
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं की जाएगी. बिहार गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि उन्हें पद मुक्त होने के बाद भी 'जेड प्लस' (Z Plus) श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी. विशेष शाखा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यभार संभालने के दौरान उनका सुरक्षा घेरा पूरी तरह बरकरार रहेगा.
यह निर्णय बिहार विशेष सुरक्षा अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया है. पुलिस महानिदेशक (DGP) और विशेष शाखा को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षा के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करें. जेड प्लस सुरक्षा भारत का सर्वोच्च सुरक्षा स्तर है, जिसमें लगभग 55 जवान, निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) और एस्कॉर्ट वाहन चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं.
संसदीय सफर और नई रिहाइश की तैयारी
नीतीश कुमार 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए थे, जिसके बाद उन्होंने 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उनका ऊपरी सदन में जाना बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है.
हाल ही में कुमार ने 7, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले का निरीक्षण भी किया है. मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उनके इसी बंगले में रहने की संभावना है. राजनीतिक रूप से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि नीतीश कुमार अपने करियर के कई अहम पड़ावों पर यहीं से सक्रिय रहे हैं.
आगे क्या होगा?
बिहार का राजनीतिक परिदृश्य इस समय एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है. नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद बिहार की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. जानकारों का मानना है कि 14 अप्रैल के बाद राज्य में नई सरकार के गठन या नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो सकती है.
अस्थायी रूप से रुकी हुई राजनीतिक गतिविधियां खरमास खत्म होते ही एक नया मोड़ लेंगी, जिससे आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव की पुष्टि हो जाएगी.












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