Jay Pawar Rajya Sabha: अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ नहीं, छोटे बेटे जय जा सकते हैं राज्यसभा; जानें वजह
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Jay Pawar Rajya Sabha: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राज्य की राजनीति में उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का नया उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है, जिसके कारण उन्हें अपनी वर्तमान राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देना होगा. खाली हो रही इस सीट के लिए अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है. सूत्रों के अनुसार, महायुति गठबंधन की प्रमुख सहयोगी भाजपा ने बड़े बेटे पार्थ पवार के नाम पर असहमति जताई है.

भाजपा को पार्थ के नाम पर क्यों है आपत्ति?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं है. इसका मुख्य कारण उन पर लगे 'पुणे जमीन घोटाले' के आरोप बताए जा रहे हैं. यह भी पढ़े: Sunetra Pawar: महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम बनने के बाद सुनेत्रा पवार बनीं पुणे-बीड की पालक मंत्री, दिवंगत पति अजित पवार की ली जगह

आरोप है कि पुणे के मुंधवा इलाके में करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1,800 करोड़ रुपये थी, उसे केवल 300 करोड़ रुपये में एक निजी कंपनी (अमीडिया एंटरप्राइजेज) को बेच दिया गया. इस कंपनी में पार्थ पवार की बड़ी हिस्सेदारी बताई जाती है. भाजपा का मानना है कि पार्थ को उम्मीदवार बनाने से विपक्षी दलों को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने का मौका मिल जाएगा.

जय पवार के नाम पर बन रही सहमति

पार्थ के विपरीत, अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार की छवि एक विवाद-रहित युवा की है. जय पवार अब तक मुख्यधारा की चुनावी राजनीति से दूर रहे हैं और पारिवारिक व्यवसाय संभालते आए हैं.

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व ने संकेत दिया है कि यदि एनसीपी जय पवार को नामांकित करती है, तो उन्हें समर्थन देने में कोई आपत्ति नहीं होगी. जय पवार को बारामती में एक मृदुभाषी और जमीन से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, जो गठबंधन के लिए एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकते हैं.

सुनेत्रा पवार का इस्तीफा और राज्यसभा का गणित

अजित पवार के निधन के बाद 31 जनवरी 2026 को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. संवैधानिक नियमों के अनुसार, अब उन्हें राज्यसभा सांसद का पद छोड़ना होगा.

इस खाली सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में एनसीपी (अजित पवार गुट) के पास पर्याप्त संख्या बल है. चूंकि महायुति गठबंधन एकजुट है, इसलिए पवार परिवार के जिस भी सदस्य का नाम तय होगा, उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है.

शरद पवार गुट से दूरी बरकरार

अजित पवार की मृत्यु के बाद अटकलें थीं कि क्या दोनों एनसीपी गुट फिर से एक होंगे. हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम बताते हैं कि अजित पवार का गुट अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने और नई पीढ़ी (जय पवार) को दिल्ली भेजकर अपनी शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है.