India Condom Shortage: तेल और गैस के बाद, पश्चिम एशिया के युद्ध से भारत में कंडोम की कमी का खतरा, बढ़ सकती हैं कीमतें!
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध का असर अब भारत के कंडोम उद्योग पर भी पड़ता दिख रहा है. सिलिकॉन ऑयल की कमी और अमोनिया की बढ़ती कीमतों के कारण एचएलएल लाइफकेयर और मैनकाइंड फार्मा जैसी कंपनियों के उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है.
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है. तेल और गैस की कीमतों में उछाल के बाद अब इसका असर भारत के गर्भनिरोधक (Contraceptive) उद्योग पर पड़ने लगा है. कच्चे माल की भारी कमी और बढ़ती लागत के कारण भारत में कंडोम की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. देश की प्रमुख निर्माता कंपनियां कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया की भारी कमी
भारत की बड़ी कंडोम निर्माता कंपनियां जैसे एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड (HLL Lifecare Ltd), मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma Ltd) और क्यूबिट लिमिटेड (Cupid Ltd) वर्तमान में उत्पादन के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण इनपुट्स की कमी से जूझ रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कंडोम के लुब्रिकेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन ऑयल (Polydimethylsiloxane - PDMS) की आपूर्ति रुक गई है. यह भी पढ़े: PM Modi Mann Ki Baat Live: जंग के बीच पीएम मोदी का ‘मन की बात’ में संदेश, देशवासियों से एकजुट होकर चुनौती से बाहर निकलने की अपील, अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी
इसके साथ ही, लेटेक्स प्रसंस्करण (Latex Processing) के लिए अनिवार्य अमोनिया (Ammonia) की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है. पश्चिम एशिया से इन रसायनों की आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है.
आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और बढ़ती लागत
युद्ध के कारण स्वेज नहर और लाल सागर के रास्तों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इसके चलते लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ गया है और माल पहुंचने में भी देरी हो रही है. भारतीय कंपनियां अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करती हैं, और वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव ने उनके स्टॉक को खत्म करना शुरू कर दिया है. जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में बाजार में कंडोम की उपलब्धता पर बड़ा असर पड़ सकता है.
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
उत्पादन लागत बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा. उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए खुदरा कीमतों में 10% से 15% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं. सरकारी आपूर्ति, जो मुख्य रूप से एचएलएल लाइफकेयर के माध्यम से होती है, वहां भी स्टॉक की कमी के कारण स्वास्थ्य कार्यक्रमों में देरी होने की संभावना है.
भारत के गर्भनिरोधक बाजार की स्थिति
भारत दुनिया के सबसे बड़े कंडोम बाजारों में से एक है. यहां न केवल घरेलू खपत अधिक है, बल्कि भारत बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय बाजारों को निर्यात भी करता है. कंडोम उद्योग में आने वाली यह रुकावट देश के परिवार नियोजन (Family Planning) कार्यक्रमों और यौन स्वास्थ्य अभियानों के लिए भी एक चुनौती बन सकती है. कंपनियां फिलहाल वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और कच्चे माल के अन्य स्रोतों की तलाश कर रही हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक संकट ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 29, 2026 12:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

