जलगांव, महाराष्ट्र: शहरों में सभी स्वास्थ सुविधाएं होती है. जिसके कारण इमरजेंसी में मरीजों को सुविधा और इलाज समय पर मिलने की गुंजाईश रहती है. लेकिन ग्रामीणों भागों में आज भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है. ऐसा ही एक वीडियो महाराष्ट्र के जलगांव जिले से सामने आया है. जहांपर एक महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. इस घटना के बाद अब विकसित महाराष्ट्र की भी पोल खुल गई है. ये घटना जलगांव जिले के चोपड़ा तहसील के बोरमडी गांव की है. बताया जा रहा है की इस आदिवासी महिला ने सड़क के किनारे ही बच्चे को जन्म दिया. इस महिला की मदद दूसरी महिलाओं ने की. जानकारी सामने आई है की महिला को जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो महिला के पति ने एम्बुलेंस के लिए करीब आधे घंटे तक उनसे संपर्क किया. इसके बाद पति ने आंगनबाड़ी सेविका से लेकर डॉक्टर से भी मदद की गुहार लगाई.लेकिन जब पत्नी को दर्द काफी ज्यादा होने लगा तो पति उसको बाइक पर बिठाकर ही हॉस्पिटल ले जाने लगा. लेकिन रास्ते में ही महिला ने सड़क के किनारे बच्चे को जन्म दिया.
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया X पर @BandhuNews_in नाम के हैंडल से शेयर किया गया है.ये भी पढ़े:UP: बलिया में अस्पताल के बाहर महिला ने बच्चे को दिया जन्म, वायरल वीडियो के बाद चार कर्मचारी ट्रांसफर; VIDEO
महिला ने सड़क किनारे दिया बच्चे को जन्म
🛑 प्रगतिशील भारताच्या जाहिराती झळकतात, पण जमिनीवर सत्य काय आहे?
📍 जळगाव जिल्ह्यातील चोपडा तालुक्यातील बोरमळी गाव –
👩🍼 एक गर्भवती महिला रस्त्याच्या कडेला, मदतीशिवाय, मूलाला जन्म देते!
😔 ना ॲम्ब्युलन्स… ना आरोग्य व्यवस्था… ना कुठलीही मदत.
👧 "लाडकी बहिणीची अवस्था –… pic.twitter.com/8BGenYQxao
— Maharashtra Bandhu News (@BandhuNews_in) May 28, 2025
सड़क पर साड़ी से घेरकर महिलाओं ने करवाई डिलीवरी
इस दौरान वीडियो जो सामने आया है, उसमें देख सकते है कि महिलाओं ने सड़क के किनारे साड़ी पकड़कर घेरकर रखी है और महिलाओं ने ही महिला की डिलीवरी करवाई. इस दौरान एक शख्स को कहते हुए सुना जा सकता है की आधे घंटे से कोई भी मदद के लिए नहीं पहुंचा है. शख्स ने कहा की हम आधे घंटे से राह देख रहे है मदद की, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं आई है.
महाराष्ट्र सरकार के दावों की खुली पोल
महाराष्ट्र में मंत्री और नेता मंच से बड़े बड़े दावें करते है. लेकिन ग्रामीणों भागों में आज भी लोगों को स्वास्थ सुविधाओं का लाभ अच्छे तरीके से नहीं मिल पाता. जिसके कारण कई लोगों को या तो कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है या फिर कई लोग बिना इलाज के ही मर जाते है. इस घटना ने एक बार फिर सिस्टम के दावों की पोल खोल कर रख दी है.













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