बाराबंकी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रहने वाली क्लास 9 की छात्रा पूजा ने वह कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े संसाधनों वाले नहीं कर सके. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इस होनहार छात्रा ने एक 'धूल रहित थ्रेशर मशीन' का मॉडल तैयार किया है, जिसकी सराहना राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हो रही है. अब पूजा को जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी और विज्ञान प्रयोगशालाओं के दौरे का मौका मिलने वाला है. इस छात्रा गरीबी को कभी भी खुद पर हावी नहीं होने दिया और पूरी लगन से अपनी पढ़ाई में मन लगाया. ये भी पढ़े:MP Board Result 2025: एमपी बोर्ड में बेटियों ने बाजी मारी, 12वीं में 74 प्रतिशत और हाई स्कूल में 76 फीसदी बच्चे पास
छात्रा ने बनाया धूल रहित थ्रेशर मशीन का मॉडल
बाराबंकी की बेटी ने रचा इतिहास
कक्षा 9 की छात्रा पूजा ने बनाया धूल रहित थ्रेसर मॉडल!
राष्ट्रीय स्तर पर हो रही पूजा के मॉडल की सराहना!
ना मोबाइल, ना कंप्यूटर – फिर भी बन गई वैज्ञानिक!
पिता पुत्तीलाल मजदूर, मां सुशीला स्कूल की रसोइया – आर्थिक तंगी नहीं रोक सकी प्रतिभा!… pic.twitter.com/7IyPj2pD11
— News1India (@News1IndiaTweet) May 23, 2025
कम संसाधनों में बड़ा इनोवेशन
पूजा के पास ना स्मार्टफोन था, ना कंप्यूटर. लेकिन उनकी कल्पनाशक्ति, मेहनत और जज्बे ने असंभव को संभव कर दिखाया. महज 3000 रुपये में इस मॉडल को तैयार किया गया, जिसमें उनके अध्यापक ने पूरा सहयोग किया.
कैसे आया थ्रेशर मशीन मॉडल बनाने का विचार
पूजा ने बताया कि,'हमारे गांव में थ्रेशर से निकलने वाली धूल से बच्चों और बुजुर्गों को बहुत परेशानी होती थी.तभी मुझे इस पर कुछ नया करने का विचार आया.
गरीबी के बावजूद हार नहीं मानी
पूजा के पिता पुत्तीलाल मज़दूरी करते हैं, और मां सुशीला देवी एक सरकारी स्कूल में रसोईया हैं. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद पूजा ने कभी हार नहीं मानी. स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने इनोवेशन पर भी ध्यान दिया और विज्ञान के प्रति अपनी रुचि को बनाए रखा.
राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
दिसंबर 2020 में पूजा के द्वारा बनाएं गए मॉडल को जिला और मंडल स्तर पर चुना गया.लखनऊ और दिल्ली की प्रदर्शनी में मॉडल को राष्ट्रीय पहचान मिली.2024 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने पूजा के मॉडल को राष्ट्रीय विज्ञान मेले के लिए चयनित किया.
अब जापान की उड़ान
पूजा को अब जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय और साइंस लैब्स के दौरे पर भेजा जाएगा. यह अवसर न केवल उनके लिए बल्कि बाराबंकी जैसे छोटे शहर के लिए भी गौरव की बात है.













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