Jyoti Chandekar Death News: मराठी फिल्म और थिएटर की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. जानी-मानी अदाकारा ज्योति चांदेकर (Jyoti Chandekar Died) का निधन हो गया है. 68 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. हालांकि उनकी मौत की असली वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इस खबर ने मराठी सिनेमा और उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है. उनकी बेटी और लोकप्रिय अभिनेत्री तेजस्विनी पंडित इस खबर से बेहद टूट चुकी हैं. पुणे से ताल्लुक रखने वाली ज्योति चांदेकर ने अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल संयोग से की थी. साल 1969 में जब वह अपने पिता के साथ हिंदी फिल्म 'एक नजर' की शूटिंग देखने गई थीं, तभी उन्हें छोटे से रोल का मौका मिला.
उनकी साफ आवाज और धाराप्रवाह संवाद अदायगी ने डायरेक्टर का ध्यान खींच लिया. इसके बाद अनंत ओक ने उन्हें नाटक 'सुंदर मी होना' में कास्ट किया. यही से उनके अभिनय सफर की असली शुरुआत हुई.
रंगमंच से फिल्मों तक का सफर
ज्योति चांदेकर ने 'करायला गेलो एक', 'स्वयं सिद्धा', 'वरहाडी मानसाम' और 'बेमान' जैसे कई नाटकों में काम किया. लेकिन उन्हें असली पहचान 'आमदार सौभाग्यवती' नाम के नाटक से मिली. उनकी गहरी आवाज और तेज निगाहों का जादू दर्शकों पर हमेशा चलता रहा. कहा जाता है कि जब वह मंच पर होती थीं तो सिर्फ एक शब्द या इशारे से ही दर्शकों को बांध लेती थीं.
थिएटर के बाद उन्होंने फिल्मों का रुख किया. 'मी सिंधुताई सपकाळ', 'पाऊलवाट', 'सुखांत' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया. इन फिल्मों ने उनके करियर को नई ऊंचाइयां दीं और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम बड़े कलाकारों की फेहरिस्त में शामिल हो गया.
दर्शकों की चहेती 'पुरवा आजी'
बड़े पर्दे और थिएटर के अलावा वह टीवी सीरियल्स में भी सक्रिय रहीं. हाल ही में वह 'पुरवा आजी' के किरदार में नजर आ रही थीं. उनकी एक्टिंग इतनी सहज थी कि दर्शक उनसे जुड़ाव महसूस करते थे. यही वजह है कि उनके अचानक चले जाने से सीरियल के दर्शक भी सदमे में हैं.
अपूरणीय क्षति
ज्योति चांदेकर के निधन से मराठी सिनेमा ने एक ऐसी कलाकार खो दी है, जिसकी जगह भरना आसान नहीं होगा. उनके जाने से इंडस्ट्री में जो खालीपन आया है, वह लंबे समय तक महसूस किया जाएगा. अपने पूरे करियर में उन्होंने जो योगदान दिया, वह हमेशा याद किया जाएगा.
आज उनके चाहने वाले और फिल्म इंडस्ट्री उनसे जुड़ी यादों को साझा कर रहे हैं. मंच से लेकर बड़े पर्दे तक उन्होंने जो छाप छोड़ी, वह आने वाले कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी.












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