अनुष्का शर्मा के मुताबिक जीवन के अनुभवों ने कहानी पेश करने में मदद की
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का कहना है कि सिर्फ फिल्में देखना हमेशा मीडियम को बेहतर समझने में मदद नहीं करता है, बल्कि जीवन में मिले अनुभव भी कहानी कहने और उसे पेश करने में मदद करते हैं. अनुष्का के पिता ने सेना में सेवा दी है, इसलिए वह और उनके भाई कर्णेश, जो उनके प्रोडक्शन हाउस में उनके साथी भी हैं, एक सैन्य बैकग्राउंड में पले-बड़े हैं और दोनों ने बहुत यात्राएं की हैं.
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) का कहना है कि सिर्फ फिल्में देखना हमेशा मीडियम को बेहतर समझने में मदद नहीं करता है, बल्कि जीवन में मिले अनुभव भी कहानी कहने और उसे पेश करने में मदद करते हैं. अनुष्का के पिता ने सेना में सेवा दी है, इसलिए वह और उनके भाई कर्णेश (Karnesh Sharma), जो उनके प्रोडक्शन हाउस में उनके साथी भी हैं, एक सैन्य बैकग्राउंड में पले-बड़े हैं और दोनों ने बहुत यात्राएं की हैं.
इस बारे में अभिनेत्री ने कहा, "आर्मी किड्स होने के नाते हम हमेशा नए विचारों को अपनाने के लिए तैयार रहते हैं और हमने जितनी यात्राएं की हैं, वह सब कुछ वास्तव में हमें स्थानीय कहानियों को समझने में मदद करता है. इस तरह के अनुभवों ने न केवल कहानी कहने और पेश करने में हमारी मदद की, बल्कि हमें एक सामाजिक दृष्टिकोण के बजाय चीजों को अलग-अलग तरीकों से देखने का मौका दिया." यह भी पढ़े: Bihar and Assam Floods: बाढ़ से तबाही का मंजर झेल रहे असम और बिहार के लिए विराट कोहली-अनुष्का शर्मा करेंगे दान
अनुष्का ने आगे कहा, "फिल्में देखना हमेशा आपको फिल्मों को बेहतर समझने में ही सिर्फ मदद नहीं करता है, बल्कि हमारे जीवन के अनुभवों ने भी हमें इस व्यवसाय को समझने में मदद की है. हमने नए सिरे से सबकुछ सोचा है." अभिनेत्री ने खुलासा किया कि कंटेंट प्रोडक्शन में सफलता के लिए कोई सूत्र नहीं है. उन्होंने कहा, "प्रोडक्शन का व्यवसाय मुश्किल है और यहां तक कि सबसे अनुभवी भी यह नहीं कह सकते हैं कि उन्हें इसके सूत्र की जानकारी है. आप बस अपनी गलतियों से सीखते हैं. जब चीजें आपके इच्छा के अनुरूप काम नहीं करती हैं, तब भी वे हमें सीख देते हैं."
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 08, 2020 10:52 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

