गोपेश्वर (उत्तराखंड), 25 सितंबर पिछले एक साल में कई बार भूस्खलन की जद में आए चमोली जिले के पगनों गांव के प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग को लेकर सोमवार को जोशीमठ तहसील मुख्यालय में जुलूस निकाल कर अपना विरोध प्रकट किया।
पगनों गांव में 100 से अधिक परिवार रहते हैं। गांव के तीन दर्जन से अधिक परिवारों के आवास भूस्खलन के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह गांव जोशीमठ तहसील मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर पातालगंगा के समीप स्थित है।
ग्रामीणों ने बताया कि भूस्खलन के चलते 10 से अधिक परिवारों के आवास भूस्खलन की चपेट में आ कर नष्ट चुके हैं जबकि तीन दर्जन से अधिक आवास खतरे की जद में हैं।
गांव की विश्वेश्वरी देवी ने पत्रकारों को बताया कि उनका मकान नष्ट हो चुका है और भविष्य अनिश्चित है। उन्होंने कहा कि वह प्रशासन से पिछले कई महीनों से राहत एवं बचाव की गुहार लगा रही हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
गांव के उपरी भाग में कमेड़ा पानी नामक स्थान से एक साल पहले भूस्खलन की शुरुआत शुरू हुई थी जब अचानक पहाड़ी दरकनी शुरू हुई थी। अब इसका फैलाव बढ़ता जा रहा है और मकानों के भूस्खलन की चपेट में आकर नष्ट होने का सिलसिला जारी है।
ग्रामीण दिलबर पंवार ने बताया कि अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक सरकारी और निजी मकान इस भूस्खलन की चपेट में आकर ध्वस्त हो चुके हैं। गांव की प्रधान रीमा देवी ने बताया कि तीन परिवार गांव छोड़ कर अन्यत्र शरण ले चुके हैं।
जोशीमठ की उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने गांव का दौरा किया और प्रभावित परिवारों की सहायता का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि चार परिवारों को आपदा राहत मद से धनराशि भी वितरित की जा चुकी है।
जोशी ने कहा कि गांव के भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए टीम भेजी जा रही है और प्रभावित परिवारों को आसपास के सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरित किया जाएगा।
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