जरुरी जानकारी | बैंकिंग प्रणाली में नकदी बनाये रखने के लिये एक लाख करोड़ रुपये की तरलता सुविधा तैयार रखेगा आरबीआई

मुंबई, नौ अक्टूबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि वह प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिये एक लाख करोड़ रुपये का लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (एलटीआरओ) की सुविधा को हर समय तैयार रखेगा। जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जायेगा।

रिजर्व बैंक ने एक विशिष्ट उपाय के तहत चालू वित्त वर्ष में राज्य विकास ऋण में खुले बाजार परिचालन की घोषणा की।

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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के निर्णयों की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘यह निर्णय लिया गया है कि नीतिगत रेपो दर से जुड़ी परिवर्तनशील दरों पर तीन साल तक की परिपक्वता के साथ एक लाख करोड़ रुपये तक की टीएलटीआरओ सुविधा को तैयार रखा जायेगा और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जायेगा।’’

रिजर्व बैंक ने कहा कि इसके तहत उपलब्ध नकदी को बैंक विशिष्ट क्षेत्रों के निकायों के द्वारा जारी कॉरपोरेट बांड, वाणिज्यिक पत्रों और गैर परिवर्तनीय डिबेंचरों में लगाना होगा। यह निवेश उनके ऐसी प्रतिभूतियों में 30 सितंबर 2020 तक बकाया निवेश के अतिरिक्त होगा।’’

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दास ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी छमाही में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की उधार लेने की जरूरतों को देखते हुए तथा आर्थिक पुनरुद्धार के गति पकड़ने से ऋण की मांग में तेजी की संभावना के मद्देनजर हमेशा उपलब्ध टीएलटीआरओ बैंकों को उनका अपना परिचालन सहजता से चलाने तथा नकदी की कमी के कारण किसी प्रकार की दिक्कत से उन्हें बचाने पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले जिन बैंकों ने टीएलटीआरओ 1.0 और टीएलटीआरओ 2.0 के तहत धन लिया है, उन्हें परिपक्वता से पहले वापस करने का विकल्प दिया जायेगा। योजना 31 मार्च 2021 तक उपलब्ध रहेगी।

केंद्रीय बैंक ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में ने नीतिगत दर को चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है और रुख को उदार बनाये रखने का निर्णय लिया।

मनीबॉक्स फाइनेंस के सह संस्थापक एवं सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक अग्रवाल ने इस बारे में कहा कि आरबीआई ने टीएलटीआरओ के माध्यम से तरलता सहायता प्रदान करना जारी रखा है। हालांकि, छोटी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को तरलता का लाभ नहीं हुआ है। उन्हें लक्षित समर्थन की आवश्यकता है।

बिजनेस टु बिजनेस किराना कंपनी पील-वर्क्स के संस्थापक सचिन छाबड़ा ने कहा कि छोटे व्यापारी खराब परिचालन माहौल के चलते परेशान होते रहेंगे क्योंकि पूंजी के अभाव में उन्हें घुटन होगी।

रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के ग्रुप सीएफओ नितिन अग्रवाल ने कहा कि हमेशा उपलब्ध टीएलटीआरओ के तहत बैंकों को एक लाख करोड़ रुपये देने के फैसले से बैंकों को उन सेक्टरों को कर्ज देने के लिये प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जिनका वृद्धि पर कई गुणा असर होता है।

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