देश की खबरें | कर्नाटक के राजनीतिक दलों के बीच राज्यसभा टिकट की दौड़ तेज
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बेंगलुरू, चार जून कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटों के लिए तीनों बड़े राजनीतिक दलों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम और अपनी रणनीति तय नहीं की है, जबकि इन सीटों के लिए नामांकन करने में कुछ ही दिन बाकी है। राज्यसभा सीटों के लिए 19 जून को चुनाव होने वाले हैं।

चारों सीटों से फिलहाल कांग्रेस के राजीव गौड़ा और बी. के. हरिप्रसाद, भाजपा के प्रभाकर कोरे और जद (एस) के डी. कुपेन्द्र रेड्डी राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 25 जून को उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद ये सीटें खाली हो जाएंगी।

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नामांकन दायर करने की अंतिम तारीख नौ जून है और तीनों दलों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप नहीं दिया है।

विधानसभा अध्यक्ष सहित 117 सदस्यों के साथ भाजपा इन चार में से दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर लेगी।

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सूत्रों ने बताया कि पार्टी शनिवार को अपने कोर समिति की बैठक करेगी जहां वे नामों पर चर्चा करेंगे और केंद्रीय नेतृत्व को सूचित करेंगे।

प्रभाकर कोरे जहां राज्यसभा के लिए एक और कार्यकाल चाहते हैं वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी और कर्नाटक के लिए पार्टी के प्रभारी महासचिव मुरलीधर राव के नाम भी चल रहे हैं।

आठ बार से विधायक उमेश कट्टी जहां मंत्री नहीं बनाए जाने के कारण नाराज हैं और वह अपने भाई रमेश कट्टी के लिए राज्यसभा का सीट चाहते हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने उत्तर कर्नाटक के भाजपा विधायकों के साथ बैठक भी की थी, जिससे सत्तारूढ़ दल के कान खड़े हो गए थे।

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की तरफ से नामों के चयन पर रहस्य के बीच पार्टी के अंदर कुछ नेताओं को उम्मीद है कि सीधा केंद्रीय नेतृत्व नाम तय करेगा।

कांग्रेस के 68 विधायक हैं और वह एक सीट पर आसानी से जीत हासिल कर सकती है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक राज्य के वरिष्ठ नेताओं की अगले कुछ दिनों में बैठक हेागी जिसमें उम्मीदवार के नाम पर चर्चा हो सकती है और यह भी चर्चा हो सकती है कि क्या एक अन्य सीट पर जद (एस) का समर्थन करना है या नहीं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे जहां दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली और के. एच. मुनियप्पा सहित कई नेता दावेदार हैं।

जद (एस) के केवल 34 विधायक हैं और वह खुद से राज्यसभा की सीट पर जीत हासिल करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि जीत के लिए कम से कम 44 वोटों की जरूरत है और इसे कांग्रेस या भाजपा के सहयोग के अलावा उनके अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।

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