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वैश्विक तनाव के बीच ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजरें
ट्रंप बोले- यूक्रेन युद्ध खत्म होने के करीब, यूक्रेन ने कहा- रूस की मंशा नहीं
ईंधन बचाने की अपील के बाद पीएम मोदी ने घटाया अपना काफिला: रिपोर्ट
तमिलनाडु में सीएम विजय ने हासिल किया विश्वासमत, 144 विधायकों ने किया समर्थन
पश्चिम एशिया में तनाव के चलते एयर इंडिया ने घटाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें
ईरान के पास अब भी 70 प्रतिशत मिसाइल क्षमता बरकरार: रिपोर्ट
चीन ने पाकिस्तान से कहा, अमेरिका-ईरान का तनाव सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रयास तेज करें
दिल्ली में ब्रिक्स देशों की बैठक के दौरान आम राय बनाने की चुनौती
टिकटॉक के यूरोपीय कारोबार को "यूरोपीय हाथों में" देने की मांग
पीएम मोदी की अपील से ट्रैवल सेक्टर चिंतित
“नार्को-आतंकवादी” इकबाल सिंह को पुर्तगाल से भारत लायी एनआईए
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को बड़ी सफलता मिली है. एजेंसी वांछित “नार्को-आतंकवादी” इकबाल सिंह उर्फ शेरा को गिरफ्तार करके पुर्तगाल से भारत लायी है. अधिकारियों ने कहा कि उसे पुर्तगाल से भारत लाने के लिए लंबे समय तक चले कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों के बाद यह सफलता मिली.
इकबाल सिंह उर्फ शेरा को हिज्बुल मुजाहिदीन के एक बड़े आतंकी फंडिंग मामले का मास्टरमाइंड बताया जाता है. पुर्तगाल से दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने के तुरंत बाद एनआईए की एक टीम ने उसे हिरासत में ले लिया. वह 2020 से पुर्तगाल में छिपा हुआ था.
एनआईए ने अपनी जांच के दौरान शेरा की पहचान भारत स्थित एक नार्को-टेरर मॉड्यूल के मुख्य साजिशकर्ता और हैंडलर के रूप में की. यह मॉड्यूल पाकिस्तान से भारत में हेरोइन की तस्करी में शामिल था. पंजाब के अमृतसर जिले का रहने वाला शेरा, सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी करने और देश के भीतर एक बड़ा वितरण नेटवर्क चलाने का आरोपी है.
शी जिनपिंग से बातचीत के लिए चीन पहुंचे डॉनल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है. यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने वाली है. ट्रंप का चीन में भव्य तरीके से स्वागत हुआ, जिसमें रेड कार्पेट, सैन्य सम्मान और सैकड़ों युवाओं द्वारा झंडे लहराते हुए उनका अभिनंदन करना शामिल था.
व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग, वॉशिंगटन में चीन के राजदूत शिए फेंग, विदेश मंत्रालय के कार्यकारी उपमंत्री मा झाओशू और बीजिंग में अमेरिकी दूत डेविड पर्ड्यू ने किया. स्वागत समारोह में सैन्य सम्मान गार्ड, सैन्य बैंड और करीब 300 चीनी युवाओं ने हिस्सा लिया, जो चीनी और अमेरिकी झंडे लहराते हुए “स्वागत है, स्वागत है” के नारे लगा रहे थे.
गुरुवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में ट्रंप विशेष रूप से व्यापार पर जोर देने की योजना बना रहे हैं. वे चीन से अमेरिकी उत्पादों जैसे सोयाबीन, बीफ और विमानों की खरीद बढ़ाने के लिए समझौते करना चाहते हैं. साथ ही, ट्रंप प्रशासन दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने के लिए “बोर्ड ऑफ ट्रेड” की स्थापना की दिशा में भी काम करना चाहता है, जिससे हाल के वर्षों में चले व्यापारिक तनाव को कम किया जा सके.
चीन ने पाकिस्तान से कहा, अमेरिका-ईरान का तनाव सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रयास तेज करें
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता प्रयास तेज करने का आग्रह किया है. उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में कहा कि इस संकट को सुलझाने के लिए संवाद को आगे बढ़ाना जरूरी है. वांग ने यह भी कहा कि चीन इस प्रक्रिया में पाकिस्तान का पूरी तरह समर्थन करेगा और खुद भी क्षेत्रीय शांति बहाल करने में योगदान देगा.
अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा, चार महीनों तक अमेरिकी नाकेबंदी को झेल सकता है ईरान
चीन ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के मुद्दे पर ध्यान देने को कहा है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है. वांग यी ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस संवेदनशील मुद्दे का "उचित समाधान" निकालने में भूमिका निभाए.
होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को कतई पैसा ना दें: अमेरिका
माना जा रहा है कि इस जलमार्ग के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है, इसलिए इसे फिर से खोलना बातचीत का प्रमुख एजेंडा है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चीन दौरे पर हैं और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत होने वाली है.
दिल्ली में ब्रिक्स देशों की बैठक के दौरान आम राय बनाने की चुनौती
भारत की राजधानी दिल्ली में 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक पर ईरान युद्ध की भी छाया होगी क्योंकि इसमें हिस्सा लेने वाले ईरान और यूएई संघर्ष में एक-दूसरे के खिलाफ हैं. इसके चलते बैठक में सभी सदस्य देशों के बीच आम राय बनाने और एक संयुक्त बयान जारी करने में मुश्किलें आ सकती हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मार्च में कहा था कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं इसलिए "हमारे लिए आम सहमति बनाना मुश्किल रहा है." वहीं, मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि विदेश मंत्रियों के साथ हालिया दौर की बैठकों के बाद भारत को एक संयुक्त बयान मिलने की उम्मीद है.
ब्रिक्स की शुरुआत के समय इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. हालिया सालों में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी इसमें शामिल हुए हैं. ईरान ने मेजबान भारत से अपील की है कि ब्रिक्स के मंच का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राएल की कार्रवाइयों की आलोचना के लिए आम सहमति बनाने के लिए किया जाए.
टिकटॉक के यूरोपीय कारोबार को "यूरोपीय हाथों में" देने की मांग
जर्मनी के संस्कृति मंत्री वोल्फ्राम वाइमर ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक के यूरोपीय कारोबार को "यूरोपीय हाथों में" होना चाहिए. उन्होंने अमेरिका के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि बाइटडांस ने अमेरिका में संभावित प्रतिबंध से बचने के लिए टिकटॉक के संचालन को एक ऐसी कंपनी को सौंपा, जिसमें अमेरिकी हिस्सेदारी बहुमत में है. वाइमर का मानना है कि यूरोप को भी इसी तरह टिकटॉक के स्वामित्व ढांचे पर पुनर्विचार करना चाहिए.
वाइमर ने डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई. उनका कहना है कि टिकटॉक यूरोप के युवाओं का बहुत बड़े पैमाने पर डेटा इकट्ठा करता है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह डेटा आखिर कहां और किस तरह इस्तेमाल हो रहा है. उन्होंने इसे "यूरोप के युवाओं के सबसे निजी डेटा"” से जुड़ा मामला बताते हुए पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाया. हालांकि, टिकटॉक ने पहले कहा है कि वह यूरोपीय यूजर्स का डेटा यूरोप में ही स्टोर करता है और उसकी पहुंच को सीमित रखा जाता है.
पीएम मोदी की अपील से ट्रैवल सेक्टर चिंतित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है. ट्रैवल सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बयान के बाद गर्मियों के मौसम में विदेश जाने की मांग पर असर पड़ रहा है. ट्रैवल ऑपरेटरों के अनुसार, पहले ही महंगाई के दबाव के कारण इस सीजन में बुकिंग और पूछताछ में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है और यह अपील इस गिरावट को और बढ़ा सकती है.
दुनिया में लड़ाई के माहौल ने बिगाड़ा जर्मनों के घूमने का प्लान
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और हवाई किराए पहले से ही महंगे हो चुके हैं. एयरलाइंस ने ईंधन शुल्क बढ़ा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा की लागत काफी बढ़ गई है. इसके अलावा होटल और विदेश में अन्य खर्च भी बढ़ रहे हैं, जिससे यात्रियों के लिए विदेश यात्राएं और महंगी हो गई हैं. निवेशकों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है, जिसके चलते ट्रैवल कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई.
साल 2026 की यूरोपीय सांस्कृतिक राजधानियां
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह असर अस्थायी हो सकता है और भविष्य में मांग फिर से बढ़ सकती है. भारत का पर्यटन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और लंबे समय में आउटबाउंड यात्रा में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है. प्रधानमंत्री की अपील के चलते घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन ट्रैवल एजेंसियों के लिए यह कम मुनाफे वाला क्षेत्र है.
पश्चिम एशिया में तनाव के चलते एयर इंडिया ने घटाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें
एयर इंडिया ने बढ़ती ईंधन लागत और भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण अगले तीन महीनों के लिए अपनी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को निलंबित करने का फैसला लिया है. यह जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी. हालांकि, एयरलाइन ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि जुलाई तक सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें स्थगित कर दी गई हैं. कंपनी ने इन खबरों को "झूठा" और "भ्रामक" बताते हुए स्पष्ट किया कि उसकी अंतरराष्ट्रीय सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं.
क्या होती है आसमान में होने वाली 'जीपीएस जैमिंग'
एयर इंडिया ने एक्स पर जारी एक बयान में स्पष्ट किया कि उसकी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं पूरी तरह से सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं. एयरलाइन ने कहा कि विदेशी मार्गों पर सभी उड़ानों को एक साथ रद्द करने जैसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है. कंपनी ने इस तरह की खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की.
पहले के तेल संकटों से अलग है ईरान युद्ध से उपजा संकट
एयर इंडिया के सीईओ कैंबल विल्सन ने हाल ही में एक टाउनहॉल बैठक में बताया कि विमानन उद्योग इस समय कई बाहरी दबावों का सामना कर रहा है. इनमें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का बंद रहना, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण उड़ानों में व्यवधान, रुपये का कमजोर होना और जेट फ्यूल की कीमतों में 2.5 से तीन गुना तक की वृद्धि शामिल है.
ईरान के पास अब भी 70 प्रतिशत मिसाइल क्षमता बरकरार: रिपोर्ट
ईरान अभी भी अपने मोबाइल मिसाइल लॉन्चरों और मिसाइलों के बड़े हिस्से को बनाए हुए है, ऐसा हालिया अमेरिकी खुफिया आकलनों में सामने आया है. न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के पास युद्ध से पहले के लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार और मोबाइल लॉन्चर अब भी मौजूद हैं. इसके अलावा, लगभग 90 प्रतिशत भूमिगत मिसाइल भंडारण और लॉन्च सुविधाएं फिर से आंशिक या पूरी तरह चालू हो चुकी हैं, जिससे उसकी सैन्य क्षमता अभी भी काफी मजबूत मानी जा रही है.
मोबाइल से मिसाइल तक, नेविगेशन सैटेलाइट के भरोसे
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित अपने अधिकांश अहम मिसाइल ठिकानों तक दोबारा पहुंच हासिल कर ली है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. खुफिया जानकारी के अनुसार, ईरान ने ना केवल अपने ठिकानों को फिर से सक्रिय किया है, बल्कि कुछ क्षतिग्रस्त मिसाइलों की मरम्मत और नई मिसाइलों का निर्माण भी शुरू कर दिया है.
ईरान ने 4000 किलोमीटर दूर अमेरिकी अड्डे पर दागी मिसाइलें
वहीं, इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन और मीडिया के बीच मतभेद भी सामने आए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया रिपोर्टों को "फेक न्यूज" बताते हुए कहा कि ईरान की सैन्य स्थिति को मजबूत दिखाना देश के खिलाफ है. दूसरी तरफ, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह दावा खारिज किया कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी हथियार भंडार कम हो गए हैं और कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार मौजूद है.
ईंधन बचाने की अपील के बाद पीएम मोदी ने घटाया अपना काफिला: रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के घरेलू दौरों के दौरान अपने काफिले का आकार कम करने का निर्णय लिया है, जबकि विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के तहत सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं यथावत रखी गई हैं. यह जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी. सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव उनके हैदराबाद दौरे के बाद गुजरात और असम की यात्राओं के दौरान लागू किया गया.
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां संभव हो, उनके काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को शामिल किया जाए, वह भी बिना किसी नई खरीद के. यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है. यह पहल उनके नागरिकों के लिए दिए गए "सात संकल्पों" के अनुरूप है, जिनमें टिकाऊ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया गया है.
10 मई को सिकंदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के दौर में देशभक्ति का अर्थ केवल सीमा पर बलिदान देना नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में जिम्मेदार व्यवहार अपनाना भी है. उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग अपनाने, खाने के तेल की खपत घटाने तथा किसानों से रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की थी.
तमिलनाडु में सीएम विजय ने हासिल किया विश्वासमत, 144 विधायकों ने किया समर्थन
तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने बुधवार, 13 मई को बहुमत परीक्षण पास कर लिया. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बहुमत परीक्षण में विजय को 144 विधायकों का समर्थन मिला. 22 विधायकों ने उनके खिलाफ वोट किया, जबकि पांच विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. बहुमत परीक्षण से पहले डीएमके विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया और मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
एएनआई के मुताबिक, विजय की पार्टी टीवीके और गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों के पास कुल 120 विधायक थे. लेकिन बहुमत परीक्षण में विजय को कुल 144 विधायकों का साथ मिला. यह दिखाता है कि एआईएडीएमके के कई बागी विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर विजय के समर्थन में वोट दिया. विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके के 47 उम्मीदवार जीते थे, जिनमें से कई अब टीवीके का समर्थन कर रहे हैं.
विश्वासमत हासिल करने के बाद विजय ने अपनी सरकार को “आम लोगों की सरकार” बताया और “सामाजिक न्याय, बराबर अवसर और धर्मनिरपेक्षता” का भरोसा दिया. उन्होंने कहा, “यह एक ऐसी सरकार है जो जाति और धर्म की सीमाओं से परे है. यह एक ऐसी सरकार है जो भेदभाव नहीं करती…यह ऐसी सरकार है जो राजनीतिक कारणों से किसी को या किसी चीज को नुकसान नहीं पहुंचाएगी.”
ट्रंप बोले- यूक्रेन युद्ध खत्म होने के करीब, यूक्रेन ने कहा- रूस की मंशा नहीं
रूस‑यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक स्तर पर अलग‑अलग तस्वीर सामने आ रही है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि यह युद्ध अब "अंत की ओर बढ़ रहा है", जबकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच हुई बातचीत से शांति प्रक्रिया के लिए "आधार तैयार" हो चुका है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि किसी संभावित समझौते की शर्तों या समयसीमा पर अभी कुछ भी ठोस नहीं है, जिससे संकेत मिलता है कि बातचीत के बावजूद स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.
खत्म हो सकती है यूक्रेन के साथ रूस की जंग: पुतिन
युद्धविराम के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन बोले, “जीत हमेशा हमारी रही है और रहेगी"
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी पुतिन की तरह ही आशावादी रुख दिखाते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध का अंत "बहुत करीब" है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की मध्यस्थता में कई दौर की वार्ता हो चुकी है, फिर भी अब तक कोई अंतिम शांति समझौता सामने नहीं आ पाया है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि रूस का युद्ध खत्म करने का "कोई इरादा नहीं" है. उन्होंने चेतावनी दी कि यूक्रेन को नए हमलों के लिए तैयार रहना पड़ रहा है. हाल ही में अमेरिकी मध्यस्थता में हुए अल्पकालिक संघर्ष विराम के दौरान भी मोर्चे पर लड़ाई जारी रही और दोनों पक्षों ने एक‑दूसरे पर हमलों के आरोप लगाए.
वैश्विक तनाव के बीच ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजरें
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के लिए बीजिंग पहुंच रहे हैं. यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दुनिया व्यापारिक तनाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रतिस्पर्धा और ईरान युद्ध जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां हैं और उनका मानना है कि यह मुलाकात सकारात्मक रहेगी.
ताइवान के पास फिर मंडराए चीन के लड़ाकू विमान
इस दौरे में ट्रंप का मुख्य फोकस व्यापार को बढ़ावा देना है. वे चाहते हैं कि चीन अमेरिका से अधिक कृषि उत्पाद और विमान खरीदे, साथ ही दोनों देशों के बीच मतभेद सुलझाने के लिए एक “बोर्ड ऑफ ट्रेड” बनाने पर चर्चा हो सकती है. यह बातचीत पिछले साल शुरू हुए टैरिफ विवाद और उसके बाद हुए अस्थायी समझौते के बाद संबंधों को स्थिर करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है.
हालांकि, इस बैठक पर वैश्विक मुद्दों की भी छाया है. ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और ऊर्जा कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव है. इसके अलावा, ताइवान को लेकर भी दोनों देशों में मतभेद हैं, खासकर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित हथियार सौदे को लेकर.
सोने-चांदी पर सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी
भारत सरकार ने वैश्विक आर्थिक दबावों और विदेशी मुद्रा भंडार पर हुए असर के बीच सोना, चांदी और प्लेटिनम जैसे कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में बड़ा इजाफा किया है. समाचार एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले यह जानकारी दी है. नए फैसले के तहत सोना और चांदी पर कस्टम ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई है, जबकि प्लेटिनम पर यह 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी कर दी गई है.
यह बढ़ोतरी गोल्ड-डोरे, सिल्वर-डोरे, सिक्कों और अन्य संबंधित वस्तुओं पर भी लागू होगी. सरकार का कहना है कि यह कदम गैर-जरूरी आयात को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
सोने, चांदी के दामों में गिरावट अस्थायी है या बड़े क्रैश की शुरुआत?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग रूट्स में बाधा आ रही है, जिससे भारत के आयात खर्च और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार को जरूरी क्षेत्रों जैसे तेल, उर्वरक, रक्षा और तकनीकी आयात के लिए सुरक्षित रखना अहम हो गया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कीमती धातुएं मुख्य रूप से निवेश और उपभोग से जुड़ी होती हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा बाहर जाती है, लेकिन औद्योगिक तौर पर इनका योगदान सीमित है.
लगातार क्यों बढ़ रही है चांदी की कीमत
सरकार ने यह भी कहा कि यह फैसला प्रतिबंधात्मक नहीं है, बल्कि एक संतुलित कदम है जिससे मांग को नियंत्रित किया जा सके, गौरतलब है कि 2024-25 के बजट में इन धातुओं पर शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत किया गया था, लेकिन बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए अब इसे फिर बढ़ाया गया है.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है और चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील भी की थी.













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