नयी दिल्ली, 19 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की अप्राकृतिक मृत्यु के मामले में जांच की वैधता सवालों के घेरे में है क्योंकि महाराष्ट्र और बिहार की सरकारें एक दूसरे के खिलाफ राजनीतिक हस्तक्षेप के तीखे आरोप लगा रही हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों राज्यों के खिलाफ राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप जांच की साख को बट्टा लगा सकते हैं।
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न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में ‘सच के आहत होने और न्याय के पीड़ित होने’ की पूरी आशंकाएं हैं।
पीठ ने 35 पन्नों के फैसले में कहा, ‘‘कानूनी प्रक्रिया प्रामाणिक और विधिसम्मत स्वीकार्य जांच के माध्यम से सही तथ्यों के उजागर होने पर आधारित होनी चाहिए। यह पता लगाना चाहिए कि क्या अप्राकृतिक मृत्यु किसी आपराधिक कृत्य का परिणाम थी।’’
अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की याचिका पर यह फैसला आया जिन्होंने पटना में राजपूत के पिता द्वारा उनके तथा छह अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को मुंबई स्थानांतरित करने की मांग की थी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि राजपूत के पिता और बिहार सरकार ने आरोप लगाया है कि मुंबई पुलिस राजनीतिक दबाव में वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं महाराष्ट्र सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पटना पुलिस को अपराध के मामले में जांच करने का अधिकार नहीं है क्योंकि घटना मुंबई में घटी।
न्यायमूर्ति रॉय ने फैसले में कहा कि जांच की प्रामाणिकता और उसके परिणाम के लिए यह स्पष्ट करना अपेक्षित होगा कि कौन से प्राधिकार को इस मामले में जांच करनी चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘पहले भी जैसा कहा गया कि चूंकि दोनों राज्य एक दूसरे के खिलाफ राजनीतिक हस्तक्षेप के तीखे आरोप लगा रहे हैं, इसलिए जांच की वैधता सवालों के घेरे में है।’’
उच्चतम न्यायालय ने राजपूत की मृत्यु के सिलसिले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में चल रही सीबीआई जांच को मंजूरी प्रदान करते हुए कहा कि इस मामले में दर्ज किसी भी अन्य प्रकरण की जांच भी यही एजेंसी करेगी।
शीर्ष अदालत ने सीबीआई की जांच को विधिसम्मत बताते हुये कहा कि ‘‘समय की मांग’’ एक निष्पक्ष, सक्षम और स्वतंत्र जांच की है। न्यायालय ने यह भी कहा कि सीबीआई को जांच सौंपने की सहमति देने में बिहार सरकार पूरी तरह सक्षम थी।
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