10 मार्च की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- 'तेल की आपूर्ति रोकी तो 20 गुना ताकत से होगा प्रहार': ट्रंप

- कांग्रेस सांसद बोले, सदन के ठीक से चलने पर पेश करेंगे अविश्वास प्रस्ताव

- किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले हिस्से को लेकर एनसीईआरटी ने मांगी माफी

- पुरुष क्रिकेट टीम को 131 करोड़ रुपये का इनाम देगी बीसीसीआई

- अमेरिका ने कहा, अपहरण जैसी "आतंकवादी रणनीतियों" का इस्तेमाल करता है तालिबान

- छह साल बाद चीन और उत्तर कोरिया के बीच फिर दौड़ेगी पैसेंजर ट्रेन

- ईरान युद्ध में अब तक कितने लोगों की हुई मौत

- जर्मनी: जनवरी में निर्यात में दर्ज की गई 2.3 फीसदी की गिरावट

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों के लिए मुआवजा नीति तैयार करें

- भारत सरकार ने दिया घरेलू गैस की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा

- जर्मनी में हर आठ में से एक व्यक्ति भेदभाव का शिकार: रिपोर्ट

पीयूष गोयल बोले, भारत का कृषि और खाद्य निर्यात पांच लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत का कृषि और खाद्य निर्यात पांच लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि भारत के किसान और मछुआरे इसे गति दे रहे हैं. उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि भारत अब कृषि उत्पादों का विश्व का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक है.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों में किसानों और मछुआरों के हितों की रक्षा की जा रही है और उनके लिए नए अवसर खोले जा रहे हैं. उन्होंने कहा, डेयरी से लेकर जीएम उत्पादों तक, भारत ने किसी भी समझौते में अपने किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया है.

गोयल ने यह भी कहा कि किसी भी समझौते के तहत, चीनी के आयात पर टैरिफ में छूट नहीं दी जाएगी. उन्होंने राजधानी दिल्ली में आयोजित 'आहार - द इंटरनेशनल फूड एंड हॉस्पिटैलिटी फेयर' के 40वें संस्करण के उद्घाटन समारोह में यह बातें कहीं. उन्होंने कहा कि सरकार का विजन भारत को 'दुनिया की फूड बास्केट' बनाने का है.

"आज ईरान पर होगा सबसे बड़ा हमला": अमेरिकी रक्षा मंत्री

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की है कि ईरान पर युद्ध शुरू होने के 10 दिन बाद, अमेरिका मंगलवार को अब तक की सबसे बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और बमवर्षक भेजने जा रहा है. उन्होंने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान के अंदर हमलों के लिहाज से मंगलवार का दिन, अब तक का सबसे भीषण दिन साबित होने वाला है.

अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने बताया कि इन भारी हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइलों और उसके रक्षा औद्योगिक आधार को पूरी तरह से नष्ट करना है. उन्होंने प्रेस वार्ता में यह भी दावा किया कि इस युद्ध में ईरान बिल्कुल अकेला पड़ गया है और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसके कारण वह युद्ध में बुरी तरह से पिछड़ रहा है.

हेगसेथ ने तेहरान पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान मिसाइल लॉन्च साइट्स के रूप में स्कूलों और अस्पतालों जैसी नागरिक सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहा है. इसके साथ ही, रक्षा मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि अमेरिकी हमलों के प्रभाव के कारण पिछले 24 घंटों में ईरान द्वारा दागी गई जवाबी मिसाइलों की संख्या युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं.

जयपुर में नष्ट किए गए अमूल के 1.50 लाख किलोग्राम वजन के उत्पाद

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने भारत के सबसे मशहूर डेयरी ब्रांड अमूल के 1.50 लाख किलोग्राम वजन के उत्पादों को नष्ट कर दिया है. यह बड़ी कार्रवाई राजस्थान के जयपुर शहर में एक खाद्य सुरक्षा छापे के बाद की गई. जांच में पाया गया कि ये सभी उत्पाद अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुके थे और एक स्थानीय कंपनी कथित तौर पर इनकी एक्सपायरी डेट बदलकर इन्हें बाजार में बेचने की तैयारी कर रही थी.

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राजस्थान के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि भारी मुनाफा कमाने के लालच में इन उत्पादों पर से पुरानी एक्सपायरी डेट मिटाई जा रही थी और उनके स्थान पर नई तारीखें छापी जा रही थीं. इतनी भारी मात्रा में पकड़े गए इस अमान्य और खतरनाक खाद्य सामग्री को पूरी तरह से नष्ट करने में एफएसएसएआई की टीम को पूरे चार दिन का समय लगा.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नष्ट किए गए इन उत्पादों में अमूल ब्रांड के गैर-डेयरी उत्पाद शामिल थे. अधिकारियों ने बताया कि छापे के दौरान मौके से लगभग 12,000 कार्टन बरामद किए गए, जिनमें एक्सपायर हो चुके नूडल्स, सॉस और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी चीजें भरी हुई थीं. इस कार्रवाई ने बाजार में उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ी चिंताएं खड़ी कर दी हैं.

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लेबनान में एक दिन में एक लाख लोगों ने छोड़ा देश: यूएन

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के अनुसार, इस महीने ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के युद्ध की चपेट में लेबनान के आने के बाद से वहां के नागरिकों का जीवन बड़े पैमाने पर अस्त-व्यस्त हो गया है और उन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए यूएनएचसीआर ने बताया कि अब तक 6.67 लाख से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से एक लाख लोग तो महज एक ही दिन में विस्थापित हुए हैं.

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लेबनान में विस्थापित हुए इन लाखों लोगों में से केवल 1.20 लाख लोगों को ही सरकार द्वारा बनाए गए आश्रय स्थलों में जगह मिल पाई है, जबकि बहुत बड़ी आबादी अभी भी बिना छत के रहने को मजबूर है. लेबनान में यूएनएचसीआर की प्रतिनिधि कैरोलिना लिंडहोम बिलिंग ने जमीनी हालात बताते हुए कहा कि बहुत से लोग अपने रिश्तेदारों या दोस्तों के यहां रह रहे हैं या अभी भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं. हालात इतने खराब हैं कि सड़कों के किनारे खड़ी कारों में और यहां तक कि फुटपाथों पर भी लोग रात गुजारते हुए देखे जा सकते हैं.

लेबनान इस भीषण युद्ध में इस महीने मुख्य रूप से तब खिंच गया, जब वहां सक्रिय ईरान समर्थित आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह ने तेहरान के समर्थन में पड़ोसी देश इस्राएल पर रॉकेट और ड्रोन दागने शुरू कर दिए. हिजबुल्लाह की इस कार्रवाई के सीधे जवाब में इस्राएल ने पूरे लेबनान में भारी बमबारी शुरू कर दी, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में बड़े पैमाने पर विस्थापन देखने को मिल रहा है.

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इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने दिया इस्तीफा

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स ने तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. एयरलाइन ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजे गए पत्र में बताया है कि प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया "अस्थायी रूप से कंपनी के मामलों का प्रबंधन संभालेंगे". एयरलाइन ने जल्द ही नए सीईओ की नियुक्ति की उम्मीद जताई है.

पीटर एल्बर्स का इस्तीफा पिछले साल दिसंबर में हुए उड़ान संकट के कुछ महीनों बाद आया है. दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की हजारों उड़ानें रद्द हो गई थीं क्योंकि एयरलाइन ने नए नियमों के हिसाब से क्रू मेंबरों की व्यवस्था नहीं की थी. इसके चलते लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था. इस संकट का एयरलाइन की छवि पर बेहद नकारात्मक असर पड़ा था.

इस साल जनवरी में भारत के उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन पर करीब 24.5 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया था. इसके अलावा, एयरलाइन को यात्रियों को भी करोड़ों रुपये का मुआवजा देना पड़ा था. फिलहाल, इंडिगो रोजाना 2,200 से ज्यादा उड़ानों का संचालन करती है. यह 95 घरेलू और 40 अंतरराष्ट्रीय मंजिलों को कवर करती है. इसके पास 400 से ज्यादा विमानों का बेड़ा है.

ऑस्ट्रेलिया ने पांच ईरानी फुटबॉल खिलाड़ियों को अपने यहां शरण दी

ऑस्ट्रेलिया ने ईरानी महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को अपने यहां शरण दी है. 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही यह टीम वुमन एशिया कप में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया आ गई थी. बीते सप्ताहांत को ईरानी टीम इस टूर्नामेंट से बाहर हो गई. इसके बाद टीम की 26 खिलाड़ियों की वतन वापसी तय हो गई थी.

हालांकि, ईरानी टीम ने अपने शुरुआती मैच से पहले ईरान का राष्ट्रगान नहीं गाया था. ऐसे में आशंका जताई जा रही थी कि ईरान लौटने पर खिलाड़ियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए यह मांग उठने लगी कि इन खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में ही शरण दे दी जाए. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी इस मांग का समर्थन किया.

मंगलवार सुबह, पांच खिलाड़ियों द्वारा शरण का आवेदन करने के बाद, पुलिस उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर ले गई. वहां ऑस्ट्रेलिया के गृहमंत्री टोनी बुर्के ने उनसे मुलाकात की और खिलाड़ियों के मानवीय वीजा की प्रक्रिया पूरी की गई. टोनी बुर्के ने कहा कि टीम की सभी खिलाड़ियों को शरण का प्रस्ताव दिया गया था. टीम की बाकी खिलाड़ियों के ईरान लौटने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

जर्मनी में डूबने की घटनाओं में मामूली कमी आई

जर्मन लाइफ सेविंग एसोसिएशन (डीएलआरजी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में साल 2025 में डूबने की घटनाओं में थोड़ी कमी देखी गई है. पिछले साल कुल 393 लोगों की डूबने से मौत हुई, जो 2024 की तुलना में 18 कम है. हालांकि, इस गिरावट के बावजूद एक बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है कि युवाओं की मौतों में वृद्धि हुई है. 11 से 20 वर्ष की आयु के बीच कुल 73 लोगों की जान गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 अधिक है.

डीएलआरजी की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इन जानलेवा दुर्घटनाओं में मरने वालों में लगभग 82 फीसदी पुरुष थे. इनमें से आधे से अधिक मौतें मई से अगस्त के अंत तक चलने वाले तैराकी के मौसम के दौरान दर्ज की गईं. डीएलआरजी की अध्यक्ष उटे वोग्ट ने इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर छुट्टियों के दौरान भी इतनी ही तेज धूप और गर्मी बनी रहती, तो संभवतः पीड़ितों की संख्या में और अधिक वृद्धि देखने को मिलती.

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आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक जानलेवा दुर्घटनाएं उन भीतरी जल स्रोतों में हुईं, जहां आम जनता की आसानी से पहुंच होती है. खुले पानी के इन स्रोतों में झीलों और तालाबों में डूबने से 158 लोगों की मौत हुई, जबकि नदियों में 153 लोगों ने अपनी जान गंवाई. यह आंकड़े प्राकृतिक जल स्रोतों में तैराकी के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सख्त आवश्यकता को रेखांकित करते हैं.

जर्मनी में हर आठ में से एक व्यक्ति भेदभाव का शिकार: रिपोर्ट

जर्मन सेंटर फॉर इंटीग्रेशन एंड माइग्रेशन रिसर्च के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि जर्मनी में रहने वाला हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी रूप में भेदभाव का शिकार हुआ है. साल 2022 के 'सोशियो-इकोनॉमिक पैनल' (जिसमें लगभग 30,000 लोग भाग लेते हैं) के प्रतिनिधि डेटा पर आधारित यह सर्वे बताता है कि एक साल के भीतर 13 फीसदी लोगों ने इसका अनुभव किया है.

अगर इसे पूरी जर्मन आबादी के पैमाने पर देखा जाए, तो यह आंकड़ा लगभग 1.1 करोड़ लोगों तक पहुंचता है. लोगों ने मुख्य रूप से काम की जगह पर, घर ढूंढते समय या लोन के लिए आवेदन करते समय इस भेदभाव का सामना किया है.

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अध्ययन के अनुसार, जर्मनी में प्रवासन पृष्ठभूमि वाले लोग, महिलाएं और विकलांग व्यक्ति भेदभाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. सर्वे में शामिल 40 फीसदी से अधिक लोगों ने अपने 'जातीय मूल' को भेदभाव का संभावित कारण बताया है. इसके अलावा, लगभग एक चौथाई लोगों ने अपने बाहरी रंग-रूप को इसका कारण माना, जिसके बाद लिंग और सामाजिक स्थिति का नंबर आता है. आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि गैर-मुस्लिमों की तुलना में मुसलमानों ने तीन गुना अधिक भेदभाव की सूचना दी है.

इस अध्ययन ने भेदभाव के कारण होने वाले व्यापक स्वास्थ्य और मानसिक परिणामों को भी उजागर किया है. जो लोग भेदभाव का सामना करते हैं, उनमें चिंता, उदासी या अकेलापन महसूस करने की संभावना लगभग दोगुनी होती है. इन गंभीर आंकड़ों को देखते हुए जर्मनी की एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कमिश्नर फेरदा अतामन ने जोर देकर कहा है कि अब भेदभाव के खिलाफ अधिक निर्णायक रुख अपनाने की सख्त जरूरत है.

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100 से ज्यादा यूरोपीय कंपनियों ने 'कार्बन मार्केट' के समर्थन की अपील की

100 से अधिक यूरोपीय कंपनियों ने यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं से आगामी शिखर सम्मेलन में कार्बन-प्राइसिंग योजना, यानी 'ईयू एमिशन्स ट्रेडिंग सिस्टम' (ईयू ईटीएस) का मजबूती से समर्थन करने का आग्रह किया है. साल्जगिटर, वोल्वो कार्स, वाटेनफॉल और ईडीएफ जैसी प्रमुख कंपनियों व निवेशकों द्वारा हस्ताक्षर किए गए एक पत्र में कहा गया है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में यूरोप की सुरक्षा और संप्रभुता एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करती है. व्यवसायों का मानना है कि इसके लिए अस्थिर जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करके स्वच्छ ऊर्जा, उच्च शिक्षित कार्यबल और नवाचार की ओर कदम बढ़ाना बेहद आवश्यक है.

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ईटीएस के तहत बिजली उत्पादन, औद्योगिक विनिर्माण और विमानन जैसे क्षेत्रों की कंपनियों को अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए 'भत्ते' खरीदने पड़ते हैं. यह प्रणाली वर्तमान में यूरोपीय संघ के कुल उत्सर्जन का लगभग 40 फीसदी कवर करती है. हालांकि, यूरोप का उद्योग जगत फिलहाल काफी उच्च ऊर्जा कीमतों से जूझ रहा है. इसी वजह से कुछ यूरोपीय देश यह तर्क दे रहे हैं कि महंगी ऊर्जा के साथ-साथ इन उत्सर्जन प्रमाणपत्रों की बढ़ती लागत औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन गई है.

20 साल से भी ज्यादा पुरानी यह प्रणाली न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है, बल्कि यूरोप के लिए एक 'प्रतिस्पर्धा इंजन' के रूप में भी काम करती है. इसे कमजोर करने से निवेश की निश्चितता खत्म होगी और यूरोप के औद्योगिक भविष्य को भारी नुकसान पहुंचेगा. कंपनियों का सुझाव है कि ईटीएस से प्राप्त राजस्व का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में उत्सर्जन को और अधिक कम करने के लिए किया जाना चाहिए.

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भारत सरकार ने दिया घरेलू गैस की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है. भारत को होने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी इसके चलते प्रभावित हुई है. ऐसे में घरेलू ऊर्जा बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने रिफाइनरियों को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का अधिकतम उत्पादन करने के लिए कहा है.

सरकार ने एक प्राथमिकता सूची भी जारी की है, जिसके हिसाब से विभिन्न क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी. इसके तहत, घरेलू इस्तेमाल के लिए रसोई गैस और वाहनों के लिए सीएनजी की पूरी आपूर्ति जारी रहेगी. अन्य क्षेत्रों को उनके पिछले छह महीने के औसत उपयोग के आधार पर गैस दी जाएगी. जैसे, उर्वरक बनाने वाली फैक्ट्रियों को उनकी औसत खपत की 70 फीसदी गैस मिलेगी.

भारत के कई शहरों में होटल और रेस्तरां भी एलपीजी की कमी से जूझ रहे हैं. सरकार ने कहा है कि रेस्तरां, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों के लिए, पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक समिति बनाई है, जो उनकी जरूरतों को समझेगी और उन्हें कुछ मात्रा में आपूर्ति करने का प्रयास करेगी. इसके अलावा, सरकार ने दो एलपीजी सिलेंडर बुक करने के बीच में 25 दिन का अंतर होना जरूरी कर दिया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी न हो.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों के लिए मुआवजा नीति तैयार करें

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह कोविड वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभावों से पीड़ित लोगों को मुआवजा देने के लिए एक नीति बनाए. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह भी कहा कि इस मुआवजा नीति को लाने का मतलब यह नहीं होगा कि इस मामले में सरकार गलत थी और अब वह अपनी गलती मान रही है.

कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने रचना गंगू और वेणुगोपाल गोविंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इन्होंने याचिका में आरोप लगाया था कि कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों के चलते इनकी दो बेटियों की मौत हो गई. इनकी मांग थी कि मौतों की स्वतंत्र समिति द्वारा जांच की जाए और माता-पिता को मुआवजा दिया जाए.

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों की जांच के लिए एक नई विशेषज्ञ समिति गठित करने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा, “टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए मौजूदा तंत्र जारी रहेगा और संबंधित डेटा को समय-समय पर सार्वजनिक डोमेन में रखा जा सकता है.”

जर्मनी: जनवरी में निर्यात में दर्ज की गई 2.3 फीसदी की गिरावट

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जर्मन निर्यातकों के लिए साल 2026 की शुरुआत काफी धीमी रही है. संघीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, जनवरी में दुनिया भर में 130.5 अरब यूरो का जर्मन माल बेचा गया. यह पिछले महीने (दिसंबर) के मजबूत प्रदर्शन की तुलना में 2.3 फीसदी की गिरावट है. हालांकि, अगर पिछले साल के इसी महीने से तुलना की जाए, तो निर्यात में 0.6 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है.

इसके अलावा, जनवरी में जर्मनी में 109.2 अरब यूरो का माल आयात किया गया, जो दिसंबर से 5.9 फीसदी और एक साल पहले की तुलना में 4 फीसदी कम है. आंकड़ों से पता चलता है कि यूरोप के साथ जर्मनी के व्यापार में उल्लेखनीय गिरावट आई है. यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों में होने वाला निर्यात दिसंबर की तुलना में 4.8 फीसदी घटकर 71.6 अरब यूरो रह गया.

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सबसे बड़ा झटका चीन के साथ व्यापार में लगा है, जहां निर्यात लगभग 13 फीसदी गिरकर 6.3 अरब यूरो पर आ गया. इसके विपरीत, जर्मन कंपनियों ने अपने सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजार, अमेरिका में शानदार वृद्धि हासिल की. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में चल रहे टैरिफ विवादों के बावजूद, अमेरिका को होने वाले निर्यात में 11.7 फीसदी का भारी उछाल आया और यह 13.2 अरब यूरो तक पहुंच गया.

हाल ही में म्यूनिख स्थित इफो इंस्टीट्यूट ने जर्मन निर्यात में सुधार की उम्मीद जताई थी. विदेशी व्यापार संघ (बीजीए) को भी इस साल निर्यात में 0.6 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है. हालांकि, मध्य पूर्व में चल रहे मौजूदा युद्ध के कारण जर्मन अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. इस युद्ध के परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे माल का परिवहन काफी महंगा हो रहा है. चूंकि जर्मनी मुख्य रूप से एक निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था है, इसलिए परिवहन लागत में इस भारी वृद्धि का देश के व्यापार पर असर पड़ने की संभावना है.

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फिनलैंड और स्वीडन के बीच पावर केबल में अचानक आई खराबी

फिनलैंड के नेशनल ग्रिड ऑपरेटर ने मंगलवार सुबह फिनलैंड और स्वीडन के बीच एक महत्वपूर्ण पावर केबल में अप्रत्याशित खराबी की सूचना दी है. इस खराबी ने मुख्य रूप से 'फेनो-स्कान 2' को प्रभावित किया है, जो इन दोनों नॉर्डिक देशों को आपस में जोड़ने वाली 800 मेगावाट क्षमता की एक हाई-वोल्टेज सबमरीन केबल है.

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इस घटना के बाद ग्रिड ऑपरेटर फिनग्रिड के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह खराबी संभवतः एक सब स्टेशन में हुई तकनीकी समस्या के कारण आई थी और समुद्र के नीचे बिछी मुख्य केबल पूरी तरह से सुरक्षित है. स्वीडन के नेशनल ग्रिड ऑपरेटर स्वेन्स्का क्राफ्टनाट ने शुरुआत में अनुमान लगाया था कि यह केबल लगभग 18 घंटे तक ऑफलाइन रह सकती है. हालांकि, बाद में एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया कि केबल के जल्द ही वापस सही होने की उम्मीद है.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से बाल्टिक सागर क्षेत्र हाई अलर्ट पर है. पिछले कुछ वर्षों में यहां कई पावर और टेलीकम्युनिकेशन केबलों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है, जिसके कारण पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने संभावित तोड़फोड़ की जांच भी शुरू कर दी है. पिछले महीने ही, फिनलैंड के अधिकारियों ने एक मालवाहक जहाज पर सवार दो लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन पर हेलसिंकी और एस्टोनिया के बीच एक अन्य समुद्री केबल को नुकसान पहुंचाने का संदेह था.

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ईरान युद्ध में अब तक कितने लोगों की हुई मौत

अमेरिका और इस्राएल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से मध्य पूर्व में संघर्ष काफी तेज हो गया है. इस युद्ध में अब तक कई देशों के नागरिक और सैनिक मारे जा चुके हैं. 9 मार्च तक के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, इस युद्ध में अब तक 1,870 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इस संघर्ष में लेबनान और वे खाड़ी देश भी तेजी से खिंचते चले गए हैं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.

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इस युद्ध में सबसे अधिक जनहानि ईरान में हुई है, जहां कम से कम 1,334 मौतें दर्ज की गई हैं. इनमें 1,230 मौतें रेड क्रिसेंट सोसाइटी द्वारा बताई गई हैं, जिसमें एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए मिसाइल हमले में 175 स्कूली छात्राओं और कर्मचारियों की मौत शामिल है. इसके अलावा, ईरान के 104 सैन्यकर्मी एक युद्धपोत के डूबने से मारे गए. वहीं, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राएली हमलों में अब तक 480 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

ईरान और लेबनान के अलावा क्षेत्र के कई अन्य देशों ने भी मौतों की पुष्टि की है. इराक में ईरान समर्थित गुटों के कमांडर सहित 15 लोग मारे गए हैं. इस्राएल में 13 मौतें हुई हैं (दो सैनिक और 11 नागरिक), जबकि अमेरिका के 7 सैन्यकर्मी इस संघर्ष में मारे गए हैं. इसके अतिरिक्त, कुवैत में छह (सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों सहित), सीरिया में चार, संयुक्त अरब अमीरात में चार, सऊदी अरब में दो, बहरीन में दो और ओमान में एक व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है.

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छह साल बाद चीन और उत्तर कोरिया के बीच फिर दौड़ेगी पैसेंजर ट्रेन

कोविड-19 महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों के छह साल बाद, चीन और उत्तर कोरिया के बीच यात्री ट्रेन सेवा इस गुरुवार से फिर से शुरू होने जा रही है. ट्रैवल ऑपरेटरों ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि साल 2020 में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए इस सेवा को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया था. अब इतने लंबे अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच रेलवे ट्रैक पर फिर से आधिकारिक आवाजाही शुरू होने वाली है.

बीजिंग और डैनडोंग में आधिकारिक टिकटिंग बूथों के ट्रैवल एजेंटों के अनुसार, यह ट्रेन सेवा फिलहाल केवल उन चीनी नागरिकों के लिए होगी जो उत्तर कोरिया में काम कर रहे हैं या पढ़ाई कर रहे हैं. इसके अलावा, विदेश में काम करने वाले, पढ़ने वाले और परिवार से मिलने वाले उत्तर कोरियाई नागरिक भी इसका लाभ उठा सकेंगे. हालांकि, आम पर्यटकों को अभी टिकट खरीदने की अनुमति नहीं होगी.

जहां चीन के साथ ट्रेन सेवा अब बहाल हो रही है, वहीं उत्तर कोरिया और रूस के बीच पिछले साल ही सीधी उड़ानें और ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू हो गई थीं. यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद से रूस और उत्तर कोरिया कूटनीतिक रूप से एक-दूसरे के काफी करीब आए हैं, जिसका असर इस क्षेत्र के कूटनीतिक और यात्रा समीकरणों पर भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है.