LIVE: 9 मार्च की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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- तेल के दाम बढ़ने से भारतीय तेल कंपनियों के शेयर गिरे

- लेबनान में इस्राएली सेना पर लगा 'सफेद फॉस्फोरस' के इस्तेमाल का आरोप

- नेपाल में बालेन शाह की पार्टी ने 120 से अधिक सीटें जीतीं

- जयशंकर बोले, ईरानी जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर खड़े होने की अनुमति देना "सही कदम था"

- कोच गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को बताया “स्पेशल प्लेयर”

अमेरिका ने गैर-जरूरी राजनयिकों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया

अमेरिका के विदेश विभाग ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए अपने गैर-जरूरी राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है. रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को जारी एक एडवाइजरी में बताया कि 8 मार्च को यह फैसला लिया गया है. इससे पहले भी विभाग ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच इस क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक देशों में मौजूद अपने नागरिकों को सुरक्षा कारणों से तुरंत वह जगह छोड़ने की सलाह दी थी.

यह फैसला फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए सीधे संघर्ष के बाद आया है. अमेरिकी दूतावास ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि 28 फरवरी के बाद से ईरान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों का लगातार खतरा बना हुआ है, जिसके कारण वाणिज्यिक उड़ानों में भी भारी बाधाएं आ रही हैं. दूतावास ने यह भी चेतावनी दी है कि इन सुरक्षा जोखिमों के कारण अमेरिकी सरकार के पास सऊदी अरब में अपने नागरिकों को आपातकालीन सेवाएं देने की क्षमता अब बेहद सीमित रह गई है.

अमेरिका और इस्राएल के सैन्य हमलों के जवाब में, ईरान पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से पूरे मध्य पूर्व में लगातार पलटवार कर रहा है. इन हमलों में न केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों को, बल्कि हवाई अड्डों और आवासीय इमारतों जैसे नागरिक ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. रिपोर्टों के अनुसार, लगभग एक दर्जन अरब देशों में हमलों की सूचना है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देश सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं और वहां हमलों की संख्या विशेष रूप से अधिक दर्ज की गई है.

कोच गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को बताया “स्पेशल प्लेयर”

भारत की पुरुष क्रिकेट टीम ने रविवार, 8 मार्च को तीसरी बार टी-20 विश्वकप का खिताब जीता. इस टूर्नामेंट के निर्णायक मैचों में विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अहम भूमिका निभाई. जहां विश्व कप के शुरुआती मैचों में टीम में संजू की जगह पक्की नहीं थी, वहीं आखिरी तीन मैचों में उन्होंने हर बार 85 से अधिक रन बनाए और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया.

विश्वकप से पहले न्यूजीलैंड के साथ हुई पांच टी-20 मैचों की सीरीज में संजू ने मात्र 46 रन बनाए थे. संजू ने कहा, “न्यूजीलैंड सीरीज के बाद, मैं टूट गया था…ऐसा लगा जैसे मेरे सपने बिखर गए हों, मैं और क्या कर सकता था.” विश्वकप के दो शुरुआती मैचों में भी संजू 22 और 24 रन ही बना पाए. हालांकि, इसके बाद के तीन मैचों में उन्होंने 97, 89 और 89 रन बनाए.

फाइनल मुकाबले में जीत के बाद संजू ने कहा कि भगवान की कुछ और ही योजना थी. उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीनों से वे सचिन तेंदुलकर के लगातार संपर्क में बने हुए थे और उनसे बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा, “उनके जैसे किसी से गाइडेंस मिलना, और मैं क्या मांग सकता हूं.”

टीम के कोच गौतम गंभीर ने भी संजू की तारीफ की और उन्हें एक स्पेशल प्लेयर बताया. गंभीर ने कहा कि संजू को अबतक जो कुछ मिला है, वे उससे कहीं ज्यादा के हकदार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संजू की प्रतिभा पर कभी कोई शक नहीं था. उन्होंने कहा, “संजू ने दिखा दिया है कि जब आप खुद पर विश्वास करना शुरू करते हैं तो आपके लिए उसके सिवाय कुछ मायने नहीं रखता.”

लेबनान में इस्राएली सेना पर लगा 'सफेद फॉस्फोरस' के इस्तेमाल का आरोप

मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में इस्राएली सेना पर दक्षिणी लेबनान के योहमोर में "गैरकानूनी" रूप से सफेद फॉस्फोरस वाले गोले दागने का गंभीर आरोप लगाया है. सात तस्वीरों की जांच और जियोलोकेशन के जरिए एचआरडब्ल्यू ने बताया कि इस्राएल ने रिहायशी इलाकों में इस विवादित ज्वलनशील हथियार का इस्तेमाल किया.

घनी आबादी वाले इलाकों में सफेद फॉस्फोरस जैसे खतरनाक रसायन का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है. यह रसायन न केवल इमारतों में भीषण आग लगा सकता है, बल्कि इंसानी शरीर की त्वचा को हड्डियों तक जला सकता है. इसके संपर्क में आने वाले लोगों को छोटे घाव होने पर भी गंभीर संक्रमण, सांस रोग या अंगों के फेल होने का भारी जोखिम रहता है.

इस्राएली सेना ने इस रिपोर्ट पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि, इस्राएल हमेशा यह तर्क देता रहा है कि वह सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल नागरिकों को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में केवल 'स्मोक स्क्रीन' बनाने के लिए करता है.

दूसरी ओर, ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों का कहना है कि एक साल से अधिक समय पहले हिजबुल्लाह के साथ हुए पिछले युद्ध में भी इस्राएल ने दक्षिणी लेबनान में कई मौकों पर इसका इस्तेमाल किया था, वह भी तब जब वहां नागरिक मौजूद थे.

ईरान में नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति के बाद इस्राएल का बड़ा हवाई हमला

इस्राएल की सेना ने मध्य ईरान में कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. इस्राएली सेना ने सोमवार को बताया कि उसने मध्य ईरान में कई रणनीतिक और महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं. इन ठिकानों में आंतरिक सुरक्षा कमान केंद्र और मिसाइल लॉन्च साइटें शामिल हैं. यह कार्रवाई रविवार देर रात ईरान (इस्लामिक गणराज्य) द्वारा मोजतबा खमेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किए जाने के बाद की गई हैं.

इस्राएली वायुसेना के एक बयान के अनुसार, "इस्राएली वायु सेना ने ईरानी शासन से जुड़े बुनियादी ढांचों पर हमलों की एक और लहर पूरी कर ली है." इस हमले के मुख्य निशानों में एक रॉकेट इंजन उत्पादन सुविधा और कई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइटें शामिल थीं, जिनसे इस्राएल को खतरा था. इस्राएली सेना का कहना है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन की सैन्य क्षमताओं और उसकी नींव को गहरा नुकसान पहुंचाना है.

मिसाइल साइटों के अलावा, ईरान के मध्य शहर इस्फहान में आंतरिक सुरक्षा मुख्यालय, एक पुलिस मुख्यालय और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और अर्धसैनिक बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.

जयशंकर बोले, ईरानी जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर खड़े होने की अनुमति देना "सही कदम था"

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार, 9 मार्च को संसद में ईरान युद्ध को लेकर बयान दिया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर खड़ा करने की अनुमति मांगी थी और 1 मार्च को यह अनुमति दे दी गई थी. जयशंकर ने कहा कि सरकार का मानना है कि यह “सही कदम” था.

उन्होंने आगे बताया कि इनमें से एक जहाज 4 मार्च को कोच्चि पहुंच गया और इसके क्रू मेंबर भारतीय नौसेना के परिसर में चले गए. दूसरा जहाज अमेरिकी पनडुब्बी के हमले का शिकार हुआ और डूब गया. श्रीलंका ने इस हमले के बाद 32 ईरानी नौसैनिकों को बचाया और 87 शव बरामद किए. वहीं, तीसरे ईरानी जहाज को श्रीलंका ने अपने यहां शरण दी.

जयशंकर ने बताया कि ईरान युद्ध के दौरान, मर्चेंट नेवी में काम करने वाले दो भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जबकि एक लापता है. उन्होंने कहा कि जारी संघर्ष भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं, जबकि कुछ हजार भारतीय पढ़ाई और रोजगार के लिए ईरान में भी हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा, “हमारा अब भी यही मानना ​​है कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लिया जाना चाहिए.”

कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के पार, भारतीय तेल कंपनियों के शेयर गिरे

अमेरिका, इस्राएल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते, कच्चे तेल के दाम चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं. सोमवार, 9 मार्च को कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड के दाम करीब 26 फीसदी बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए. हालांकि, बाद में कीमतों में थोड़ी कमी आई.

तेल की कीमत बढ़ने की मुख्य वजह ईरान युद्ध है, जो अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. इस युद्ध ने उन खाड़ी देशों को अपनी चपेट में ले लिया है, जो तेल और गैस के उत्पादन एवं परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं. ईरानी हमलों की धमकियों के चलते, होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हो गई है. अनुमान है कि दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है.

तेल की कीमतें बढ़ने के चलते, भारतीय तेल कंपनियों के शेयरों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई. सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के शेयर 6.6 फीसदी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 7.5 फीसदी और भारत पेट्रोलियम के शेयर 7.1 फीसदी गिर गए. भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई. दोपहर करीब 12 बजे सेंसेक्स करीब 1,700 पॉइंट और निफ्टी 50 करीब 550 पॉइंट नीचे कारोबार कर रहा था.

ईरान युद्ध: अयातुल्लाह अली खमेनेई के बेटे मोजतबा बने सर्वोच्च नेता

ईरानी स्टेट मीडिया के अनुसार, ईरान ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई के बेटे मोजतबा खमेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है. मोजतबा को एक कट्टरपंथी नेता माना जाता है और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वह अपने पिता से भी ज्यादा चरमपंथी विचारों वाले हैं. ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने उन्हें इस शीर्ष पद के लिए चुना है और देश की जनता से अपील की है कि वे नए चुने गए नेता के समर्थन में खड़े हों और देश में एकता बनाए रखें.

इस नियुक्ति पर अमेरिका की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पहले ही खमेनेई के बेटे की नियुक्ति को "अस्वीकार्य" करार दिया था. अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, "वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं. खमेनेई का बेटा एक हल्का नेता है." उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान के नए नेता की नियुक्ति अमेरिका की सहमति या समन्वय के बिना की गई है, तो वह ज्यादा दिन तक टिकने वाला नहीं है.

ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) ने नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई के प्रति अपनी पूरी वफादारी का संकल्प लिया है. आईआरजीसी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वे मोजतबा के हर आदेश का पालन करेंगे, जिनके पिता अली खमेनेई हाल ही में ईरान में शुरू हुए संयुक्त अमेरिका-इस्राएल युद्ध की शुरुआत में एक इस्राएली हवाई हमले में मारे गए थे.