30 अप्रैल की बड़ी खबरें और अपडेट्स
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डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के बाद तेल की कीमत 4 साल के उच्चस्तर पर
ट्रंप को धमकाने के आरोपों में एफबीआई के पूर्व निदेशक अदालत में पेश हुए
ऑपरेशन सिंदूर अपनी शर्तों पर रोका, जरूरत पड़ती, तो लंबी लड़ाई के लिए भी तैयार थे: राजनाथ सिंह
प्रेस की आजादी 25 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर
रेप से गर्भवती होने पर डिलीवरी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
रेप से गर्भवती होने पर डिलीवरी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने सुप्रीम कोर्ट में एक क्यूरेटिव याचिका दायर कर उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 15 साल की नाबालिग लड़की को 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी गई थी. एम्स का कहना है कि गर्भावस्था के इतने उन्नत चरण में गर्भपात कराना नाबालिग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक रूप से हानिकारक साबित हो सकता है.
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इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के माता‑पिता को गर्भपात से जुड़े चिकित्सा और भावनात्मक पहलुओं पर सलाह दे. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अंतिम निर्णय पीड़ित व्यक्ति की सहमति और समझ पर आधारित होना चाहिए, ताकि निर्णय पूरी तरह जानकारी पर आधारित हो.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह बच्ची से बलात्कार का मामला है और अगर गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो पीड़िता को जीवनभर का मानसिक आघात और पीड़ा झेलनी पड़ सकती है. बेंच ने यह भी कहा कि अगर मां को किसी तरह की स्थायी विकलांगता का खतरा नहीं है, तो गर्भ समापन की प्रक्रिया की जानी चाहिए.
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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अनचाही गर्भावस्था को किसी नाबालिग पर थोपा नहीं जा सकता. कोर्ट ने कहा, "वह एक बच्ची है, जिसे इस उम्र में पढ़ाई करनी चाहिए, ना कि मां बनने के दर्द, अपमान और सामाजिक दबाव से गुजरना चाहिए. अदालत ने आगे कहा, "उसने जो पीड़ा और अपमान सहा है, उसकी कल्पना कीजिए."
एम्स की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि 30 सप्ताह में गर्भपात कराना चिकित्सकीय रूप से संभव नहीं है और इससे एक जीवित बच्चा जन्म ले सकता है, जिसमें गंभीर विकृतियां हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि नाबालिग मां को जीवनभर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और भविष्य में उसकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. हालांकि, अदालत ने दोहराया कि गर्भावस्था समाप्त करने या नहीं करने का अंतिम फैसला पीड़िता और उसके माता‑पिता का ही होगा और एम्स उन्हें सोच समझकर फैसला करने में मदद कर सकता है.
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24 अप्रैल को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की इजाजत दी थी.
ऑपरेशन सिंदूर अपनी शर्तों पर रोका, जरूरत पड़ती, तो लंबी लड़ाई के लिए भी तैयार थे: राजनाथ सिंह
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी मर्जी और अपनी शर्तों पर रोका था, ना कि किसी सैन्य कमजोरी के कारण. समाचार एएनआई नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में बोलते हुए उन्होंने साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह रणनीतिक था और भारत की सैन्य क्षमता में कोई कमी नहीं आई है.
उन्होंने कहा, "मैं यहां फिर से स्पष्ट कर देना चाहता हूं, कि हमने वह ऑपरेशन इसलिए बंद नहीं किया, कि हमारी क्षमता कम हो गई थी. हमने उसे अपनी मर्जी से, अपनी शर्तों पर रोका. अगर जरूरत पड़ती, तो हम लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह से तैयार थे. अचानक जरूरत के समय, क्षमता विस्तार करने की ताकत भी, हमारे पास मौजूद थी, थी ही नहीं, बल्कि अभी भी है और पहले से और अधिक दुरुस्त है."
ऑपरेशन सिंदूर 6 मई से 10 मई 2025 के बीच चलाया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू‑कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय निवासी की मौत हो गई थी. राजनाथ सिंह ने कहा कि हमले के दिन उन्होंने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तत्काल बैठक की थी और सशस्त्र बलों की तैयारियों की सराहना की.
रक्षा मंत्री ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े खतरों का भी जिक्र किया. उन्होंने सुदर्शन एयर डिफेंस जैसी परियोजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सशस्त्र बल एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा का इस्तेमाल कर अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं, जिससे भविष्य में भारत ना केवल अधिक सुरक्षित बल्कि अधिक सशक्त भी बनेगा.
प्रेस की आजादी 25 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर
प्रेस की आजादी 25 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर चली गई है. मीडिया अधिकारों की वकालत करने वाली रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने गुरुवार को यह जानकारी दी. यह संगठन हर साल प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी करता है. संगठन का कहना है, "इंडेक्स के 25 साल के इतिहास में पहली बार दुनिया के आधे से ज्यादा देश प्रेस के लिहाज से 'मुश्किल' या फिर 'बेहद गंभीर' श्रेणी में आ गए हैं. संगठन के मुताबिक, "सभी देशों और इलाकों का औसत स्कोर पहले कभी इतना कम नहीं रहा."
अभिव्यक्ति की आजादी पूरी दुनिया में चुनौतियां झेल रही है. संगठन ने इंडेक्स जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पत्रकारों पर "ढांचागत" हमलों और सऊदी अरब का जिक्र किया जिसने 2025 में एक पत्रकार को फांसी की सजा दी थी.
आरएसएफ का कहना है कि प्रेस की आजादी के लिहाज से "अच्छा" माने जाने वाले देशों में रहने वाली आबादी 20 फीसदी से घट कर 1 फीसदी के नीचे आ गई है. उत्तरी यूरोप के केवल सात देश ही इस श्रेणी में आते हैं. नॉर्वे इन देशों में सबसे ऊपर है.
अमेरिका पहले इस मामले में "काफी अच्छा" कहे जाने वाले देशों की श्रेणी में था लेकिन 2024 में यह वहां से गिर कर "मुश्किल" श्रेणी में आ गया. 2024 में ही डॉनल्ड ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति चुने गए थे उसके बाद यह सात स्थान और गिर कर अब 64वें नंबर पर पहुंच गया है. व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाला रूस भी 172वें नंबर पर है. आरएसएफ के मुताबिक अप्रैल 2026 में वहां 48 पत्रकार जेल में थे. 2026 में सबसे ज्यादा गिरावट सैन्य शासन वाले नाइजर में आया है. 37 स्थान नीचे गिर कर यह 120वें नंबर पर पहुंच गया है.
इंडेक्स में जर्मनी 14वें नंबर पर है जबकि चीन 172वें और भारत 157वें नंबर पर. शीर्ष पर मौजूद तीन देशों में नॉर्वे के अलावा नीदरलैंड्स और एस्तोनिया हैं. डेनमार्क चौथे और स्वीडन पांचवें नंबर पर है.
जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में दिखाने पर नेपाल एयरलाइंस ने मांगी माफी
नेपाल एयरलाइंस ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक मैप में भारतीय क्षेत्रों को गलत तरीके से दिखाए जाने पर माफी मांगी. मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि एयरलाइन ने जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया था. विवाद उठने के बाद एयरलाइन ने कहा कि यह मैप नेपाल या नेपाल एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शाता. एक्स पर जारी बयान में कंपनी ने बताया कि पोस्ट में "गंभीर मानचित्रात्मक त्रुटियां" थीं, जिसके चलते इसे तुरंत हटा दिया गया.
पड़ोसियों से भारत के रिश्तों पर चीन का साया
नेपाल एयरलाइंस ने अपने बयान में कहा कि वह इस चूक के लिए खेद जताती है और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए आंतरिक समीक्षा कर रही है. एयरलाइन ने कहा कि वह क्षेत्र में अपने पड़ोसियों के साथ मजबूत रिश्तों को महत्व देती है और इस पोस्ट से किसी को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए वह अफसोस जताती है.
भारत और नेपाल के बीच लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है. इससे पहले 2020 में नेपाल के नया राजनीतिक नक्शा जारी किए जाने और कालापानी को भारत के मानचित्र में दिखाए जाने पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था. इन इलाकों को लेकर दोनों देशों के दावे लंबे समय से कूटनीतिक मतभेद का कारण बने हुए हैं.
डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के बाद तेल की कीमत 4 साल के उच्चस्तर पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी महीनों तक जारी रह सकती है. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव चार साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत का अमेरिकी बेंचमार्क ब्रेंट पांच फीसदी बढ़ कर जून की डिलीवरी के लिए 124 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया.
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीति अटकी हुई है. इस बीच बुधवार को डॉनल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलिफोन पर बात की. पुतिन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इस्राएल, ईरान के खिलाफ युद्ध दोबारा शुरू करते हैं तो इसके "नुकसानदेह नतीजे" होंगे.
तेल क्षेत्र के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा असरदार साबित हुई है. ईरान यह मांग कर रहा है कि कोई समझौता होने से पहले नाकेबंदी को खत्म करना होगा.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार को कहा कि उसने "नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले 42 कारोबारी जहाजों को लौटा कर अहम उपलब्धि हासिल की है." सेंट्रल कमांड के मुताबिक "41 टैंकरों में 6.9 करोड़ बैरल तेल था जो ईरान की सरकार नहीं बेच सकी." इस तेल की अनुमानित कीमत करीब 6 अरब अमेरिकी डॉलर है.
ट्रंप को धमकाने के आरोपों में एफबीआई के पूर्व निदेशक अदालत में पेश हुए
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के पूर्व निदेशक जेम्स कोमी बुधवार को वर्जीनिया में अदालत में पेश हुए. उन पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राष्ट्रपतिडॉनल्ड ट्रंप के जीवन के लिए खतरा पैदा करने के आरोप हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक कोमी पर कई दूसरे संघीय अपराधों के तहत भी आरोप लगाए गए हैं. मई 2025 में उन्होंने एक इंस्टाग्राम पर शंखों की एक तस्वीर डाली थी. तस्वीर में शंखों को नॉर्थ कैरोलाइना की एक बीच पर 8647 की आकृति में सजाया गया था. ट्रंप का कहना है कि यह कूट भाषा में एक धमकी थी.
कोमी पर "जान बूझ कर अमेरिकी राष्ट्रपति को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने और उनकी जान पर खतरा पैदा करने के आरोप गए हैं." इसके साथ ही उन पर किसी और देश की तरफ से खतरा पैदा करने का भी आरोप लगाया गया है. इन दोनों में से हरेक के लिए उन्हें 10 साल की कैद की सजा हो सकती है.
एफबीआई के पूर्व निदेशक अलेक्जैंड्रिया की अदालत में सुनवाई के लिए हाजिर हुए और वहां से उन्हें बाद में घर जाने की अनुमति मिल गई.
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टोड ब्लांशे ने पत्रकारों से कहा है कि वह नहीं जानते कोमी दोबारा कब अदालत में पेश होंगे. ब्लांशे से जब पूछा गया कि क्या कोई भी अगर "8647" नंबरों को पोस्ट करेगा उस पर यही आरोप लगेंगे? जवाब में ब्लांशे ने कहा, "हरेक धमकी अलग है, हर बार जब राष्ट्रपति को धमकी दी जाएगी तो यह जरूरी नहीं कि उसके लिए अभियोग लगे. यह जांच पर निर्भर है. यह सभी दूसरे कारकों पर निर्भर है."
डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि एफबीआई के पूर्व प्रमुख "अच्छी तरह से" भावार्थ जानते थे. अदालत में सुनवाई के बाद ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा है, "8647 का मतलब है 'राष्ट्रपति ट्रंप को मार दो.' जेम्स कोमी जो एक बुरे पुलिसकर्मी हैं, सबसे बुरे में से एक, इसे अच्छी तरह जानते थे."
इंस्टाग्राम पोस्ट डालने के बाद कोमी ने इसके लिए माफी मांगी और कहा था कि उन्हें, "नहीं पता था कि कुछ लोग इन संख्याओं को हिंसा से जोड़ेंगे." कोमी ने यह भी कहा, "मेरे सामने यह कभी नहीं आया लेकिन मैं हर तरह की हिंसा का विरोध करता हूं और इस पोस्ट को हटा रहा हूं."
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 30, 2026 06:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

