Axis My India Exit Poll 2026: ‘70% लोगों ने जवाब देने से किया इनकार’, पश्चिम बंगाल के लिए एग्जिट पोल जारी नहीं करेगा एक्सिस माई इंडिया

Axis My India West Bengal Exit Poll 2026 Update Details: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Election 2026) को लेकर एक्सिस माई इंडिया ने बड़ा फैसला लेते हुए एग्जिट पोल जारी नहीं करने का ऐलान किया है. एजेंसी ने इसका कारण मतदाताओं की असामान्य चुप्पी और सर्वे में भाग लेने से इनकार को बताया है. Axis My India के निदेशक और एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं ने सर्वे में हिस्सा लेने से मना कर दिया, जिससे विश्वसनीय डेटा तैयार करना मुश्किल हो गया. यह भी पढ़ें: Axis My India Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए एग्जिट पोल जारी नहीं करेगा एक्सिस माई इंडिया, जानिए क्या है वजह

क्यों रोका गया एग्जिट पोल (Reason Behind Skipping Exit Poll)

प्रदीप गुप्ता के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का जवाब न देना सामान्य ट्रेंड से काफी अलग है और इससे ‘नॉन-रिस्पॉन्स बायस’ का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि जब सैंपल प्रतिनिधिक नहीं होता, तो वोट शेयर और सीटों का अनुमान देना भ्रामक हो सकता है. इसलिए एजेंसी ने गलत या अधूरे आंकड़े जारी करने के बजाय एग्जिट पोल रोकना बेहतर समझा.

सर्वे में सामने आई बड़ी चुनौती (Survey Challenges)

एक्सिस माई इंडिया ने राज्यभर में सर्वे के लिए 80 सर्वेयर तैनात किए थे और 13,000 से ज्यादा लोगों से बातचीत करने की कोशिश की गई थी. खुद प्रदीप गुप्ता ने भी ग्राउंड पर जाकर हालात का जायजा लिया. इसके बावजूद मतदाताओं की चुप्पी के कारण पर्याप्त डेटा नहीं मिल सका, जिससे सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं हो पाया.

एक्सिस माई इंडिया ने मतदाताओं की जानकारी न बताने के कारण बंगाल एग्जिट पोल जारी नहीं किया

अन्य एजेंसियों के अनुमान (Other Exit Poll Predictions)

एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल न जारी करने के बीच अन्य 8 एजेंसियों ने अपने-अपने अनुमान जारी किए हैं. इनमें से 4 एग्जिट पोल ने भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया है. वहीं 2 सर्वे में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर बताई गई है. जबकि 2 अन्य एग्जिट पोल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के आरामदायक जीत के साथ चौथी बार सत्ता में वापसी के संकेत दिए गए हैं.

इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता और मतदाताओं के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अब सबकी नजरें आधिकारिक नतीजों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक तस्वीर साफ करेंगे.