ताजा खबरें | राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे पर सभापति ने जतायी अप्रसन्नता
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित तिथि से एक दिन पहले ही बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई और सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस शीतकालीन सत्र के दौरान सदन के कामकाज पर चिंता और अप्रसन्नता जतायी।
नयी दिल्ली, 22 दिसंबर राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित तिथि से एक दिन पहले ही बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई और सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस शीतकालीन सत्र के दौरान सदन के कामकाज पर चिंता और अप्रसन्नता जतायी।
सदन की पूर्वाह्न 11 बजे कार्यवाही आरंभ होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक अखबार की खबर का हवाला देकर अयोध्या से संबंधित एक मुद्दा उठाने की कोशिश की।
खड़गे ने कहा कि यह महत्वपूर्ण मुद्दा है लिहाजा उन्हें उठाने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस पर सभापति ने खड़गे से कहा कि मुद्दे को उठाने के लिए उन्हें नोटिस देना चाहिए था।
इसके बाद उन्होंने कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र आज पूरा हो रहा है। सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में नायडू ने कहा सदस्यों से सामूहिक रूप से चिंतन करने और सत्र को लेकर आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "सदन का शीतकालीन सत्र आज समाप्त हो रहा है। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी नहीं महसूस हो रही कि सदन ने अपनी क्षमता से काफी कम काम किया। मैंने आप सभी से सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से आत्मचिंतन करने का आग्रह किया कि क्या यह सत्र भिन्न और बेहतर हो सकता था। मैं इस सत्र को लेकर विस्तार से नहीं बोलना चाहता क्योंकि यह मुझे आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।’’
राज्यसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार संपन्न हुए शीतकालीन सत्र की 18 बैठकों के दौरान राज्यसभा की उत्पादकता 47.90 प्रतिशत रही और कुल निर्धारित बैठक समय 95 घंटे छह मिनट में से सदन केवल 45 घंटे 34 मिनट ही कार्य कर सका।
सदन में हंगामे, व्यवधानों और स्थगन के कारण कुल 49 घंटे 32 मिनट का समय नष्ट हुआ जो कुल उपलब्ध समय का 52.08 प्रतिशत है। सत्र के दौरान प्रश्नकाल बुरी तरह प्रभावित हुआ और कुल प्रश्नकाल का 60.60 प्रतिशत व्यवधानों के कारण नष्ट हो गया। प्रश्नकाल 18 में से सात बैठकों में शुरू ही नहीं हो सका।
राज्यसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान 10 विधेयक पारित हुए जबकि विनियोग विधेयक पर आज होने वाली चर्चा पूरी नहीं हुयी। विनियोग विधेयक सहित सरकारी विधेयकों पर कुल 21 घंटे सात मिनट चर्चा हुयी जो सदन के कामकाज के समय का 46.50 प्रतिशत होता है।
शीतकालीन सत्र के दौरान शून्यकाल के लिए उपलब्ध कुल समय का केवल 30 प्रतिशत समय का ही उपयोग हो सका और 18 बैठकों के दौरान लोक महत्व के केवल 82 मुद्दे ही उठाए गए वहीं विशेष उल्लेख के जरिए 64 मुद्दे उठाए गए।
संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर को शुरू हुआ था और यह 23 दिसंबर को समाप्त होना था। लेकिन एक दिन पहले ही उच्च सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
ज्ञात हो कि संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को, मॉनसून सत्र के दौरान ‘‘अशोभनीय आचरण’’ करने के कारण, इस सत्र की शेष अवधि के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था।
विपक्ष इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने की मांग कर हंगामा करता रहा जबकि सरकार अड़ी रही कि जब तक निलंबित सदस्य माफी नहीं मांगेंगे तब तक उनका निलंबन रद्द नहीं किया जाएगा। इसी वजह से सदन में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा और कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 22, 2021 02:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

