रांची, 26 अगस्त झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि देश में विपक्ष इस समय कमजोर नजर आ रहा है लेकिन विपक्ष को एकजुट होकर केन्द्र की ‘गलत’ नीतियों का विरोध करना होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गैर- भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बुलायी गयी बैठक में सोरेन ने यह बात कही।
सोरेन ने आरोप लगाया, ‘‘केन्द्र सरकार की अनेक नीतियों में विपक्ष की राज्य सरकारों के साथ भेदभाव स्पष्ट दिखता है। लेकिन विपक्ष फिलहाल देश में कमजोर दिख रहा है। हमें एकजुट होकर केन्द्र की गलत नीतियों का विरोध करना होगा।’’
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नाम पर लाभ में चल रही देश की बड़ी कंपनियों जैसे गेल, भेल, एनटीपीसी आदि के निजीकरण की तैयारी चल रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि रेलवे तक के निजीकरण का प्रयास चल रहा है। इसका विपक्ष को पुरजोर विरोध करना होगा।
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सोरेन ने कहा, ‘‘केन्द्र सरकार ने तमाम गलतियां कर रखी हैं और विपक्ष को दूसरे कारणों से उलझाये रखने का प्रयास किया जाता है। लेकिन हमें इनके इस षड्यंत्र का जवाब देना होगा।’’
देश की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सोरेन ने कहा, ‘‘आखिर यह कौन सी आर्थिक नीति है कि जिस समय देश में कोई भी उद्योग काम नहीं कर रहा है, सब कुछ बंद है उस समय भी शेयर बाजार का सेंसेक्स बढ़ रहा है?’’
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में महंगाई और बेरोजगारी से लोग परेशान हैं। देश की वास्तविक स्थिति अच्छी नहीं है। इसके खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज उठानी होगी।
सोरेन ने कहा, ‘‘कांग्रेस केन्द्र की इन नीतियों का विरोध करे। हम मजबूती से उसके साथ खड़े रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ पर्यावरण मंजूरी के नियमों में प्रस्तावित बदलाव बहुत ही खतरनाक हैं। झारखंड जैसे खनिज और वन संपदा वाले राज्य के लिए तो यह बदलाव भयानक परिणाम वाले होंगे।’’
केंद्र पर हमला बोलते हुए सोरेन ने कहा, ‘‘हमारे यहां के कोयले और लोहे की खदानों को यह बेचने में लगे हुए थे। लेकिन हमने सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर किसी तरह इसे रुकवाया है।’’
उन्होंने देश में जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को केन्द्र से मिलने वाली सहायता का मुद्दा उठाया और कहा कि कोरोना काल में राज्यों को भारी आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। इसके चलते अपने आर्थिक संसाधन बढ़ाने के लिए झारखंड सरकार प्रयासरत है।
उन्होंने एनईईटी और जेईई की परीक्षाएं कराये जाने का समर्थन किया लेकिन कहा कि इसे आयोजित करने में अनेक खतरे हैं जिनसे निपटने के लिए केन्द्र सरकार को राज्यों को विशेष मदद करनी चाहिए।
हेमंत सोरेन ने यह बैठक बुलाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की प्रशंसा की और कहा कि ऐसी और बैठकें बुलायी जानी चाहिए जिससे विपक्षी एकता मजबूत हो सकेगी।
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