चंडीगढ़, 20 अक्टूबर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि पंजाब के किसानों के प्रति किये जा रहे ‘अन्याय’ के आगे झुकने के बजाए वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि केंद्र द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानूनों के कारण राज्य की शांति बाधित हो सकती है और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हालात से परेशान और निराश हैं। वह कोविड-19 संकट के दौरान लिए गए केंद्र के फैसले को समझना चाहते हैं जो किसानों की परेशानी का सबब बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सिख लोकाचार पर हुए हमलों का समर्थन करने या उन्हें स्वीकार करने के बजाए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस्तीफा देने से नहीं डरता। मैं सरकार के बर्खास्त होने से भी नहीं घबराता। लेकिन मैं किसानों को बरबाद या परेशान नहीं होने दूंगा।’’
मुख्यमंत्री ने विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को अस्वीकार करने के लिए उनकी सरकार द्वारा सदन में लाए गए चार विधेयकों को पेश करते समय यह कहा।
सिंह ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि परिस्थितियां हाथ से निकल सकती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि कानून वापस नहीं लिए गए तो नाराज युवा किसानों के पक्ष में सड़कों पर उतर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस समय चीजें चल रही हैं, उनसे शांतिपूर्ण माहौल बाधित होने के आसार हैं।
सिंह ने कहा कि 80 और 90 के दशकों में ऐसा ही हुआ था। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान दोनों मिलकर देश की शांति में खलल का किसी भी तरह का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
आंदोलन कर रहे किसानों के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के पास उनके तथा परिवारों के लिए लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
उन्होंनें किसानों से यह अपील भी की कि वे रेल रोको आंदोलन समाप्त कर राज्य सरकार की मदद करें और आवश्यक माल की आवाजाही होने दें।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम आपके साथ खड़े रहे हैं। अब आपकी हमारे साथ खड़े होने की बारी है।’’
उन्होंने कहा कि पूरा सदन उनके साथ है लेकिन राज्य इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां बिजली उत्पादन बहुत निम्न स्तर पर चला गया है, यूरिया नहीं है और गोदाम में ताजा धान की फसल को रखने के लिए जगह नहीं है।
सिंह ने केंद्र के कृषि कानूनों के विरुद्ध चार विधेयक पेश किये, इनमें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन विधेयक 2020, आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक-2020 तथा दीवानी प्रक्रिया संहिता में संशोधन संबंधी विधेयक हैं।
सिंह ने सरकार के चारों विधेयकों को सदन में चर्चा और पारित करने के लिए पेश करते हुए कहा, ‘‘कृषि कानूनों के नाम पर दरअसल कारोबारी कानून पारित किये गये हैं। पूरे देश के बाजार में किसानों को नहीं बल्कि व्यापारियों को सुगम पहुंच मिलेगी।’’
मुख्यमंत्री ने केंद्र पर कृषि कानूनों के साथ पंजाब को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री के लिए सवाल किया कि क्या यह कार्रवाई न्यायोचित है।
उन्होंने भाजपा पर राज्य की कृषि व्यवस्था को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब अन्य राज्यों ने भी देश को खाद्यान्न मुहैया कराना शुरू कर दिया है, इसलिए केंद्र की सरकार ने पंजाब की अनदेखी की है।
सिंह ने कहा कि वे भूल गये कि पंजाब ने देश को कैसे बचाया और 70 सालों तक कैसे देश का पेट भरता रहा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY