रांची, 30 मई झारखंड सरकार ने शनिवार को निजी विमान से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से 180 श्रमिकों को राज्य लाने की व्यवस्था की ।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से श्रमिकों को लाए जाने के एक दिन पहले ही राज्य ने लेह में फंसे हुए 60 कामगारों को उड़ान से लाने का इंतजाम किया था ।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘दोनों उड़ानों का खर्च राज्य सरकार ने वहन किया है। ’’
अधिकारियों ने बताया कि वापस आए श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच के बाद बसों से उनके संबंधित जिलों में भेजा जाएगा ।
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अपने गृह राज्य आए मजदूरों ने कहा कि अंडमान प्रशासन, एनजीओ और वहां रहने वाले झारखंड के लोगों ने उन्हें खाना दिया और रहने की व्यवस्था की ।
मुख्यमंत्री ने 21 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख और पूर्वोत्तर के राज्यों में फंसे हुए श्रमिकों को विमानों से लाने की अनुमति मांगी थी क्योंकि इन जगहों से लोगों को बसों और ट्रेनों से लाना मुमकिन नहीं था ।
लॉकडाउन के कारण अंडमान और निकोबार में फंसे हुए श्रमिकों ने वापसी की व्यवस्था के लिए झारखंड सरकार से अनुरोध किया था।
बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद एक श्रमिक ने कहा, ‘‘हममें से कई लोग वहां सड़क परियोजनाओं में काम करते थे लेकिन लॉकडाउन के कारण परेशानी बढ़ गयी ।’’
उन्होंने कहा कि वे दक्षिण अंडमान और उत्तरी अंडमान के बीच सड़क निर्माण के काम में जुटे हुए थे ।
एक और श्रमिक ने कहा, ‘‘हम दक्षिण अंडमान में थे वहां प्रशासन, एनजीओ और वर्षों से वहां रह रहे झारखंड के कुछ लोगों ने हमें खाना दिया ।’’
अधिकारियों ने बताया कि पोर्टब्लेयर में विमान में सवार होने के पहले श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच की गयी ।
देशभर से करीब 4.5 लाख मजदूर एक मई के बाद से विशेष ट्रेनों, बसों और उड़ानों के जरिए झारखंड पहुंचे हैं ।
शुक्रवार तक राज्य में कोरोना वायरस के 522 पुष्ट मामलों में संक्रमण के 313 मामले बाहर से आए श्रमिकों में मिले हैं ।
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