देश की खबरें | भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के नए संस्करण का सफल परीक्षण किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

बालासोर, 30 सितंबर भारत ने ओडिशा में बालासोर स्थित एकीकृत प्रक्षेपण स्थल से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक नए संस्करण का बुधवार को सफल परीक्षण किया, जिसकी मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तक है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

रक्षा सूत्रों ने कहा कि यह मिसाइल कई स्वदेशी विशिष्टताओं से लैस है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि सतह से सतह पर मार करने वाली यह क्रूज मिसाइल स्वदेशी बूस्टर और ‘एअरफ्रेम’ के साथ भारत में निर्मित अन्य उप-प्रणालियों जैसी विशिष्टताओं से लैस है।

बयान के मुताबिक आज पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे इसका सफल परीक्षण किया गया।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ अध्यक्ष ने डीआरडीओ और ब्रह्मोस टीम के सभी कर्मियों को आज के परीक्षण पर बधाई दी।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘टीम डीआरडीओ और टीम ब्रह्मोस मिसाइल को स्वदेशी बूस्टर और ‘एअरफ्रेम’ से युक्त ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण पर बधाई। यह उपलब्धि भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ संकल्प को एक बड़ी मजबूती देगी।’’

डीआरडीओ के अधिकारियों ने इस परीक्षण को ‘‘सफल’’ करार देते हुए कहा कि मिसाइल के प्रक्षेपण के दौरान सभी मानक प्राप्त कर लिए गए।

‘ब्रह्मोस लैंड अटैक क्रूज मिसाइल’ (एलएसीएम) 2.8 मैक की शीर्ष गति से रवाना हुई, जो ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है।

अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल के जमीन से हमला करने वाले नए संस्करण की मारक क्षमता इसकी वास्तविक मारक क्षमता 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 400 किलोमीटर तक की गई है।

भारत, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी तथाकथित सीमा पर कई रणनीतिक स्थलों पर पहले ही काफी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती कर चुका है।

यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं भारी अस्त्र-शस्त्रों के साथ एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी हैं।

एक बयान में कहा गया कि अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण स्वदेशी उपकरण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

इसमें कहा गया, ‘‘आज के सफल परीक्षण ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के तहत शक्तिशाली ब्रह्मोस अस्त्र प्रणाली के स्वदेशी बूस्टर और अन्य स्वदेशी उपकरणों के सिलसिलेवार उत्पादन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।’’

ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन, समुद्र और लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है।

मिसाइल के पहले विस्तारित संस्करण का सफल परीक्षण 11 मार्च 2017 को किया गया था, जिसकी मारक क्षमता 450 किलोमीटर थी।

तीस सितंबर 2019 को चांदीपुर स्थित आईटीआर से कम दूरी की मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल के जमीनी संस्करण का सफल परीक्षण किया गया था।

डीआरडीओ और रूस के प्रमुख एरोस्पेस उपक्रम एनपीओएम द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्राह्मोस मिसाइल मध्यम रेंज की ‘रेमजेट सुपरसोनिक क्रूज’ मिसाइल है, जिसे पनडुब्बियों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों तथा जमीन से दागा जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि यह मिसाइल पहले से ही भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के पास है।

इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है।

पिछले साल मई में भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का सफल परीक्षण किया गया था।

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